जमशेदपुर में ऑटो का सफर हुआ महंगा, 12 जून से लागू होंगे नए रेट, चलने से पहले जान लें किराया झारखंड एक महीने पहले 19
जमशेदपुर में करीब चार साल बाद ऑटो किराए में संशोधन किया गया है। अधिकतर लोकल रूटों पर 5 रुपये तक और लंबी दूरी पर 20 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिससे रोजाना सफर करने वालों का मासिक खर्च बढ़ जाएगा।

जमशेदपुर शहर में ऑटो के सहारे रोजाना आना-जाना करने वाले लाखों यात्रियों के लिए अब यात्रा पहले से अधिक खर्चीली होने जा रही है। पूरे चार साल के अंतराल के बाद ऑटो किराए में बदलाव किया गया है। पेट्रोल और सीएनजी की लगातार बढ़ती कीमतों, वाहन के रखरखाव पर बढ़ते खर्च, स्पेयर पार्ट्स की महंगाई और दूसरे परिचालन खर्चों को ध्यान में रखते हुए शिक्षित बेरोजगार टेंपो चालक-चालक संघ ने किराया संशोधित करने का निर्णय लिया है। नई दरें 12 जून से लागू होने की संभावना है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो प्रतिदिन नौकरी, कारोबार, पढ़ाई या अन्य कामों के लिए ऑटो पर निर्भर रहते हैं।

अधिकतर रूटों पर 5 रुपये की बढ़ोतरी

शहर के ज्यादातर लोकल रूटों पर किराए में 5 रुपये तक का इजाफा किया गया है। देखने में यह वृद्धि भले ही मामूली लगे, लेकिन जो यात्री दिन में दो से चार बार ऑटो का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए यह हर महीने सैकड़ों रुपये के अतिरिक्त खर्च में तब्दील हो जाएगी।

साकची से भालूबासा, एग्रीको और सिद्धगोड़ा का किराया 10 रुपये से बढ़कर 15 रुपये हो गया है। बागुनहातु का किराया 15 से बढ़ाकर 20 रुपये, बारीडीह बस्ती और टेल्को स्टेशन का किराया 20 से 25 रुपये तथा मानगो चौक और गोलमुरी टिनप्लेट का किराया 10 से बढ़ाकर 15 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह आदित्यपुर का किराया 20 से 25 रुपये, छोटा गोविंदपुर का 40 से 45 रुपये और कांड्रा का 55 से बढ़ाकर 60 रुपये कर दिया गया है।

लंबी दूरी के रूट और महंगे

सबसे ज्यादा चर्चा लंबी दूरी के रूटों पर बढ़े किराए को लेकर हो रही है। टाटानगर रेलवे स्टेशन के एक ऑटो संचालक ने बताया कि पहले जमशेदपुर से एनआईटी तक जाने में यात्रियों को करीब 300 रुपये खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब यही किराया बढ़कर 330 से 370 रुपये तक पहुंच गया है। यानी एक ही फेरे में 30 से 70 रुपये तक अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं।

एमजीएम अस्पताल तक जाने वाले यात्रियों की जेब पर भी इसका बड़ा असर पड़ा है। पहले अलग-अलग इलाकों से एमजीएम अस्पताल पहुंचने के लिए करीब 350 रुपये देने पड़ते थे, जबकि अब यह किराया बढ़कर 450 से 500 रुपये तक हो गया है।

चालकों के लिए मजबूरी बना फैसला

ऑटो चालकों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में पेट्रोल और सीएनजी की कीमतें लगातार बढ़ी हैं। इसके साथ ही टायर, बैटरी, इंजन ऑयल, सर्विसिंग और अन्य स्पेयर पार्ट्स के दाम भी काफी ऊपर चले गए हैं। ऐसे हालात में पुराने किराए पर वाहन चलाना आर्थिक रूप से कठिन होता जा रहा था। चालकों का कहना है कि किराया बढ़ाना उनकी मजबूरी है, क्योंकि बढ़ती लागत के बीच परिवार का पालन-पोषण और वाहन का संचालन दोनों चुनौती बन गए थे।

महीने के अंत तक बढ़ेगा बोझ

दूसरी ओर यात्रियों का मानना है कि पहले से महंगाई की मार झेल रहे लोगों के लिए यह फैसला अतिरिक्त बोझ बनकर आया है। खासकर छात्र, नौकरीपेशा लोग और मरीजों के परिजन इससे ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि उन्हें रोजाना या नियमित रूप से ऑटो का सहारा लेना पड़ता है। कई यात्रियों का कहना है कि अगर रोजाना आने-जाने में 10 से 20 रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे, तो महीने के अंत तक यह रकम 300 से 600 रुपये तक पहुंच सकती है।

नए सिरे से लगाना होगा हिसाब

शहर में ऑटो किराए में औसतन 20 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में अब यात्रियों को सफर पर निकलने से पहले अपनी जेब का हिसाब फिर से लगाना होगा। चार साल बाद हुए इस बदलाव ने जहां ऑटो चालकों को कुछ राहत दी है, वहीं आम यात्रियों के लिए रोजमर्रा की यात्रा को थोड़ा और महंगा बना दिया है। आने वाले दिनों में बढ़ा हुआ यह किराया शहर की परिवहन व्यवस्था और लोगों के मासिक बजट, दोनों पर असर डालता दिखाई देगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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