राजस्थान
एक घंटा पहले
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टिकट वितरण में मची खींचतान
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 की नामांकन प्रक्रिया संपन्न होने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के भीतर का असंतोष खुलकर सामने आ गया है। चुनाव में टिकट पाने की दौड़ में पार्टी के फैसलों से कई कार्यकर्ता और स्थानीय नेता खासे नाराज हैं। टिकट वितरण में संगठन की प्राथमिकताओं और धरातल की राजनीति के बीच का टकराव साफ नजर आ रहा है।
प्रभावी परिवारों का दबदबा
चुनाव में कई वार्डों के लिए उम्मीदवारों का चयन करते समय पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ ही स्थानीय विधायकों और रसूखदार राजनीतिक परिवारों के प्रभाव की चर्चा जोरों पर है। टिकट के लिए हुई माथापच्ची में कई जगहों पर संगठन के आधिकारिक रुख की तुलना में प्रभावशाली व्यक्तियों की सिफारिशों को ज्यादा तवज्जो दिए जाने के आरोप लग रहे हैं।
आखिरी वक्त तक चलता रहा असमंजस
नामांकन दाखिल करने की समय सीमा के अंतिम पलों तक टिकट और चुनाव चिन्ह आवंटित करने को लेकर भारी असमंजस की स्थिति बनी रही। हालात इतने अनिश्चित थे कि कई प्रत्याशियों को अपना आधिकारिक टिकट मिलने की पुष्टि फोन कॉल के माध्यम से की गई। इस प्रक्रिया ने पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी को और अधिक हवा देने का काम किया है।
बागियों के सामने डटी पार्टियां
टिकट से वंचित रहने वाले दावेदारों ने न केवल पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोला है, बल्कि कई स्थानों पर बगावत का बिगुल भी बजा दिया है। नाराजगी के चलते कई दावेदारों ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी रण में उतरने का फैसला किया है। अब भाजपा और कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने नाराज नेताओं को मनाने और बागी प्रत्याशियों को शांत करने की है ताकि वे अपने अधिकृत उम्मीदवारों के लिए माहौल बना सकें।
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