35 हजार की पूंजी से शुरू किया नर्सरी का काम, आज हर महीने लाखों की कमाई का सपना कर रहे हैं पूरा बिहार एक घंटा पहले 3
बिहार के जहानाबाद में सत्येंद्र नारायण सिंह ने एक छोटी सी शुरुआत से खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, आज वे नर्सरी के जरिए अच्छी कमाई कर रहे हैं।

बदलाव की मिसाल बने सत्येंद्र नारायण

बिहार के जहानाबाद जिले में लोगों की सोच में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जिले के युवा अब रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने के बजाय अपने ही घर में स्वरोजगार के अवसर तलाश रहे हैं। इस बदलते परिवेश के एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरे हैं सत्येंद्र नारायण सिंह। उन्होंने बेरोजगारी के दौर से निकलकर आज एक सफल व्यवसायी के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

बेरोजगारी से सफलता तक का सफर

वर्ष 2016 से पहले सत्येंद्र नारायण सिंह के लिए समय काटना मुश्किल हो रहा था। उस दौरान वे पूरी तरह बेरोजगार थे और घर पर बैठे रहने के कारण भविष्य को लेकर चिंतित रहते थे। हालांकि, उनके मन में हमेशा यह दृढ़ संकल्प था कि वे जो भी काम करेंगे, वह अपने जिले में रहकर ही करेंगे। उस समय सबसे बड़ी बाधा पूंजी की कमी थी, जिसके कारण कोई भी नया व्यवसाय शुरू करना चुनौतीपूर्ण लग रहा था। कुछ पूंजी उन्हें अपने बच्चों से प्राप्त हुई, जिसके बाद उन्होंने जहानाबाद जिले में एक ऐसा अनूठा व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया जो उस समय क्षेत्र के लिए बिल्कुल नया था।

मात्र 35,000 रुपये से शुरू की नर्सरी

सत्येंद्र नारायण ने जिला मुख्यालय के पास कनौदी इलाके में केवल 35,000 रुपये की छोटी सी निवेश राशि के साथ एक नर्सरी की नींव रखी। उनका मुख्य उद्देश्य न केवल परिवार का खर्च उठाना था, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण से जुड़कर रहना भी था। आज उनकी मेहनत रंग ला रही है और वे नर्सरी के माध्यम से न केवल अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं, बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हो गए हैं।

आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल

सत्येंद्र ने अपनी नर्सरी को अत्यंत आधुनिक ढंग से तैयार किया है। उन्होंने स्थानीय मांग को देखते हुए नर्सरी में विभिन्न प्रकार के दुर्लभ और महंगे पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की है। वे बताते हैं, 2016 में जब मैंने नर्सरी शुरू की थी, तब जहानाबाद में इस तरह का कोई विकल्प नहीं था। आज बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, लेकिन मेरी नर्सरी की खासियत यहां मिलने वाले महंगे और विशिष्ट किस्म के पौधे हैं। यहाँ 5,000 रुपये के फूलों के पौधे से लेकर 2,000 रुपये तक के फलदार पौधे ग्राहकों के लिए उपलब्ध हैं। यही कारण है कि उनकी नर्सरी से होने वाली मासिक कमाई 35,000 से 40,000 रुपये तक पहुंच गई है।

मछली पालन और सजावट का काम

सत्येंद्र नारायण ने अपनी नर्सरी को एक हाईटेक रूप दिया है। उन्होंने नर्सरी के भीतर ही एक छोटे से हिस्से में अमेरिकन रेहू मछली पालन का काम भी शुरू किया है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। उनकी नर्सरी में केवल पौधे ही नहीं, बल्कि घर की सजावट में काम आने वाले सभी आवश्यक सामान भी उपलब्ध रहते हैं। वे न केवल पौधों की बिक्री करते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक हैं। वे खुद अपने घर पर भी पौधे लगाते हैं और जरूरत पड़ने पर दूसरे स्थानों पर भी वृक्षारोपण करते हैं, ताकि जिले का हरित क्षेत्र बढ़ सके। उनका यह व्यवसाय आज मुनाफे के साथ-साथ समाज में पर्यावरण जागरूकता फैलाने का भी एक माध्यम बन गया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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