मुहर्रम पर जयपुर का अनूठा आकर्षण: 42 किलो शुद्ध चांदी से बना है चौमूं का यह ऐतिहासिक ताज़िया राजस्थान 2 महीने पहले 78
जयपुर के चौमूं में करीब 400 साल पुरानी परंपरा के तहत 42 किलो शुद्ध चांदी के ताज़िए का जुलूस निकाला जाता है, जो शहर की साझा विरासत की मिसाल है।

चार सौ साल पुरानी गौरवशाली विरासत

जयपुर जिले के चौमूं कस्बे में मुहर्रम के दौरान निकलने वाला शुद्ध चांदी का ताज़िया आज भी लोगों के लिए गहरी आस्था और कला का केंद्र बना हुआ है। 42 किलो शुद्ध चांदी से निर्मित इस 'घोड़ी ताज़िए' को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। इस ऐतिहासिक धरोहर का निर्माण लगभग 400 वर्ष पहले उन चार भाइयों द्वारा कराया गया था, जो बगड़ शरीफ से आकर चौमूं में बस गए थे।

ताज़िए की अनूठी बनावट और विशेषताएं

यह ताज़िया अपनी भव्यता और कारीगरी के लिए विख्यात है। इसकी ऊंचाई साढ़े सात फीट है और चौड़ाई साढ़े तीन फीट है। इस कलाकृति को एक विशेष तख्त पर रखा जाता है और मुहर्रम के दौरान मातमी धुनों और ढोल-ताशों के बीच जुलूस के रूप में निकाला जाता है। इसकी सबसे बड़ी पहचान इसके शीर्ष पर लगी सोने की कढ़ाई वाली चांद की आकृति है, जो इसे अन्य ताज़ियों से अलग बनाती है।

आस्था और परंपरा का मेल

समय के साथ ताज़िया बनाने की शैलियों में कई बदलाव आए हैं, लेकिन चौमूं की यह परंपरा आज भी अपनी मूल गरिमा के साथ कायम है। श्रद्धालु न केवल इसे देखने आते हैं, बल्कि अपनी मन्नतें पूरी होने पर इस ताज़िए पर सेहरा भी अर्पित करते हैं। यह ताज़िया न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास और सामाजिक एकता की जीवंत मिसाल भी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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