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45 मिनट पहले
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खाटू श्याम मंदिर में दर्शन व्यवस्था में बदलाव
राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर का धाम पूरे देश के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। बाबा श्याम को समर्पित इस पावन स्थान पर हर दिन बड़ी संख्या में भक्त अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। हालांकि, इस बार दीपावली के पवित्र त्योहार के दौरान मंदिर में दर्शन करने की योजना बना रहे भक्तों को एक महत्वपूर्ण जानकारी जान लेनी चाहिए। श्री श्याम मंदिर कमेटी ने आधिकारिक रूप से सूचित किया है कि दीपावली के पावन पर्व के उपलक्ष्य में मंदिर के कपाट कुछ समय के लिए आम दर्शनार्थियों के लिए बंद रखे जाएंगे। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे तय की गई समय-सारणी को ध्यान में रखते हुए ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं ताकि किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े।
दीपावली पर कपाट बंद रहने की समय-सीमा
मंदिर के कोषाध्यक्ष रवि सिंह चौहान द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, दीपावली के दिन यानी 8 नवंबर को मंदिर में विशेष सेवा और भव्य श्रृंगार का आयोजन किया जाना है। इन अनुष्ठानों की शुद्धता और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दर्शन के समय में परिवर्तन किया गया है। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट 7 नवंबर की रात 10 बजे से लेकर 8 नवंबर की शाम 5 बजे तक बंद रहेंगे। कमेटी ने स्पष्ट किया है कि दर्शन की व्यवस्था 8 नवंबर को शाम 5 बजे के बाद ही दोबारा आम भक्तों के लिए बहाल की जाएगी। भक्तों से अनुरोध किया गया है कि वे मंदिर प्रबंधन द्वारा निर्धारित इस समयावधि के बाद ही बाबा के दर्शन के लिए आएं और मंदिर परिसर में अनुशासन बनाए रखने में सहयोग करें।
विशेष श्रृंगार और दीपावली की रौनक
दीपावली के पर्व पर खाटू श्याम जी के धाम को अद्भुत तरीके से सजाया जाता है। कमेटी के अनुसार, इस पांच दिवसीय उत्सव के दौरान पूरे मंदिर परिसर में रोशनी, रंग-बिरंगे फूलों और हजारों दीयों से अलौकिक दृश्य उत्पन्न किया जाता है। भगवान खाटू श्याम का विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत पूजा और आरती संपन्न होती है। साफ-सफाई और विशेष सेवा कार्यों के कारण मंदिर के कपाटों को तय समय के लिए बंद करना आवश्यक होता है, ताकि पूजा-अर्चना बिना किसी व्यवधान के पूरी की जा सके।
कौन हैं खाटू श्याम बाबा?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, खाटू श्याम बाबा को महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक के रूप में जाना जाता है। वे महान योद्धा भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। भगवान शिव से प्राप्त तीन दिव्य बाणों के कारण उन्हें 'तीन बाणधारी' भी कहा जाता है। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के दौरान बर्बरीक ने हारने वाले पक्ष का साथ देने का प्रण लिया था। भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी वीरता और त्याग की परीक्षा लेते हुए उनसे शीश का दान मांगा, जिसे बर्बरीक ने प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया। बर्बरीक के इस बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में 'श्याम' के नाम से पूजे जाने का वरदान दिया। तभी से उन्हें 'हारे का सहारा' और 'शीश के दानी' के रूप में पूजा जाता है।
मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़
खाटू श्याम जी के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ वर्षभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। विशेषकर फाल्गुन महीने में आयोजित होने वाले 10 दिवसीय मेले के दौरान रींगस से खाटू तक का पूरा मार्ग 'जय श्री श्याम' के उद्घोष से गूंज उठता है। फरवरी माह में आयोजित इस मेले में लाखों की संख्या में भक्त पैदल यात्रा करते हुए बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाते हैं।
गोवर्धन पूजा और मंदिर की दिनचर्या
दीपावली के बाद आने वाले गोवर्धन पूजा के पर्व पर भी मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। इस बार 10 नवंबर को गोवर्धन पूजन मनाया जाएगा, जिसमें अन्नकूट के भोग का विशेष महत्व होता है। मंदिर में दैनिक दिनचर्या के अनुसार मंगला आरती, श्रृंगार आरती, भोग आरती, संध्या आरती और शयन आरती का क्रम निरंतर चलता रहता है। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार इन आरतियों में शामिल होकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। प्रशासन ने पुनः भक्तों से आग्रह किया है कि दिवाली के दौरान आने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा नियमों का पालन करें।
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