छोटे शहर से बड़ा सपना: संगीत की साधना से राज्य स्तर पर पहचान बना रहे जहानाबाद के श्रीकांत बिहार एक घंटा पहले 3
बिहार के जहानाबाद जिले के रहने वाले युवा गायक श्रीकांत ने अपनी कड़ी मेहनत और संगीत साधना के बल पर राज्य स्तरीय मंचों तक का सफर तय किया है, उनका सपना अब राष्ट्रीय पहचान बनाना है।

बिहार का जहानाबाद जिला अब सिर्फ अपनी ऐतिहासिक और शैक्षणिक पहचान तक सीमित नहीं रह गया है। यहाँ की मिट्टी से ऐसे हुनरमंद युवा निकल रहे हैं जो कला, खेल और संगीत के क्षेत्र में जिला ही नहीं बल्कि पूरे राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। इसी कड़ी में एक उभरता हुआ नाम है श्रीकांत का। श्रीकांत ने संगीत को अपनी साधना बनाकर न केवल जहानाबाद का गौरव बढ़ाया है बल्कि वह आज के युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बनकर उभरे हैं। हाल ही में मधुबनी में आयोजित हुई राज्यस्तरीय गायिकी प्रतियोगिता में श्रीकांत को जहानाबाद का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त हुआ। इस मंच पर अपनी सुरीली आवाज और गायिकी के अनूठे अंदाज से उन्होंने श्रोताओं का दिल जीत लिया और खूब वाहवाही बटोरी। उनका यह सफर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प और अपने काम के प्रति अटूट समर्पण हो, तो छोटे शहरों से निकलकर भी बड़े से बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

बचपन के शौक को बनाया करियर, एल्बम से की थी शुरुआत

जहानाबाद जिला मुख्यालय के रहने वाले श्रीकांत की शुरुआती जिंदगी आम बच्चों जैसी ही रही। उन्होंने अपनी स्नातक यानी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है। लेकिन पढ़ाई-लिखाई के समांतर ही उनका एक और संसार चल रहा था, जो सुरों और तानों से सजा था। श्रीकांत को बचपन से ही संगीत से गहरा लगाव था। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई, सुरों के प्रति उनका यह झुकाव और गहरा होता चला गया। अंततः उन्होंने फैसला किया कि वे अपने इसी शौक को अपना पेशा और जीवन का मुख्य ध्येय बनाएंगे।

अपने इस सफर की शुरुआत श्रीकांत ने संगीत एल्बम के जरिए की थी। शुरुआती दौर में उन्होंने कुछ एल्बम में काम किया, मगर उन्हें जल्द ही अहसास हो गया कि केवल व्यावसायिक एल्बमों तक सीमित रहकर संगीत की गहराई को नहीं छुआ जा सकता। यह सफर बहुत लंबा नहीं चला और उन्होंने अपनी राह बदलने का फैसला किया। श्रीकांत ने इसके बाद पारंपरिक संगीत की ओर अपने कदम बढ़ाए, जो उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। शास्त्रीय और पारंपरिक संगीत की बारीकियों को समझने के लिए उन्होंने एक योग्य गुरु की शरण ली। गुरु के सानिध्य में रहकर उन्होंने गायन की बारीकियों को बारीकी से समझा और साथ ही हारमोनियम बजाने का भी कड़ा अभ्यास शुरू किया। उनकी इस मेहनत का असर जल्द ही दिखाई देने लगा और उन्हें स्थानीय स्तर पर पहचान मिलने लगी।

सुरों को सजाने के साथ खुद शब्द भी बुनते हैं श्रीकांत

श्रीकांत की प्रतिभा केवल बेहतरीन गायिकी या हारमोनियम बजाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे एक बेहतरीन गीतकार भी हैं। संगीत के अलग-अलग आयामों पर वे लगातार काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि एक संपूर्ण संगीतकार वही है जो धुनों के साथ-साथ शब्दों के मर्म को भी समझे। इसी सोच के साथ उन्होंने बिहार की माटी और यहाँ की अनूठी संस्कृति को समेटते हुए एक विशेष गीत भी तैयार किया है। इस गीत को श्रोताओं की ओर से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और लोग इसे काफी पसंद कर रहे हैं।

अपने इस प्रयास के बारे में श्रीकांत का कहना है कि हमारी मिट्टी और लोक संस्कृति से जुड़े गीत सीधे लोगों के दिलों को छूते हैं। लोक संगीत में वह ताकत होती है जो लोगों को अपनी जड़ों से जोड़कर रखती है। यही वजह है कि वे अपने संगीत के माध्यम से बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक संगीत को जन-जन तक पहुंचाना चाहते हैं।

गुरु का मार्गदर्शन और निरंतर रियाज है उनकी ताकत

श्रीकांत के अनुसार, उनके इस सुरीले सफर में उनके गुरु की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। शुरुआती दिनों में संगीत उनके लिए केवल एक मनोरंजन या शौक का जरिया था, लेकिन गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लेना शुरू किया। उन्होंने नियमित रियाज को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया।

लोकल18 से बातचीत के दौरान श्रीकांत ने बताया कि बचपन के शौक को एक पेशेवर रूप देने में उनके गुरु का आशीर्वाद और निरंतर की गई मेहनत ही सबसे बड़ा सहारा बनी है। उन्होंने कहा कि पहले वे केवल जहानाबाद जिले के स्थानीय आयोजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति दिया करते थे, लेकिन अब धीरे-धीरे उन्हें राज्य स्तर के बड़े मंचों पर भी अपनी कला का प्रदर्शन करने का शानदार अवसर मिल रहा है। वे गायिकी, गीत लेखन और हारमोनियम वादन के तीनों मोर्चों पर हर रोज खुद को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रयागराज से ले रहे हैं संगीत की औपचारिक शिक्षा, राष्ट्रीय मंचों पर छाने की तैयारी

श्रीकांत केवल मंचों पर प्रस्तुति देने और वाहवाही बटोरने तक ही सीमित नहीं रहना चाहते। वे संगीत के अकादमिक और सैद्धांतिक पहलुओं को भी पूरी गहराई से समझना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से वे उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित एक प्रतिष्ठित कॉलेज से संगीत की विधिवत और औपचारिक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि संगीत को संपूर्णता में समझने के लिए कड़े अभ्यास के साथ-साथ सही शिक्षा और सैद्धांतिक ज्ञान का होना भी उतना ही आवश्यक है।

श्रीकांत की आंखें अब एक बड़े सपने की ओर देख रही हैं। उनका अंतिम लक्ष्य केवल राज्य स्तर तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाना चाहते हैं। अपने इस ऊंचे लक्ष्य को हासिल करने के लिए वे दिन-रात एक कर रहे हैं। उनका कहना है कि संगीत के क्षेत्र में खुद को स्थापित करने और निरंतर सुधार के लिए वे हर रोज कुछ नया सीखने की कोशिश करते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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