उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ऐसा शख्स पकड़ा गया है, जिसकी करतूतें सुनकर खुद पुलिस भी हैरान रह गई। कागजों पर 13 कंपनियों और 323 करोड़ रुपये का स्वामी रहा यह व्यक्ति फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे है। कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन टीम (SOT) ने एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश करते हुए महाठग संजीव दीक्षित को गिरफ्तार किया है।
कैसे चलता था पूरा खेल
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी ने 13 फर्जी कंपनियां खड़ी कीं और महज 10 महीने के भीतर 323 करोड़ रुपये का लेनदेन कर डाला। इसके बाद अचानक इन कंपनियों को बंद कर दिया जाता था। ऐसा करने के पीछे मकसद यह था कि लेनदेन पूरा होते ही कंपनियां समेट दी जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की जांच-पड़ताल से बचा जा सके।
पुलिस के अनुसार, आरोपी बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनियां बनाता था और उन्हीं के नाम पर करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन कराया जाता था। इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, जबकि कई अन्य लोगों की भूमिका की जांच अब भी जारी है।
झांसा देकर जुटाता था दस्तावेज
कमिश्नरेट कानपुर नगर में अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत चकेरी पुलिस ने राजीव नगर, ज्वाला मार्केट निवासी शातिर आरोपी संजीव दीक्षित उर्फ संजीव कुमार को दबोचा है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों को मुद्रा लोन, बेरोजगारी भत्ता और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच देता था। इसी बहाने वह उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और दूसरे जरूरी दस्तावेज हासिल कर लेता और फिर उन्हीं के आधार पर फर्जी फर्म और जीएसटी पंजीकरण करा लेता था।
पहले भी जा चुका है जेल
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संजीव दीक्षित वर्ष 2024 में राजस्व चोरी के एक मामले में पहले भी जेल जा चुका है। करीब छह महीने जेल में बिताने के बाद उसने दोबारा अवैध कारोबार शुरू कर दिया। इस बार उसने स्क्रैप, चमड़ा और दूसरे कारोबारों के नाम पर 13 बोगस कंपनियां बनाईं और इनके माध्यम से करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन किया।
12 बैंकों की 30 से ज्यादा शाखाओं में खाते
जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि आरोपी के 12 बैंकों की 30 से अधिक शाखाओं में खाते मौजूद हैं। पुलिस को आशंका है कि इन खातों का इस्तेमाल फर्जी बिलिंग, टैक्स चोरी और हवाला जैसे अवैध वित्तीय लेनदेन के लिए किया गया। दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की पड़ताल में 323 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन की पुष्टि हो चुकी है।
पप्पू छूरी के नेटवर्क से जुड़े तार
पुलिस जांच में यह भी उजागर हुआ है कि संजीव दीक्षित का संबंध 3200 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके महफूज आलम उर्फ पप्पू छूरी के नेटवर्क से था।
तीन महीने में 5 करोड़ का लेनदेन
अधिकारियों के अनुसार, दोनों के बीच महज तीन महीने के भीतर करीब पांच करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। इसी कड़ी का पीछा करते हुए पुलिस आरोपी तक पहुंची। कानपुर पुलिस अब तक इस बड़े अवैध लेनदेन नेटवर्क से जुड़े 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
जांच का दायरा और बढ़ा
संजीव दीक्षित की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और व्यापक कर दिया गया है। पुलिस के रडार पर अब उससे जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेट्री, जीएसटी वकील, जीएसटी विभाग के कुछ कर्मचारी और बैंककर्मी भी हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है और जल्द ही इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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