राम मंदिर चढ़ावा चोरी से ध्यान भटकाने के लिए जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा उठाया गया: सपा सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी का भाजपा पर पलटवार उत्तर प्रदेश 3 महीने पहले 114
रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी की इमारतों को गिराने के नोटिस पर सपा सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे राम मंदिर में हुए चढ़ावे की चोरी से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश करार दिया है।

जौहर यूनिवर्सिटी पर संकट और सपा का विरोध

उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। रामपुर विकास प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी को एक सख्त नोटिस जारी किया है, जिसमें कैंपस की 38 इमारतों को 15 दिन के भीतर स्वयं गिराने का निर्देश दिया गया है। प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो प्रशासन सख्त कानूनी कार्यवाही करेगा। इस पूरे मामले को लेकर रामपुर के समाजवादी पार्टी सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने शुक्रवार को भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर में हुए चढ़ावे की चोरी की घटना से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर जौहर यूनिवर्सिटी का यह विवादित मुद्दा उछाला जा रहा है।

छात्रों के भविष्य और सुरक्षा का हवाला

सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने यूनिवर्सिटी के बचाव में तर्क दिया है कि यहां बड़ी संख्या में छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह शिक्षण संस्थान किसी विशेष वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां हर धर्म और समुदाय के बच्चे पढ़ाई करने आते हैं। नदवी ने स्पष्ट किया है कि वे और उनकी पार्टी जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे। सपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने राज्य सरकार की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे बदले की भावना से प्रेरित बताया है।

क्या कहता है रामपुर विकास प्राधिकरण का आदेश

रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए नोटिस के पीछे मुख्य तर्क बिल्डिंग प्लान का उल्लंघन है। उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत मामले की सुनवाई और रिकॉर्ड की गहन जांच की गई। प्राधिकरण का दावा है कि ये 38 इमारतें बिना किसी पूर्व स्वीकृत नक्शे के बनाई गई हैं, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, जांच में यह भी पाया गया कि इन इमारतों में फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी की गई है, जिसके चलते आपातकालीन स्थिति में छात्रों और कर्मचारियों की जान को खतरा हो सकता है।

यूनिवर्सिटी के विवादों का लंबा इतिहास

जौहर यूनिवर्सिटी पिछले कुछ समय से लगातार कानूनी पेचीदगियों में उलझी हुई है। इस पर जमीन हड़पने और लीज नियमों को दरकिनार करने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। सरकारी कार्रवाई के चलते परिसर का एक बड़ा हिस्सा प्रशासन द्वारा पहले ही अपने कब्जे में लिया जा चुका है। गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान और उनके परिवार ने यूनिवर्सिटी संचालित करने वाले गवर्निंग ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था। आजम खान इस ट्रस्ट के चांसलर और आजीवन अध्यक्ष के पद पर तैनात थे।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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