कच्चे तेल में बड़ी गिरावट से शेयर बाजार गुलजार, कई सेक्टरों के शेयरों में जोरदार तेजी व्यापार एक घंटा पहले 2
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंचने से ऑयल मार्केटिंग, एयरलाइन और पेंट कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त खरीदारी दिखी, जबकि तेल उत्पादक कंपनियों के शेयर दबाव में आ गए।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट का साफ असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। तीन महीने के निचले स्तर तक लुढ़के क्रूड ऑयल ने कई कंपनियों के लिए राहत भरा माहौल तैयार कर दिया, जिससे निवेशकों का मूड बेहतर हुआ। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, विमानन और पेंट कंपनियों के शेयरों में जमकर खरीदारी हुई, जबकि तेल उत्पादन से जुड़ी कंपनियों के लिए यह खबर सुखद नहीं रही और उनके शेयर नीचे की ओर फिसल गए।

ट्रंप के बयान से बदला बाजार का मिजाज

कच्चे तेल में आई नरमी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ समझौते की संभावना जताई और आगे किसी सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाने की बात कही। इस बयान के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर बनी आशंकाएं कमजोर पड़ गईं। निवेशकों को भरोसा है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच सहमति बनती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल की आपूर्ति सामान्य ढर्रे पर लौट सकती है। इसी उम्मीद के बीच ब्रेंट क्रूड फिसलकर करीब 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जिसे लगभग तीन महीने का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त उछाल

तेल की कीमतें घटते ही सबसे अधिक लाभ ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को मिलता है। यही कारण रहा कि भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल जैसी कंपनियों के शेयरों में मजबूत तेजी दर्ज की गई। शुक्रवार के कारोबार में BPCL के शेयर 4.5 फीसदी से ज्यादा चढ़े, HPCL में 5 फीसदी से अधिक और IOC में 4 फीसदी से ज्यादा की बढ़त रही।

निवेशकों का मानना है कि कच्चा तेल सस्ता होने पर इन कंपनियों की लागत घटती है और ईंधन बिक्री पर मार्जिन बेहतर होता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल में प्रति डॉलर की गिरावट से इस क्षेत्र की कमाई में सैकड़ों करोड़ रुपये का अतिरिक्त फायदा जुड़ सकता है। यही वजह रही कि इन शेयरों में जमकर खरीदारी हुई और पूरे सेक्टर में सकारात्मक रुख बना रहा।

एयरलाइन और पेंट कंपनियों को भी मिला सहारा

कच्चे तेल की कीमतों में कमी का असर सिर्फ तेल कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। एयरलाइन कंपनियों के लिए विमान ईंधन सबसे बड़ी परिचालन लागतों में से एक है। ईंधन सस्ता होने पर उनकी लागत घटती है और मुनाफा बढ़ने की संभावना मजबूत हो जाती है। वहीं क्रूड से जुड़े डेरिवेटिव्स पेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए कच्चे माल की लागत का 50 फीसदी तक हिस्सा होते हैं।

इसी का नतीजा रहा कि इंडिगो के शेयर करीब 4.5 फीसदी चढ़े, जबकि एशियन पेंट्स, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज और बर्जर पेंट्स के शेयर भी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे।

कमर्शियल वाहन और फाइनेंस कंपनियों पर भी असर

डीजल की कीमतों में नरमी का लाभ ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी मिलता है। ट्रक ऑपरेटरों की कुल लागत में ईंधन का हिस्सा काफी बड़ा होता है। डीजल सस्ता होने पर माल ढुलाई का खर्च घटता है और ऑपरेटरों की आमदनी बढ़ती है। बेहतर नकदी प्रवाह के चलते वे नए वाहन खरीदने पर भी विचार कर सकते हैं।

यही कारण है कि अशोक लेलैंड, फोर्स मोटर्स और टाटा मोटर्स के कमर्शियल वाहन कारोबार को लेकर निवेशकों की उम्मीदें बढ़ी हैं। इसके साथ ही वाहन ऋण देने वाली वित्तीय कंपनियों को भी फायदा मिल सकता है, क्योंकि ट्रांसपोर्ट कारोबार में निवेश बढ़ने की संभावना मजबूत रहती है।

तेल उत्पादक कंपनियों के लिए बढ़ी चिंता

जहां सस्ते तेल से कई क्षेत्रों को राहत मिली, वहीं तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों के लिए यह स्थिति चुनौती बन सकती है। ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी कंपनियों की कमाई सीधे तौर पर कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने पर इन कंपनियों को अपना उत्पाद कम कीमत पर बेचना पड़ता है, जिससे राजस्व पर दबाव बढ़ता है।

बाजार के अनुमानों के मुताबिक, तेल की कीमत में प्रति बैरल 1 डॉलर की गिरावट से ONGC को सालाना राजस्व में करीब 300-400 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। इसी चिंता को दर्शाते हुए शुक्रवार के कारोबार में ONGC और ऑयल इंडिया के शेयर लगभग 3 फीसदी टूट गए।

आगे कहां रहेगा निवेशकों का फोकस

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तेल बाजार की दिशा काफी हद तक ईरान-अमेरिका के रिश्तों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। अगर दोनों देशों के बीच समझौता होता है और तेल आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कायम रह सकता है। ऐसी स्थिति में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, एयरलाइंस, पेंट कंपनियां और परिवहन क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां निवेशकों की पसंद बनी रह सकती हैं।

दूसरी ओर, तेल उत्पादक कंपनियों पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि उनके प्रदर्शन पर तेल की कीमतों का सीधा असर पड़ता है। फिलहाल बाजार का संकेत यही है कि सस्ता तेल भारतीय अर्थव्यवस्था और कई उद्योगों के लिए राहत लेकर आया है, जिससे निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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