बैंगन की खेती से चमकी किसानों की किस्मत, 60 दिनों में तैयार होकर दे रही बंपर मुनाफा बिहार एक घंटा पहले 2
पटना के मसौढ़ी में कम बारिश के चलते धान की जगह किसानों ने राजगांव किस्म के बैंगन की खेती को अपनाया है। मात्र 60 से 65 दिन में तैयार होने वाली इस फसल से किसानों को लाखों की कमाई होने की उम्मीद है।

मौसम की मार के बीच वैकल्पिक खेती की राह

खरीफ सीजन के दौरान आमतौर पर धान की खेती ही मुख्य फसल मानी जाती है, लेकिन इस बार कम बारिश ने किसानों की योजनाओं पर पानी फेर दिया है। जहानाबाद और पटना के आसपास के क्षेत्रों में कई किसानों ने धान की रोपाई में कमी की है ताकि वे बड़े नुकसान से बच सकें। इस कठिन समय में पटना जिले के मसौढ़ी प्रखंड के अंतर्गत आने वाली तिनेरी पंचायत के किसानों ने एक नई पहल की है। उन्होंने परंपरागत खेती से हटकर 6 बीघा भूमि पर बैंगन की खेती शुरू की है। यह फसल अब तैयार होने की कगार पर है और अगस्त महीने से इसकी तुड़ाई का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

राजगांव बैंगन की खासियत

तिनेरी पंचायत का यह क्षेत्र लंबे समय से उन्नत सब्जी उत्पादन के लिए पहचाना जाता है। पहले यहां बड़े पैमाने पर फूलगोभी और पत्ता गोभी की पैदावार होती थी, लेकिन इस बार किसानों ने प्रयोग के तौर पर राजगांव किस्म के बैंगन को प्राथमिकता दी है। किसान वासु पासवान के अनुसार, यह वीएनआर राजगांव प्रजाति का बैंगन है जो दिखने में हरा और हल्का बैंगनी रंग का होता है। इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह रोपाई के महज 60 से 65 दिनों के भीतर फल देने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है।

बंपर पैदावार और बाजार में मांग

इस बैंगन की मांग बाजार में साल भर बनी रहती है क्योंकि इसका स्वाद और बनावट भरता बनाने के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। प्रत्येक बैंगन का औसत वजन 200 से 250 ग्राम तक होता है, जो इसे बाजार में अलग पहचान दिलाता है। वर्तमान में बाजार में इस फसल का भाव 30 से 35 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है। किसानों का कहना है कि जब फसल का सीजन अपने चरम पर होता है, तब प्रतिदिन लगभग दो पिकअप भरकर बैंगन सीधे मंडियों में भेजे जाते हैं। इस खेती के माध्यम से करीब 10 परिवार अपनी आजीविका चला रहे हैं और आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।

कम लागत और अधिक मुनाफा

खेती को किफायती बनाने के लिए किसानों ने तकनीकी रूप से सतर्कता बरती है। इस किस्म की खेती में बीज की खपत भी काफी कम है। जानकारी के अनुसार, मात्र एक एकड़ खेत की बुवाई के लिए 60 से 80 ग्राम बीजों की आवश्यकता पड़ती है। कम लागत और अधिक बाजार मांग के कारण यह फसल किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। किसान वासु पासवान बताते हैं कि सिंचाई से लेकर दवाइयों के छिड़काव तक, वे हर प्रक्रिया को वैज्ञानिक तरीकों से पूरा कर रहे हैं ताकि फसल रोगों से सुरक्षित रहे।

आर्थिक नुकसान की भरपाई की उम्मीद

इस साल की कम बारिश ने किसानों को काफी प्रभावित किया है। वासु पासवान के मुताबिक, फूलगोभी की फसल में उन्हें बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है, जिसके कारण इस बार उन्होंने केवल 4 से 5 कट्ठा जमीन पर ही धान लगाया है। वे स्वीकार करते हैं कि मौसम की बेरुखी से उन्हें करीब 2 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि यदि आगे मौसम अनुकूल रहा, तो बैंगन की यह फसल उनके घाटे की पूरी भरपाई कर देगी। किसानों का अनुमान है कि पूरे सीजन में इस बैंगन की खेती से वे 4 से 5 लाख रुपये तक की कमाई करने में सफल रहेंगे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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