वेटनरी ऑफिसर भर्ती में कथित धांधली पर कर्नाटक हाईकोर्ट सख्त, कहा- यह तो दिनदहाड़े खुली धोखाधड़ी है भारत 2 घंटे पहले 2
कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित वेटनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने सरकार से मामले की आंतरिक जांच की स्थिति रिपोर्ट तलब की है।

भर्ती में धांधली पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन यानी KPSC द्वारा संचालित वेटनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में हुई कथित अनियमिताओं का मामला अब अदालत की दहलीज पर है। इस मामले में दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट की बेंच ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान साफ शब्दों में कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सीधे तौर पर दिनदहाड़े की गई धोखाधड़ी है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे अब तक हुई आंतरिक जांच की अद्यतन स्थिति को कोर्ट के रिकॉर्ड पर पेश करें। इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है।

पेपर लीक होने के गंभीर आरोप

यह कानूनी लड़ाई KPSC के कुछ उम्मीदवारों और आयोग के एक पूर्व सदस्य द्वारा शुरू की गई है। 2023-24 की इस भर्ती प्रक्रिया में कुल 300 से अधिक वेटनरी ऑफिसर के पदों को भरने का लक्ष्य रखा गया था। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि पूरी चयन प्रक्रिया में भारी धांधली बरती गई है। आरोप है कि परीक्षा आयोजित होने से 48 घंटे पहले ही प्रश्न पत्र और उसके उत्तर यानी आंसर-की WhatsApp ग्रुप्स के माध्यम से लीक कर दिए गए थे, जिससे पूरी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

सिलेक्शन के नाम पर 80 लाख रुपये की डिमांड

याचिका में कई सनसनीखेज खुलासे किए गए हैं। उम्मीदवारों ने एक वायरल वीडियो और ऑडियो क्लिप का हवाला देते हुए बताया कि इसमें कुछ अनजान लोग अभ्यर्थियों से पक्का सिलेक्शन सुनिश्चित कराने के बदले 80 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि मांग रहे हैं। इसके अलावा बेंगलुरु, मैसूर और कलबुर्गी जैसे शहरों के विशिष्ट परीक्षा केंद्रों पर सामूहिक नकल, प्रतिरूपण यानी किसी और के स्थान पर परीक्षा देने और मूल्यांकन प्रक्रिया में हेरफेर करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।

इंटरव्यू में मार्क्स को लेकर उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं का यह भी तर्क है कि लिखित परीक्षा में बेहद खराब प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों को इंटरव्यू और वाइवा सत्र में असाधारण रूप से बहुत अधिक अंक दिए गए हैं। इन्हीं अनियमितताओं को आधार बनाते हुए याचिका में पूरी भर्ती प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने और इसकी जांच CBI से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि राज्य की SIT के पास इस मामले में शामिल प्रभावशाली लोगों की जांच करने के लिए न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही पर्याप्त स्वतंत्रता। इससे पूर्व कर्नाटक हाईकोर्ट नीट पीजी क्वालीफाइंग परसेंटाइल को शून्य करने के निर्णय पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चुका है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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