कुल्लू में अंधविश्वास या आस्था? गुफा से दिन में दो बार निकलने वाली बकरी को लोग मान रहे 'देवी का चमत्कार', उमड़ रही भारी भीड़ हिमाचल प्रदेश 2 घंटे पहले 4
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक गुफा से दिन में दो बार निकलने वाली बकरी को लोग जोगणी माता का चमत्कार मान रहे हैं। इस अनोखे नजारे को देखने के लिए फोरलेन पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है और ट्रैफिक जाम जैसे हालात बन रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत पहाड़ी जिले कुल्लू से एक बेहद हैरान करने वाला और अनोखा मामला सामने आया है। यहां आस्था और अंधविश्वास के बीच की बारीक लकीर एक बार फिर धुंधली होती दिखाई दे रही है। कुल्लू में इन दिनों एक बकरी सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। दावा किया जा रहा है कि यह बकरी एक पहाड़ी गुफा में रहती है और दिन में दो बार वहां से बाहर निकलती है। इस साधारण सी घटना को स्थानीय लोग और वहां आने वाले सैलानी एक बड़ा दैवीय चमत्कार मान रहे हैं।

जोगणी माता की शक्ति और उमड़ती भीड़

इस बकरी को लेकर लोगों में इस कदर श्रद्धा जागृत हो गई है कि इसके दीदार के लिए फोरलेन सड़क के पास रोजाना सैकड़ों लोगों की भारी भीड़ जमा हो रही है। लोग इस घटना को सावन के पवित्र महीने और स्थानीय आराध्य देवी जोगणी माता की अपार शक्ति से जोड़कर देख रहे हैं। यही वजह है कि जोगणी माता मंदिर क्षेत्र के पास स्थित फोरलेन मार्ग पर हर दिन लोगों और पर्यटकों का मेला सा लगा रहता है।

हाल ही में रविवार के दिन भी इस पहाड़ी पर बकरी को देखने के लिए भारी संख्या में लोग जुट गए। सड़क किनारे गाड़ियां खड़ी होने और लोगों के जमा होने के कारण वहां यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया और जाम जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस दौरान अंधविश्वास का नजारा तब देखने को मिला जब कुछ महिलाओं ने बकरी को पहाड़ी पर देखते ही सड़क पर लेटकर दंडवत प्रणाम करना शुरू कर दिया। जैसे ही बकरी अपनी गुफा से बाहर आई, वहां मौजूद भीड़ ने माता के जयकारे लगाने शुरू कर दिए।

चमत्कार के पीछे का व्यावहारिक सच

जहां एक तरफ लोग इसे माता का चमत्कार मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसके पीछे का व्यावहारिक और वैज्ञानिक कारण भी बता रहे हैं। मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि इस बात की पूरी संभावना है कि यह बकरी किसी गडरिये यानी गद्दी समुदाय के झुंड से बिछड़ गई है। पहाड़ी रास्तों पर चलते हुए यह रास्ता भूल गई और इसने खुद को सुरक्षित रखने के लिए इस गुफा को अपना ठिकाना बना लिया।

एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि जब उन्होंने अपने कैमरे से ज़ूम करके देखा, तो बकरी के शरीर पर कुछ खास निशान दिखाई दिए। आमतौर पर गद्दी समुदाय के लोग अपनी भेड़-बकरियों की पहचान के लिए उनके शरीर पर इस तरह के निशान लगाते हैं। इससे यह साफ होता है कि यह कोई जादुई या अलौकिक बकरी नहीं है, बल्कि अपने मालिक से बिछड़कर रास्ता भटका हुआ एक साधारण जानवर है, जो भूख-प्यास या सुरक्षा की तलाश में दिन में दो बार गुफा से बाहर आता है।

बकरी को पकड़ने की कोशिश और सोशल मीडिया पर बवाल

इस पूरे मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब रविवार को कुछ उत्साहित युवकों ने इस कौतुहल को शांत करने की कोशिश की। पहाड़ी पर चढ़कर दो-तीन युवक गुफा के पास पहुंचे और उन्होंने बकरी को पकड़ने का प्रयास किया। हालांकि, इंसानों को अपनी ओर आता देख डरी हुई बकरी तेजी से वहां से भाग निकली।

इस घटना का वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो लोगों ने उन युवकों की कड़ी आलोचना शुरू कर दी। माता के भक्तों का कहना है कि युवकों को इस तरह बकरी को परेशान नहीं करना चाहिए था। सोशल मीडिया पर लोग इन युवकों को जमकर कोस रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह सिलसिला पिछले तीन महीने से लगातार चल रहा है और यह बकरी हर दिन नियमित रूप से दो बार लोगों को दिखाई देती है। फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में कौतुहल, गहरी आस्था और अंधविश्वास का एक अनोखा मिश्रण बना हुआ है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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