महेश्वर के जगन्नाथ धाम में गूंजे जयकारे, पुरी की परंपरा के अनुसार 15 दिनों के लिए बंद हुए मंदिर के कपाट मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 71
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले स्थित महेश्वर में ज्येष्ठ पूर्णिमा के मौके पर भगवान जगन्नाथ का भव्य स्नान उत्सव मनाया गया। अब धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान 15 दिन तक विश्राम करेंगे, जिसके बाद रथयात्रा निकाली जाएगी।

नर्मदा के तट पर जगन्नाथ उत्सव की धूम

ओडिशा के पुरी स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर में भी भगवान जगन्नाथ का जन्मोत्सव पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर नर्मदा नदी के तट पर स्थित पेशवा घाट के जगन्नाथ धाम मंदिर में भगवान का विशेष जलाभिषेक किया गया। इस धार्मिक आयोजन को देखने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े, जिससे पूरा मंदिर परिसर 'जय जगन्नाथ' के नारों से गुंजायमान हो गया।

108 कलशों से हुआ अभिषेक

स्नान पूर्णिमा के इस विशेष दिन पर अनुष्ठानों की शुरुआत सुबह नर्मदा में स्नान के साथ हुई। महंत जगत गिरी गुरु मां और महंत हृदय गिरी महाराज के साथ अन्य भक्तों ने पवित्र नर्मदा नदी में डुबकी लगाई। इसके बाद, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 108 कलशों में नर्मदा का शुद्ध जल भरकर श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। पंडित पंकज मेहता के मार्गदर्शन में मंत्रों का उच्चारण हुआ और भक्तों ने स्वयं अपने हाथों से भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का पवित्र जल से अभिषेक किया। इस प्रक्रिया को 'स्नान यात्रा' के नाम से जाना जाता है। साल में केवल एक बार होने वाले इस सार्वजनिक जलाभिषेक को देखने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।

गजानन वेश में भगवान के दर्शन

अभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ का विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान उन्हें 'गजानन वेश' में सजाया गया, जो हाथी के स्वरूप का प्रतीक है। भगवान के इस दुर्लभ और मनमोहक रूप के दर्शन करने के लिए मंदिर परिसर में भारी भीड़ देखी गई। श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा और मंदिर की भव्य सजावट ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया था।

अब 15 दिन बंद रहेंगे मंदिर के पट

स्नान पूर्णिमा के बाद की परंपरा के अनुसार, अब मंदिर के कपाट 15 दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं। धार्मिक मान्यताओं का मानना है कि ठंडे जल से स्नान करने के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं। इस अवधि में उन्हें एकांत में रखा जाता है। इस दौरान भगवान को केवल फलों, जड़ी-बूटियों और विभिन्न औषधियों का भोग लगाया जाता है। जब भगवान पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे, तभी श्रद्धालुओं को पुनः उनके दर्शन करने का अवसर मिलेगा। महंत हृदय गिरी महाराज के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा पर यह प्राकट्योत्सव मनाया जाता है और पवित्र नदी में स्नान करने से भक्तों को विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

निमाड़ की सबसे बड़ी रथयात्रा की तैयारी

महेश्वर में पिछले करीब 15 वर्षों से जगन्नाथ पुरी की परंपराओं का अक्षरशः पालन किया जा रहा है। शयन आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी की गई। अब 15 जुलाई को जब भगवान स्वस्थ होकर पुनः दर्शन देंगे, उसके अगले दिन यानी 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। इसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। यह रथयात्रा केवल खरगोन ही नहीं, बल्कि पूरे निमाड़ क्षेत्र की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण जगन्नाथ रथयात्रा मानी जाती है, जिसमें मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेने आते हैं।

लॉटरी से होगा रथ खींचने वाले भक्तों का चयन

महेश्वर मंदिर में जगन्नाथ पुरी की धार्मिक रीतियों को निभाने के लिए एक विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस बार भी मंदिर में एक खास पेटी रखी गई है, जिसमें श्रद्धालु अपना नाम और मोबाइल नंबर लिखकर पर्चियां डाल रहे हैं। रथयात्रा के दिन इस पेटी को खोला जाएगा और लॉटरी के जरिए 32 भाग्यशाली श्रद्धालुओं का चयन किया जाएगा। इन 32 भक्तों में से 16 भक्त गर्भगृह से भगवान की प्रतिमा को उठाकर रथ पर विराजित करेंगे, जबकि नगर भ्रमण के बाद शेष 16 श्रद्धालु भगवान को रथ से वापस उतारकर गर्भगृह में स्थापित करने की जिम्मेदारी निभाएंगे। यह परंपरा हर साल उत्साह के साथ पूरी की जाती है और भक्त इसे अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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