ITR Filing 2026: फ्रीलांसर, ब्लॉगर और इनफ्लूएंसर्स रिटर्न भरते समय इन बातों का रखें ध्यान व्यापार 2 घंटे पहले 6
सोशल मीडिया, यूट्यूब और फ्रीलांसिंग से कमाई करने वालों के लिए ITR फाइल करते वक्त सही फॉर्म चुनना, 26AS-AIS का मिलान करना और मुफ्त मिले प्रोडक्ट को आय में जोड़ना बेहद अहम है। रिटर्न में एक छोटी चूक भी इनकम टैक्स विभाग का नोटिस ला सकती है।

आज के दौर में सोशल मीडिया, यूट्यूब, ब्लॉगिंग और फ्रीलांसिंग को कमाई का जरिया बनाने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है। जितनी रफ्तार से इनकी आमदनी बढ़ रही है, उतनी ही सख्ती से टैक्स नियमों का पालन भी अब अनिवार्य हो गया है। यदि आप फ्रीलांसर, कंटेंट क्रिएटर, यूट्यूबर या इनफ्लूएंसर हैं, तो ITR भरते समय की गई एक मामूली गलती भी आपको इनकम टैक्स विभाग के नोटिस तक पहुंचा सकती है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले कुछ अहम बातें समझ लेना बेहद जरूरी है।

फ्रीलांसर और इनफ्लूएंसर्स की कमाई अक्सर एक नहीं, बल्कि कई स्रोतों से आती है। इसमें ब्रांड डील, यूट्यूब से मिलने वाला एड रेवेन्यू, एफिलिएट मार्केटिंग, कंसल्टिंग, स्पॉन्सर्ड पोस्ट और डिजिटल कंटेंट से होने वाली आमदनी शामिल होती है। यही वजह है कि हर आय का सटीक रिकॉर्ड रखना बेहद जरूरी हो जाता है।

सही ITR फॉर्म का चुनाव सबसे अहम

टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे प्रोफेशनल्स को आमतौर पर ITR-3 या ITR-4 फॉर्म का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही रिटर्न में अपने प्रोफेशन का सही कोड दर्ज करना भी जरूरी है, ताकि जीएसटी और अन्य रिकॉर्ड्स के बीच कोई अंतर न रहे। अगर आपकी आय तय सीमा से ज्यादा है, तो आपको एडवांस टैक्स जमा करना पड़ सकता है। वहीं पात्र फ्रीलांसर और छोटे कारोबारी सेक्शन 44ADA या 44AD के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम का फायदा उठा सकते हैं, जिससे अकाउंट बुक्स बनाए रखने की जटिलता काफी हद तक कम हो जाती है।

जीएसटी नियमों की अनदेखी न करें

सिर्फ इनकम टैक्स तक सीमित न रहें, जीएसटी से जुड़े नियमों का पालन भी उतना ही आवश्यक है। अगर आप अपने प्रोफेशनल खर्चों को टैक्स में डिडक्शन के रूप में दिखाना चाहते हैं, तो उनके बिल और दस्तावेज संभालकर रखना जरूरी होगा।

26AS और AIS का मिलान जरूर करें

रिटर्न दाखिल करने से पहले Form 26AS और AIS में दर्ज जानकारी का आपस में मिलान कर लेना चाहिए। यदि किसी भुगतान या टीडीएस में कोई अंतर नजर आता है, तो उसे पहले दुरुस्त करा लेना ही समझदारी है।

मुफ्त मिले प्रोडक्ट भी टैक्स के दायरे में

अक्सर कई ब्रांड प्रमोशन के बदले इनफ्लूएंसर्स को मुफ्त प्रोडक्ट या सैंपल भेजते हैं। टैक्स नियमों के अनुसार इनकी बाजार कीमत को भी आय माना जा सकता है। ऐसे में इन्हें नजरअंदाज करना आगे चलकर मुश्किल खड़ी कर सकता है।

चेतन शुक्ला
Official Verified Account

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!