जयपुर: खाद्य विभाग का बड़ा एक्शन, बिना एक्सपायरी वाली 1600 किलो सोहनपापड़ी की गई नष्ट राजस्थान एक घंटा पहले 3
राजस्थान की राजधानी जयपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक बड़ी छापेमारी के दौरान नियमों का उल्लंघन कर बेची जा रही सोहनपापड़ी का जखीरा जब्त कर उसे नष्ट कर दिया है।

मिलावटी खाद्य सामग्री पर बड़ा प्रहार

राजस्थान की राजधानी जयपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के खिलाफ एक सख्त अभियान छेड़ रखा है। इसी कड़ी में विभाग की टीम ने आनंद धाबास की निर्माण इकाई पर अचानक छापा मारा। इस दौरान मौके पर भारी मात्रा में सोहनपापड़ी पाई गई, जो मानकों के विपरीत बेची जा रही थी। अधिकारियों ने वहां मौजूद करीब 1600 किलो सोहनपापड़ी को तुरंत नष्ट करवा दिया। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इस मिठाई की पैकेजिंग पर न तो निर्माण की तारीख अंकित थी और न ही इसकी एक्सपायरी डेट का कोई जिक्र था, जो खाद्य सुरक्षा नियमों का सीधा उल्लंघन है।

अभियान के तहत हुई कार्रवाई

यह छापेमारी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के दिशा-निर्देशों पर संचालित शुद्ध आहार–मिलावट पर वार अभियान का हिस्सा थी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग की सेंट्रल टीम ने आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई पूरी की। निर्माण इकाई की जांच के दौरान विभाग की टीम को वहां स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों की भारी कमी मिली, जिसे देखते हुए सख्त कदम उठाए गए।

नमूनों की जांच से तय होगा आगे का रास्ता

मौके पर मौजूद अधिकारियों ने सोहनपापड़ी और बादाम कटिंग के नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए एकत्रित किया है। इन नमूनों को राज्य खाद्य प्रयोगशाला में भेजा जाएगा ताकि उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा की पुष्टि हो सके। फिलहाल विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल 1600 किलो सोहनपापड़ी को ही नहीं, बल्कि प्रतिष्ठान की अन्य अनियमितताओं पर भी नजर रखी जा रही है। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत प्रयोगशाला से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। फिलहाल प्रतिष्ठान को सुधार नोटिस भी जारी किया गया है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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