भारत
2 महीने पहले
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विचारों
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के अत्यंत नाजुक और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र यानी इकोसिस्टम को बचाने की दिशा में वहां के प्रशासन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस बड़ी मुहिम के तहत लद्दाख के उपराज्यपाल (एलजी) विनय कुमार सक्सेना ने एक नवगठित विशेष बल की कमान पूर्व सैनिकों के हाथों में सौंपी है। उपराज्यपाल ने नवनिर्मित पर्यावरण संरक्षण बल (EPF) में सेना, अर्धसैनिक बलों और लद्दाख स्काउट्स से सेवानिवृत्त हुए 100 पूर्व सैनिकों को औपचारिक रूप से तैनात किया है। इस बल का मुख्य उद्देश्य लद्दाख की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों की रक्षा करना है।
संवेदनशील क्षेत्रों में होगी मुस्तैदी और मिलेंगे विशेष अधिकार
इस नवनिर्मित बल यानी EPF के जवानों को लद्दाख के उन चुनिंदा इलाकों में तैनात किया जाएगा जो पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। इन कर्मियों की सबसे प्रमुख जिम्मेदारी लद्दाख के खूबसूरत पहाड़ों और मैदानों में अवैध रूप से होने वाली ऑफ-रोडिंग यानी तय रास्तों से अलग गाड़ियां चलाने की बढ़ती घटनाओं को रोकना होगा। ऐसी गतिविधियां न केवल यहां के शांत वातावरण को बिगाड़ती हैं बल्कि दुर्लभ वन्यजीवों के लिए भी एक बड़ा खतरा बन चुकी हैं। इस बल को पूरी तरह से प्रभावी और ताकतवर बनाने के लिए प्रशासन ने इन्हें विशेष कानूनी अधिकार भी दिए हैं। अब ये पूर्व सैनिक नियमों की अनदेखी करने वाले और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले हुड़दंगियों का मौके पर ही चालान काट सकेंगे।
आखिर क्यों महसूस हुई इस विशेष बल की आवश्यकता?
लद्दाख में पिछले कुछ समय से पर्यटन में भारी इजाफा हुआ है, लेकिन इसके साथ ही कुछ चिंताजनक प्रवृत्तियां भी देखने को मिली हैं। संवेदनशील और संरक्षित क्षेत्रों के भीतर पर्यटकों द्वारा अवैध रूप से टेंट लगाना और अनधिकृत कैंपिंग करना आम बात हो गई है। इसके अलावा, जंगली जानवरों को तंग करना, गाड़ियों से उनका पीछा करना, हर तरफ कूड़ा-कचरा फैलाना और धड़ल्ले से सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल करने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इन्हीं सब चुनौतियों से निपटने के लिए इस अनूठी पहल की शुरुआत की गई है। EPF को यह साफ जिम्मेदारी दी गई है कि वे इन संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों के भीतर किसी भी प्रकार के नियमों के उल्लंघन पर पैनी नजर रखें और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों जैसे कि प्लास्टिक का कचरा खुले में फेंकने पर तुरंत सख्त कार्रवाई करें।
पूर्व सैनिकों के पुनर्वास के साथ मिलेगी सम्मानजनक राशि
यह अनूठी योजना न केवल लद्दाख के नाजुक पर्यावरण की रक्षा करेगी, बल्कि देश की सेवा कर चुके पूर्व सैनिकों के सम्मानजनक पुनर्वास की दिशा में भी एक बहुत बड़ा कदम साबित होगी। इसके जरिए सेवानिवृत्त सैनिकों को अपने गृह क्षेत्र में रहकर समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण का एक नया अवसर मिलेगा। पर्यावरण संरक्षण बल के प्रत्येक सदस्य को उनकी सेवा के बदले हर महीने 25,000 रुपये का मासिक वेतन दिया जाएगा। चूंकि ये सभी जवान स्थानीय स्तर पर लद्दाख के भूगोल और रास्तों से भली-भांति परिचित हैं, इसलिए वे बाहरी लोगों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी ढंग से और मुस्तैदी से इन क्षेत्रों की निगरानी करने में सक्षम होंगे।
स्वच्छता और जैव-विविधता के एंबेसडर बनेंगे ये जवान: उपराज्यपाल
पर्यावरण संरक्षण बल के पहले दस्ते को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते समय उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने अपने संबोधन में लद्दाख की भौगोलिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लद्दाख दुनिया के सबसे नाजुक और अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है। यहां कई ऐसी दुर्लभ और लुप्तप्राय वन्यजीव प्रजातियां वास करती हैं जिन्हें विशेष सुरक्षा की अत्यंत आवश्यकता है। उपराज्यपाल ने आगे कहा कि बढ़ते पर्यटन के साथ-साथ हमारी नैतिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियां भी बहुत अधिक बढ़ जाती हैं। उन्होंने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि इन पूर्व सैनिकों के कड़े अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी के बल पर लद्दाख में जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और ये जवान स्वच्छता तथा जैव-विविधता संरक्षण के सच्चे एंबेसडर बनकर उभरेंगे।
जवानों ने ली पर्यावरण सुरक्षा की शपथ
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान उपराज्यपाल ने EPF के सभी जवानों को कर्तव्यनिष्ठा की विशेष शपथ दिलाई। इस शपथ के माध्यम से सभी जवानों ने लद्दाख की अनमोल प्राकृतिक संपदा, घने जंगलों, दुर्लभ वन्यजीवों और समृद्ध जैव-विविधता की सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभाने का संकल्प लिया। इसके साथ ही, बल के प्रत्येक सदस्य ने यह भी प्रतिज्ञा की कि वे स्वयं कभी भी सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे और अपने परिवार, मित्रों तथा स्थानीय समाज के लोगों को भी पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को अपनाने के लिए लगातार जागरूक और प्रोत्साहित करते रहेंगे।
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