मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री का इंतजार अब अपने आखिरी पड़ाव पर है, मगर इस बार बारिश राहत से ज्यादा परेशानी लेकर आ सकती है। मौसम वैज्ञानिकों और वैश्विक जलवायु विशेषज्ञों के मुताबिक प्रशांत महासागर में पनप रही अल-नीनो जैसी परिस्थितियां प्रदेश के मौसम का मिजाज बदल सकती हैं। इसका नतीजा यह होगा कि मानसून आ जाने के बाद भी लोगों को उमस और चिपचिपी गर्मी से दो-चार होना पड़ सकता है।
आमतौर पर बारिश के बाद तापमान में गिरावट आती है, लेकिन हवा में नमी ज्यादा होने के कारण शरीर को गर्मी का अहसास कहीं अधिक होगा। यही वजह है कि मौसम विशेषज्ञ इस स्थिति को सामान्य गर्मी से अलग और कई बार उससे ज्यादा तकलीफदेह मान रहे हैं।
एल नीनो की 80 प्रतिशत संभावना
विश्व मौसम संगठन और जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि जून से अगस्त के बीच अल-नीनो का असर कई हिस्सों में नजर आ सकता है। यह प्रभाव सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बारिश के वितरण को भी प्रभावित कर सकता है। कुछ इलाकों में जहां जरूरत से ज्यादा वर्षा हो सकती है, वहीं कुछ क्षेत्रों में लंबे ब्रेक की स्थिति बन सकती है।
प्री-मानसून गतिविधियां हुईं तेज
मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से प्री-मानसून गतिविधियां जोर पकड़ रही हैं। राजधानी भोपाल समेत कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी है। हाल ही में भोपाल में 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आंधी चली और कुछ ही मिनटों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्री-मानसून अवधि में सामान्य से कई गुना अधिक बारिश रिकॉर्ड हो चुकी है। हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि मानसून के दौरान नमी बढ़ने से लोगों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पाएगी।
क्या है अल-नीनो और कैसे डालता है असर?
अल-नीनो प्रशांत महासागर और वायुमंडल के बीच होने वाला एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है। जब पेरू और चिली तट के आसपास समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाता है, तब अल-नीनो की स्थिति मानी जाती है। यही प्रक्रिया दुनिया के कई हिस्सों में मौसम के पैटर्न को प्रभावित करती है।
कब बनती है सुपर अल-नीनो जैसी स्थिति?
विशेषज्ञों के मुताबिक जब समुद्री सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाता है, तब इसे सुपर अल-नीनो जैसी स्थिति कहा जाता है। ऐसे समय में वैश्विक स्तर पर वर्षा, तापमान और तूफानों के पैटर्न में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं।
उमस सामान्य लू से ज्यादा खतरनाक क्यों?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि नमी अधिक होने पर शरीर से निकलने वाला पसीना तेजी से नहीं सूखता, जिससे शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम प्रभावित होता है। यही कारण है कि 40 डिग्री तापमान भी 43 या 44 डिग्री जैसा महसूस हो सकता है। कई बार यह स्थिति सामान्य लू से भी ज्यादा खतरनाक साबित होती है।
मध्य प्रदेश में कैसा रहेगा मानसून?
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून की प्रगति के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं और अगले कुछ दिनों में इसकी एंट्री संभव है। हालांकि बारिश का वितरण एक समान नहीं रहने की आशंका जताई जा रही है। कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा हो सकती है तो कुछ इलाकों में कम बारिश देखने को मिल सकती है।
खेती और जल संसाधनों पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बारिश असमान रही तो इसका असर खेती और भूजल पुनर्भरण पर पड़ सकता है। मानसून के दौरान लंबे ब्रेक किसानों की चिंता बढ़ा सकते हैं। यही वजह है कि कृषि और जल प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियां भी मौसम के बदलते संकेतों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
कैसे तैयार होता है मौसम का पूर्वानुमान?
विश्व मौसम संगठन, राष्ट्रीय मौसम एजेंसियों और उपग्रहों से मिले आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान तैयार किया जाता है। समुद्र की सतह का तापमान, वायुदाब, हवाओं की दिशा और बादलों की गतिविधियों का अध्ययन कर विशेषज्ञ संभावित मौसम स्थितियों का आकलन करते हैं। इसी आधार पर इस वर्ष उमस भरे मानसून की आशंका जताई जा रही है।
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