दलीप ट्रॉफी में 270 रनों की सुनामी के बाद ईशान किशन का खुलासा, बताया क्यों अब नहीं करते ज्यादा विचार
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2 घंटे पहले
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ईशान किशन की जबरदस्त पारी और जिम्मेदारी का अहसास
दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में ईशान किशन ने बल्ले के साथ जो कारनामा दिखाया, उसने हर किसी को प्रभावित किया है। अपनी इस ऐतिहासिक 270 रनों की मैराथन पारी के बाद ईशान ने केवल अपनी तकनीक पर चर्चा नहीं की, बल्कि इस बात पर भी प्रकाश डाला कि किस तरह कप्तानी की बागडोर संभालने के बाद उनके स्वभाव और खेल के नजरिए में बड़ा परिवर्तन आया है।
ईस्ट जोन की कप्तानी कर रहे ईशान किशन ने सोमवार को स्वीकार किया कि वर्ष 2024 में झारखंड की कप्तानी मिलने के बाद से उनका व्यक्तित्व काफी बदला है। ईशान के अनुसार, कप्तानी की जिम्मेदारी ने उन्हें एक परिपक्व लीडर, बेहतर क्रिकेटर और एक इंसान के तौर पर संवारा है। उन्होंने माना कि वे अब अपने उस पुराने बेपरवाह अंदाज से पूरी तरह बाहर निकल चुके हैं और टीम के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
मैदान पर जिम्मेदारी और फॉर्म की वापसी
वर्ष 2023 के अंत में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट हाथ से निकलने के बाद ईशान ने एक चुनौतीपूर्ण दौर देखा था। हालांकि, उन्होंने घरेलू क्रिकेट में जोरदार वापसी की और झारखंड की कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली। जब भी उन्हें टीम के लिए उपलब्ध रहने का मौका मिला, उन्होंने नेतृत्व की भूमिका बखूबी निभाई। इस संघर्ष के बाद, ईशान की भारतीय टीम में दोबारा वापसी हो चुकी है और वे सीमित ओवरों के क्रिकेट में मुख्य खिलाड़ी बने हुए हैं। आंकड़े बताते हैं कि ईशान इस वर्ष तीनों प्रारूपों को मिलाकर सबसे अधिक रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज हैं। वे अब तक 28 मैचों में कुल 986 रन अपने खाते में जोड़ चुके हैं।
दलीप ट्रॉफी फाइनल में साउथ जोन के खिलाफ खेली गई उनकी 270 रनों की पारी ने न केवल दर्शकों का मन मोह लिया, बल्कि ईस्ट जोन को पहली पारी में 708 रनों का एक पहाड़ जैसा विशाल स्कोर बनाने में मदद की।
अब ज्यादा सोचने के बजाय सिर्फ खेल पर ध्यान
अपनी बल्लेबाजी के दर्शन को स्पष्ट करते हुए ईशान ने बताया कि करियर की शुरुआती दिनों में खिलाड़ी अक्सर सीनियर साथियों पर निर्भर रहता है, लेकिन एक स्थापित खिलाड़ी बनने के बाद जिम्मेदारी का बोझ अपने कंधों पर ही लेना पड़ता है। ईशान ने अपने वर्तमान मंत्र का खुलासा करते हुए कहा कि वे आजकल किसी भी चीज के बारे में ज्यादा विचार करने से बचते हैं। एक बल्लेबाज के तौर पर उनका सीधा सा ध्येय बस क्रीज पर जाकर गेंद की मेरिट के हिसाब से प्रतिक्रिया देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अब खुद से कोई अनावश्यक उम्मीदें नहीं बांधते, बस रनों का पीछा करना और टीम को मजबूती देना ही उनका मुख्य लक्ष्य है।
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