जबलपुर में 114 किमी लंबी आउटर रिंग रोड बनेगी महाकौशल की लाइफलाइन, इन इलाकों की बदलेगी तस्वीर मध्य प्रदेश 3 महीने पहले 47
जबलपुर में 3,540 करोड़ रुपये की लागत से देश की दूसरी सबसे बड़ी 114 किलोमीटर लंबी आउटर रिंग रोड का निर्माण तेज़ी से चल रहा है, जो शहर को जाम से राहत दिलाने के साथ पूरे महाकौशल क्षेत्र के विकास को नई रफ्तार देगी।

संस्कारधानी जबलपुर और समूचे महाकौशल अंचल के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। शहर को जाम की पुरानी समस्या से स्थायी रूप से मुक्ति दिलाने के मकसद से 3,540 करोड़ रुपये की 'आउटर रिंग रोड' परियोजना पर युद्ध स्तर पर काम जारी है। 114 किलोमीटर लंबी यह सड़क देश की दूसरी सबसे बड़ी रिंग रोड होगी, जो न सिर्फ जबलपुर शहर की सूरत बदलेगी, बल्कि पूरे महाकौशल इलाके के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी।

शहर के भीतर घटेगा वाहनों का दबाव

इस परियोजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि शहर के अंदर से गुजरने वाले व्यावसायिक वाहनों और ट्रकों का बोझ पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। जब ये भारी वाहन शहर के बाहर बनी रिंग रोड से गुजरेंगे, तो स्थानीय सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव अपने आप कम हो जाएगा। इससे आम नागरिकों के यात्रा का समय बचेगा और सड़क हादसों में भी गिरावट आएगी।

114 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को पांच प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है और हर हिस्से पर तेज़ी से काम चल रहा है। यह रिंग रोड बरेला, मानेगांव, शाहपुरा, कुशनेर और अमझर जैसे अहम इलाकों को आपस में जोड़ेगी। अब लोग बेसब्री से इसके जल्द शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।

नर्मदा नदी पर बनेगा एक्सट्राडोज्ड ब्रिज

इस परियोजना में इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना देखने को मिलेगा। रिंग रोड के साथ ही नर्मदा नदी पर 750 मीटर लंबा एक 'एक्सट्राडोज्ड ब्रिज' तैयार किया जा रहा है। यह पुल आवागमन को आसान बनाने के साथ-साथ अपनी भव्यता और उन्नत तकनीक के कारण प्रदेश के सबसे आधुनिक निर्माणों में गिना जाएगा।

कॉरिडोर के निर्माण में कई फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज और छोटे-बड़े पुल-पुलियाओं का जाल बिछाया जा रहा है, ताकि कहीं भी ट्रैफिक बाधित न हो और सफर निर्बाध रहे।

किसानों और व्यापारियों के लिए वरदान

जबलपुर की मंडियों तक अपनी कृषि उपज पहुंचाने वाले किसानों के लिए यह रिंग रोड किसी वरदान से कम नहीं होगी। फिलहाल शहर के जाम में फंसकर खराब हो जाने वाली फसलें अब कम समय में मंडियों तक पहुंच सकेंगी। इससे किसानों का परिवहन खर्च घटेगा और व्यापारियों को माल की आवाजाही में तेज़ी मिलेगी।

लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह कॉरिडोर व्यापारिक सुगमता का नया अध्याय लिखेगा। साथ ही जबलपुर के आसपास मौजूद विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की यात्रा भी अब पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।

पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान

रिंग रोड बन जाने से भेड़ाघाट, धुआंधार जलप्रपात, ग्वारी घाट, कान्हा नेशनल पार्क और अमरकंटक जैसे प्रमुख पर्यटन केंद्रों तक पर्यटकों की पहुंच बेहद आसान हो जाएगी। बेहतर कनेक्टिविटी से होटल, रेस्टोरेंट और स्थानीय ट्रैवल कारोबारियों को भी नई जान मिलेगी।

वहीं, मंडला, डिंडौरी, नरसिंहपुर और कटनी जैसे जिलों को आपस में जोड़ने वाला यह कॉरिडोर महाकौशल की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कारगर साबित होगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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