जबलपुर में पानी के लिए मचा हाहाकार: टैंकर पहुंचते ही मची अफरातफरी, डिब्बे गायब होने से लोग परेशान मध्य प्रदेश 3 महीने पहले 118
जबलपुर के रांझी क्षेत्र में भीषण गर्मी के चलते पानी का भारी संकट पैदा हो गया है, जहां नगर निगम के टैंकरों के पहुंचते ही स्थानीय लोगों में पानी भरने की जंग छिड़ जाती है।

संस्कारधानी में गहराया जल संकट

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले का रांझी क्षेत्र इन दिनों भीषण जल संकट की चपेट में है। गर्मी का मौसम अपने चरम पर है और चिलचिलाती धूप ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इस इलाके में स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि घरों में लगे नल पूरी तरह से सूख गए हैं। अब स्थानीय निवासियों की दिनचर्या पूरी तरह से नगर निगम द्वारा भेजे जाने वाले पानी के टैंकरों पर निर्भर होकर रह गई है। पानी का हर एक कतरा लोगों के लिए कीमती हो गया है।

टैंकर पहुंचते ही मची अफरातफरी

जैसे ही इलाके में पानी का टैंकर पहुंचता है, वहां मौजूद लोगों में अफरातफरी का माहौल बन जाता है। पानी भरने के लिए लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं और कई बार स्थिति युद्ध के मैदान जैसी हो जाती है। रांझी के सुदर्शन वार्ड में स्थिति का जायजा लेने पर सामने आया कि पानी की इस जद्दोजहद में लोग आपस में भिड़ रहे हैं। पानी भरने की इस अफरातफरी में कई बार लोगों के पानी भरने वाले डिब्बे भी गायब हो जाते हैं, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ जाता है।

पार्षद को खुद संभालना पड़ रहा मोर्चा

क्षेत्रीय पार्षद सावित्री ठाकुर को भीड़ को नियंत्रित करने और विवादों को टालने के लिए मौके पर खुद मौजूद रहना पड़ रहा है। कई बार स्थितियां इतनी तनावपूर्ण हो जाती हैं कि पार्षद को स्वयं पाइप पकड़कर लोगों को पानी भराना पड़ता है। उनका यह प्रयास इसलिए है ताकि किसी भी तरह का भेदभाव न हो और सभी को पानी का हिस्सा मिल सके। बावजूद इसके, पानी पाने की हताशा में अक्सर लोगों के बीच नोक-झोंक और खींचतान देखने को मिलती है।

निवासियों का छलका दर्द

स्थानीय निवासियों का कहना है कि जल संकट के कारण उनका जीवन नारकीय हो गया है। इलाके की एक महिला ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उन्हें पूरे दिन टैंकर के आने का इंतजार करना पड़ता है। पानी की कमी के चलते कई बार वे न तो नहा पाते हैं और न ही घर के जरूरी काम पूरे कर पाते हैं। वहीं, बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि टैंकर इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इलाके में बोरिंग की बेहतर व्यवस्था की जाए ताकि हर घर तक पाइपलाइन से पानी पहुंच सके।

क्या है विवाद की जड़?

पानी भरने को लेकर लोगों के बीच हो रही बहस पर पार्षद सावित्री ठाकुर का कहना है कि वे लगातार जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं। उनके अनुसार, लोगों के बीच होने वाली नोक-झोंक पानी की हताशा का नतीजा है। हालांकि, स्थानीय युवा इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। एक युवा ने बताया कि पानी पाने की इस लड़ाई में कई बार नौबत हाथापाई तक पहुंच जाती है। लोगों में इस बात का भी आक्रोश है कि समस्या होने पर पार्षद को कॉल करने के बावजूद समय पर सुनवाई नहीं होती है।

नगर निगम का पक्ष और भविष्य की चिंता

इस संकट के बीच एमआईसी मेंबर और पार्षद दामोदर सोनी ने स्पष्ट किया है कि रांझी में टैंकर वर्तमान में जीवन रक्षक का काम कर रहे हैं। नगर निगम की ओर से जलापूर्ति को सुचारू बनाने के लिए टैंकरों की संख्या में इजाफा किया गया है। इसके अलावा बोरिंग और अन्य विकल्पों के जरिए भी पानी उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।

चिंता की बात यह है कि यदि मानसून आने में देरी होती है, तो रांझी क्षेत्र के लोगों का यह संघर्ष और अधिक लंबा खिंच सकता है। आने वाले दिनों में यह संकट और भी गहरा होने की आशंका है, जिससे आम जनता का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें बारिश पर टिकी हैं, जो इस इलाके के लिए एकमात्र राहत की उम्मीद बनी हुई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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