कर्नाटक की राजनीति में बड़ा भूचाल: मंत्री बी. नागेंद्र ने दिया इस्तीफा, सामने आए बड़े आरोप भारत एक घंटा पहले 3
महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले से जुड़े विवादों के बीच कर्नाटक सरकार के मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

कर्नाटक सरकार के लिए बड़ी चुनौती

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को एक बड़ा झटका लगा है। राज्य के योजना और सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने आज, यानी शुक्रवार को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। यह कदम महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित घोटाले के आरोपों के चलते बढ़ रहे राजनीतिक दबाव के कारण उठाया गया है। अपने इस्तीफे की घोषणा करते समय एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान बी. नागेंद्र काफी भावुक दिखाई दिए।

सीबीआई और ईडी पर क्या बोले बी. नागेंद्र?

बी. नागेंद्र, जिन्हें इसी महीने की शुरुआत में पुनः कर्नाटक मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया था, ने दावा किया कि उनके खिलाफ एक गहरी साजिश रची गई है। उन्होंने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि विपक्षी दल केंद्रीय जांच एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल करके उन्हें डराने की कोशिश कर रहे हैं। नागेंद्र ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें ईडी और सीबीआई के जरिए धमकाया नहीं जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनुवादी विचारधारा के लोग उन्हें इसलिए निशाना बना रहे हैं क्योंकि वे एक आदिवासी व्यक्ति की सफलता को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।

विवादों से पुराना नाता

यह ध्यान देने योग्य है कि महर्षि वाल्मीकि निगम के फंड को बिना उचित मंजूरी के दूसरी जगह डायवर्ट करने के आरोपों के कारण ही बी. नागेंद्र ने जून 2024 में भी सिद्धारमैया मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। इसके बाद 3 अगस्त को उन्हें दोबारा कैबिनेट में शामिल करते हुए योजना और सांख्यिकी विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी। गौरतलब है कि जुलाई 2024 में उन्हें प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी द्वारा गिरफ्तार भी किया गया था।

उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का रुख

इस्तीफे की चर्चाओं के बीच कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने हाल ही में स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया था। बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि बी. नागेंद्र ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर पहले भी इस्तीफा दिया था। उन्होंने इन घटनाओं को पूरी तरह से विपक्ष की सोची-समझी चाल बताया था। शिवकुमार ने उस समय जोर देकर कहा था कि नागेंद्र के इस्तीफे को लेकर फिलहाल कोई ऐसी बात नहीं है, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।

विपक्ष का कड़ा विरोध

जब बी. नागेंद्र की कैबिनेट में वापसी हुई थी, तब राज्य विधानसभा में भारी हंगामा देखने को मिला था। विपक्ष ने इस फैसले का पुरजोर विरोध किया था। इसका मुख्य कारण महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से करीब 90 करोड़ रुपये की कथित चोरी का मामला है। इस मामले में मनी-लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं, जिसका जिक्र सीबीआई जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा दाखिल चार्जशीट में भी किया गया है।

आर. अशोक ने खोला था मोर्चा

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया था। सोमवार को उन्होंने विधानसभा के भीतर अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा करते हुए कांग्रेस सरकार पर सीधे तौर पर बी. नागेंद्र को संरक्षण देने का आरोप लगाया था। अब जब नागेंद्र ने पद छोड़ दिया है, तो राज्य की राजनीति में आगे क्या मोड़ आता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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