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एक घंटा पहले
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सफलता की एक नई कहानी
जब हौसले बुलंद हों और लक्ष्य को पाने का जुनून हो, तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है। इस बात को बिहार के मुंगेर जिले की रहने वाली और पश्चिम बंगाल में पली-बढ़ी उर्मी सिन्हा ने सच कर दिखाया है। देश की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की सिविल सेवा परीक्षा में उर्मी ने पहली ही कोशिश में सफलता का परचम लहराया है। महज 21 साल की उम्र में आईपीएस अधिकारी बनकर उन्होंने पूरे देश में सुर्खियां बटोर ली हैं। उन्हें वर्तमान में देश की सबसे युवा आईपीएस अफसर के रूप में देखा जा रहा है। बीते 17 अक्टूबर 2026 को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी यानी SVPNPA में आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड के दौरान उन्होंने अपनी ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी की। 135 आईपीएस अधिकारियों के उस बैच में उर्मी सबसे कम उम्र की अधिकारी बनकर उभरी हैं।
बिहार से बंगाल तक का सफर
आईपीएस उर्मी सिन्हा की पारिवारिक जड़ें बिहार के मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर स्थित मारवाड़ी टोला में गहराई तक जमी हुई हैं। हालांकि, उनका परिवार बाद में पश्चिम बंगाल के हावड़ा में जाकर बस गया था। उनके पिता, डॉ. रंजीत सिन्हा, हावड़ा के एक नामी बाल रोग विशेषज्ञ हैं और उनकी माता एक कुशल गृहिणी हैं। उर्मी की प्रारंभिक शिक्षा हावड़ा के विद्यालयों में ही संपन्न हुई। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध सेंट जेवियर्स कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन पूरा होते ही उर्मी ने ठान लिया था कि उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाना है और उन्होंने यूपीएससी सीएसई की तैयारी शुरू कर दी।
बिना कोचिंग के सफलता का मंत्र
अक्सर देखा जाता है कि यूपीएससी की तैयारी के लिए उम्मीदवार दिल्ली या अन्य बड़े शहरों का रुख करते हैं, लेकिन उर्मी सिन्हा ने घर पर रहकर ही एक मिसाल कायम की है। उन्होंने साबित किया कि अगर सही रणनीति हो, तो सफलता घर बैठे भी मिल सकती है। ग्रेजुएशन के साल 2023 के बाद से ही उन्होंने घर पर रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखी। ऑनलाइन उपलब्ध स्टडी मटीरियल, विशेषज्ञों के उचित मार्गदर्शन और अपनी स्वयं की बनाई हुई अध्ययन योजना के जरिए उन्होंने प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू जैसे तीनों कठिन चरणों को पहली ही बार में पार कर लिया। UPSC CSE 2024 में 170वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि निरंतरता ही सफलता की कुंजी है।
अकादमी से फील्ड तक की यात्रा
17 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद के SVPNPA में 78वें नियमित बैच की पासिंग आउट परेड आयोजित की गई थी। इस बैच में कुल 135 भारतीय आईपीएस अधिकारी शामिल थे, जिनमें 37 महिला अधिकारी भी थीं। इसके अतिरिक्त, नेपाल, भूटान और मालदीव के 16 विदेशी अधिकारियों ने भी वहां प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस विशिष्ट समूह में 23 वर्ष की आयु के आसपास की उर्मी सिन्हा सबसे युवा अधिकारी रही हैं। अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, अब उर्मी सिन्हा को आंध्र प्रदेश कैडर आवंटित किया गया है। वहां वह बतौर ट्रेनी आईपीएस अधिकारी अपनी फील्ड ट्रेनिंग की शुरुआत करेंगी, जिसमें वे पुलिस प्रशासन, कानून व्यवस्था और जमीनी स्तर पर पुलिसिंग की बारिकियों को समझेंगी और लागू करेंगी।
युवा अधिकारियों के लिए प्रेरणा
आईपीएस उर्मी सिन्हा का नाम अब उन चुनिंदा भारतीय अधिकारियों की फेहरिस्त में शामिल हो गया है जिन्होंने कम उम्र में ही देश की सेवा का जिम्मा उठा लिया है। इससे पहले गुजरात कैडर के सफीन हसन भी 22 साल की उम्र में देश के सबसे युवा आईपीएस अधिकारी बनने के कारण चर्चा में रहे थे। इसके अलावा सचिन अतुलकर, मेरिन जोसेफ और अजय प्रताप सिंह जैसे अधिकारी भी कम उम्र में आईपीएस बनने के लिए जाने जाते हैं। उर्मी सिन्हा की यह उपलब्धि उन लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद प्रशासनिक सेवाओं में जाने का सपना देखते हैं।
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