ईरान और अमेरिका की तनातनी का भारत पर असर: अप्रैल-मई में क्रूड ऑयल का आयात बिल 70 फीसदी बढ़ा व्यापार 4 महीने पहले 123
अमेरिका और ईरान के बीच चले संघर्ष के चलते भारत का कच्चा तेल आयात बिल अप्रैल और मई के दौरान 70 फीसदी तक उछल गया है। हालांकि तेल की मात्रा में गिरावट आई है, लेकिन कीमतों में भारी वृद्धि के कारण सरकार को अतिरिक्त खर्च करना पड़ा है।

आयात बिल में भारी उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच करीब 4 महीने तक चली खींचतान और युद्ध का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल और मई के महीनों में भारत का क्रूड ऑयल आयात बिल पिछले साल के मुकाबले 70 फीसदी बढ़ गया है। इस साल की इसी अवधि में भारत को कच्चे तेल के आयात पर 35.5 अरब डॉलर खर्च करने पड़े, जबकि पिछले वर्ष यह खर्च 20.9 अरब डॉलर था।

मात्रा कम, खर्च ज्यादा

हैरानी की बात यह है कि आयात बिल में यह वृद्धि तब दर्ज की गई है जब आयात की मात्रा में कमी आई है। अप्रैल और मई के दौरान भारत ने कुल 4.17 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 4.23 करोड़ टन से 1.4 फीसदी कम है। पश्चिम एशिया के संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है। गौरतलब है कि भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 85 फीसदी आयात करता है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड आयातक है।

तेल की बढ़ती कीमतें

युद्ध के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़ीं। अप्रैल के मध्य में जो कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, वह अप्रैल के अंत तक 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। अप्रैल और मई के दौरान औसत कीमत 117 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही। आंकड़ों के मुताबिक, मई में क्रूड की औसत कीमत 106 डॉलर और अप्रैल में 114 डॉलर प्रति बैरल से अधिक थी।

घरेलू उत्पादन और गैस संकट

भारत की स्थिति इसलिए भी नाजुक रही क्योंकि देश का अपना घरेलू क्रूड उत्पादन 4 फीसदी गिरकर महज 46 लाख टन रह गया। इसके अलावा, नेचुरल गैस के आयात पर भी बुरा असर पड़ा। ईरान द्वारा कतर के गैस उत्पादन क्षेत्र को निशाना बनाए जाने के बाद भारत की गैस आपूर्ति प्रभावित हुई, क्योंकि भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरत का 45 फीसदी कतर से आयात करता है। अप्रैल और मई में गैस का आयात 19 फीसदी गिरकर 4,532 एमएमएससीएम रह गया।

भविष्य की रणनीति

युद्ध समाप्त होने के बाद भी गैस और तेल की आपूर्ति को पूरी तरह सामान्य होने में वक्त लगेगा। इस संकट से सबक लेते हुए भारत अब ऊर्जा सुरक्षा के लिए नए स्रोत तलाश रहा है। इसके लिए कनाडा, यूनाइटेड स्टेट्स, ब्राजील और मोजाम्बिक के साथ बातचीत की जा रही है। साथ ही, पश्चिम एशिया संकट के चलते पेट्रोलियम निर्यात में भी 26 फीसदी की गिरावट आई है, जो गिरकर 72 लाख टन रह गया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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