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एक घंटा पहले
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जींद में शुरू हुई हाइड्रोजन ट्रेन की सौगात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जींद में शुक्रवार को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का औपचारिक उद्घाटन किया। यह ट्रेन भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नई क्रांति के तौर पर देखी जा रही है। पूर्ण रूप से देश में विकसित हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित यह ट्रेन न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह बिना किसी ओवरहेड इलेक्ट्रिक तार के भी सुचारू रूप से दौड़ने में सक्षम है। इस ट्रेन के परिचालन से जींद और सोनीपत के बीच सफर करने वाले लगभग 2,600 यात्रियों को प्रतिदिन काफी सुविधा मिलेगी।
सफर का किराया और बजट
इस ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसका किफायती किराया है। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन का न्यूनतम किराया मात्र 5 रुपये से शुरू होता है, जबकि यात्रा की दूरी के आधार पर अधिकतम किराया 25 रुपये निर्धारित किया गया है। यह दर आम यात्रियों के लिए इसे यात्रा का एक बेहद सस्ता और सुलभ विकल्प बनाती है। कई रेलवे स्टेशनों पर तो शुरुआती किराया प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत से भी कम है, जो इसे आम जनता की पहुंच के करीब लाता है।
रूट और ठहराव
यह 10 कोच वाली ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच संचालित की जाएगी। यह ट्रेन लगभग 90 किलोमीटर की दूरी को करीब दो घंटे में पूरा करेगी। इस मार्ग पर ट्रेन कुल 11 महत्वपूर्ण स्थानों पर रुकेगी, जिनमें जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा हॉल्ट, भम्भेवा, ईसापुर खेड़ी हॉल्ट, बुटाना हॉल्ट, खंडराई हॉल्ट, राब्रा हॉल्ट, लाठ हॉल्ट, मोहाना हॉल्ट और बड़वासनी हॉल्ट शामिल हैं। इनके अलावा, यह ट्रेन अन्य मध्यवर्ती स्टेशनों और प्रस्तावित ठहरावों पर भी यात्रियों के लिए रुकेगी।
ट्रेन का समय और शेड्यूल
रेलवे द्वारा साझा किए गए टाइम टेबल के अनुसार, ट्रेन संख्या 74010 प्रतिदिन सुबह 7:40 बजे जींद से अपनी यात्रा शुरू करेगी और दो घंटे का सफर तय कर सुबह 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी। वापसी की दिशा में, ट्रेन संख्या 74009 सुबह 10:40 बजे सोनीपत से रवाना होगी और 2 घंटे 20 मिनट का समय लेकर दोपहर 1:00 बजे जींद पहुंचेगी।
कैसे काम करती है हाइड्रोजन तकनीक
यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी के सिद्धांत पर आधारित है, जहां हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि इसमें उप-उत्पाद के रूप में केवल पानी की भाप निकलती है। पारंपरिक डीजल इंजन जो दहन के जरिए मैकेनिकल ऊर्जा पैदा करते हैं, उनकी तुलना में यह ट्रेन पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है। इसमें प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग एक ऑनबोर्ड पावर प्लांट के रूप में किया गया है।
ट्रेन के सिलेंडरों में जमा हाइड्रोजन और बाहरी वातावरण से ली गई ऑक्सीजन फ्यूल सेल में मिलकर बिजली बनाते हैं, जो ट्रैक्शन मोटर्स को ऊर्जा प्रदान करते हैं। यह पूरी प्रक्रिया कार्बन उत्सर्जन को शून्य कर देती है। ट्रेनसेट में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार और आठ ट्रेलर कोच लगे हैं। प्रत्येक ड्राइविंग पावर कार के अंदर हाइड्रोजन फ्यूल सेल, लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरी और हाइड्रोजन स्टोरेज सिलेंडर का संयोजन इसे संचालित करने की शक्ति देता है।
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