मोदी सरकार की किस योजना ने बदल दी रेहड़ी-पटरी वाले की किस्मत? पढ़ें सफलता की कहानी हरियाणा एक दिन पहले 4
करनाल के पिज्जा स्टॉल संचालक मंदीप तनेजा ने पीएम स्वनिधि योजना को 'डूबते को तिनके का सहारा' बताया, जिसके तहत मिले ऋण से उन्होंने अपने रुके हुए कारोबार को नई ऊंचाई दी।

कोरोना काल में पटरी और रेहड़ी पर रोजी-रोटी कमाने वालों के लिए केंद्र सरकार की पीएम स्वनिधि योजना एक बड़ा सहारा बनकर उभरी है। जून 2020 में शुरू हुई इस पहल ने किफायती ऋण और सामाजिक सुरक्षा तक पहुंच के जरिए छोटे विक्रेताओं को सशक्त बनाने के छह साल पूरे कर लिए हैं। हरियाणा के करनाल निवासी लाभार्थी मंदीप तनेजा ने इस योजना को अपने जीवन में 'डूबते को तिनके का सहारा' जैसा बताया है।

छोटे से पिज्जा स्टॉल पर टिकी थी परिवार की आजीविका

करनाल शहर के नेहरू प्लेस मार्केट में पिज्जा स्टॉल चलाने वाले मंदीप तनेजा का हर दिन ताजा सामग्री तैयार करने और ग्राहकों को सस्ती कीमत पर पिज्जा परोसने से शुरू होता है। यही छोटा कारोबार उनके पूरे परिवार की आजीविका का मुख्य जरिया है। हालांकि सीमित आमदनी और अनिश्चित बिक्री के चलते इस व्यवसाय को आगे बढ़ाना उनके लिए आसान नहीं था। घर के खर्च और दुकान दोनों को एक साथ संभालना उनके सामने लगातार चुनौती बना रहता था।

अखबार के विज्ञापन से मिली उम्मीद की किरण

ऐसे मुश्किल दौर में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना उनके लिए आशा की किरण बनकर आई। अखबार में योजना का विज्ञापन देखने के बाद उन्हें जानकारी मिली कि रेहड़ी-पटरी वालों को बिना किसी गारंटी के 10,000 रुपए तक का ऋण दिया जाता है। उन्होंने बिना देर किए आवेदन किया और योजना के तहत अपना पहला ऋण हासिल किया।

तीन चरणों में मिला ऋण, बढ़ता गया कारोबार

पहली ऋण राशि से मंदीप ने अपने पिज्जा स्टॉल के लिए नए उपकरण खरीदे, जिससे खाद्य सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया सरल हुई और ग्राहकों को बेहतर सेवा मिलने लगी। धीरे-धीरे कारोबार में सुधार आया और ग्राहकों की संख्या भी बढ़ने लगी। समय पर किस्त चुकाने के बाद उन्हें दूसरी किश्त का लाभ मिला, जिससे न सिर्फ व्यवसाय संभला बल्कि परिवार की जरूरतें पूरी करने में भी मदद मिली और घर को आर्थिक मजबूती मिली।

लगातार बेहतर होते कारोबार के चलते मंदीप तीसरी ऋण किश्त के लिए पात्र बने। इस राशि का इस्तेमाल उन्होंने अपने पिज्जा स्टॉल की साज-सज्जा और बाहरी रूप को आकर्षक बनाने में किया। सुंदर दिखने वाले स्टॉल ने ग्राहकों को अपनी ओर खींचा और बिक्री में और बढ़ोतरी हुई।

'अगर योजना न होती तो दोबारा शुरू नहीं हो पाता रोजगार'

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में मंदीप तनेजा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा कोविड काल में शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना के तहत उन्होंने ऋण लिया था और इसका लाभ नगर निगम की स्कीम के जरिए मिला। उन्होंने बताया कि पहले 10 हजार रुपए, उसके बाद 20 हजार और आखिर में 50 हजार रुपए का ऋण मिला।

हम लोग रोज कमाने और रोज खाने वाले लोगों में से हैं। लोन की पहली किस्त 10 हजार रुपए से रुके हुए काम को दोबारा शुरू किया। फिर 20 हजार रुपए का लोन लेकर अपने रोजगार को और ऊपर उठाया। पैसे की कमी के कारण आधुनिक मशीनें नहीं खरीद पा रहा था, लेकिन लोन लेने के बाद काम आसान हो गया।

उन्होंने कहा कि अगर इस योजना का लाभ नहीं मिला होता तो उनका रोजगार दोबारा शुरू नहीं हो पाता। उनके मुताबिक इस योजना ने ऋण के साथ-साथ जीने का सहारा भी दिया है और एक गरीब परिवार को आत्मनिर्भर बनाया है।

योजना नहीं, नया अवसर साबित हुई पीएम स्वनिधि

मंदीप तनेजा का कहना है कि पीएम स्वनिधि योजना उनके लिए केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि एक नया अवसर बनकर आई। इस योजना ने उन्हें अपने व्यवसाय को मजबूत करने, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और भविष्य के प्रति नया आत्मविश्वास दिया है। आज वे अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए पहले से कहीं अधिक उत्साहित और आशावान हैं। केंद्र में मोदी सरकार के 12 साल के कार्यक्रम की सराहना करते हुए तनेजा ने प्रधानमंत्री के दीर्घायु होने की कामना भी की।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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