हिमाचल प्रदेश
2 घंटे पहले
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अस्पताल में भारी हंगामा और प्रदर्शन
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला अस्पताल में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब एक महिला की डिलीवरी के बाद हुई मौत के मामले में परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। बीते सप्ताह हुई **23** वर्षीय मंजू शर्मा की मौत के मामले में नौ दिन बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से आक्रोशित भीड़ ने अस्पताल के मुख्य द्वार को खोलकर परिसर के अंदर प्रवेश कर लिया। अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों ने गेट बंद करने का भरसक प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों की भारी संख्या के सामने उनकी एक न चली। वर्तमान में कुल्लू अस्पताल परिसर के अंदर स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है और प्रदर्शनकारी धरने पर बैठ गए हैं।
नारेबाजी और विरोध का नेतृत्व
प्रदर्शन का नेतृत्व मंडी जिले के बंटी सराजी द्वारा किया जा रहा है, जिन्होंने लोगों से इस विरोध में शामिल होने की अपील की थी। विरोध प्रदर्शन की शुरुआत ढालपुर चौक से हुई, जहाँ लोगों ने स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल का पुतला जलाकर अपना रोष प्रकट किया। इस दौरान भीड़ ने 'मंजू हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं' जैसे नारों से अस्पताल परिसर को गुंजा दिया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि वे किसी भी डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मी के व्यक्तिगत विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रसव के दौरान बरती गई गंभीर लापरवाही के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने वरिष्ठ डॉक्टर के दफ्तर के अंदर ही धरना शुरू कर दिया है और अब वे सीएमओ को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे हैं।
स्टाफ पर लापरवाही के गंभीर आरोप
मृतका मंजू शर्मा, जो मंडी जिले के सराज क्षेत्र के बाली चौकी की रहने वाली थीं, की मौत के बाद उनके परिजनों ने अस्पताल के स्टाफ, विशेषकर स्टाफ नर्सों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतका के भाई दिनेश शर्मा ने बताया कि डिलीवरी के बाद मंजू लगातार अपनी परेशानी के बारे में शिकायत कर रही थी, लेकिन वहां तैनात स्टाफ नर्सों ने उसकी तकलीफ को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। दिनेश शर्मा के अनुसार, नर्सें बार-बार यह कह रही थीं कि मरीज केवल ड्रामा कर रही है और उसे कोई वास्तविक समस्या नहीं है। सुबह से ही मंजू की स्थिति खराब थी, जिसे देखते हुए उसे विशेष देखभाल की आवश्यकता थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उनकी हालत को बेहद हल्के में लिया, जिसका परिणाम दुखद मौत के रूप में सामने आया।
जवाबदेही और न्याय की मांग
परिजनों का आरोप है कि अब तक उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया गया है कि आखिर किन परिस्थितियों में मंजू शर्मा की मृत्यु हुई। एक तरफ जहाँ डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है, वहीं इस तरह की लापरवाही समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक है। परिवार का कहना है कि वे इस मामले में निष्पक्ष जांच चाहते हैं और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएंगे और প্রয়োজনে न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया
इस पूरे मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और इसे लेकर प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। पीड़ित परिवार ने मामले की शिकायत पुलिस और प्रशासन से पहले ही कर दी थी, जिस पर अब महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है। अस्पताल प्रशासन द्वारा दी गई सफाई और बयानों पर भी प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाए हैं, जिसके बाद अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों को माफी तक मांगनी पड़ी है। फिलहाल, मौके पर मौजूद लोग सीएमओ के आने का इंतजार कर रहे हैं और अस्पताल परिसर के भीतर नारेबाजी और प्रदर्शन का दौर जारी है। पूरे हिमाचल प्रदेश में इस दुखद घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और अस्पताल के स्टाफ के व्यवहार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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