ईरान की खाड़ी देशों को सख्त चेतावनी, कहा- हमारी नजरों से बचकर नहीं निकल सकते विश्व 5 घंटे पहले 2
ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारी ने खाड़ी देशों को आगाह किया है कि वे अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में मदद करना बंद करें, वरना इसे सीधे तौर पर सैन्य भागीदारी माना जाएगा।

फारस की खाड़ी में तनाव और ईरान की कड़ा रुख

ईरान ने फारस की खाड़ी के दक्षिणी तट पर स्थित पड़ोसी देशों को स्पष्ट रूप से चेतावनी जारी की है। तेहरान ने साफ कहा है कि यदि इन देशों ने अपनी जमीन या सुविधाओं का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के लिए किया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने जोर देकर कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में सक्रिय अमेरिकी सैन्य ठिकानों और वहां हो रही तमाम हलचलों पर ईरानी सेना की पैनी नजर है। अब्दुल्लाही ने ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के माध्यम से और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए कहा कि क्षेत्रीय देशों को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि उनकी गतिविधियां ईरान से छिपी हुई हैं।

अमेरिकी विमानों की तैनाती पर ईरान को संदेह

मेजर जनरल अब्दुल्लाही ने उन खाड़ी देशों के दावों पर सवाल उठाया है जिन्होंने कहा था कि वे अमेरिका को अपनी धरती का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं करने देंगे। उन्होंने तर्क दिया कि क्षेत्रीय ठिकानों पर बड़ी संख्या में अमेरिकी सैन्य विमानों की उपस्थिति इस बात का सबूत है कि कुछ तो गलत हो रहा है। उन्होंने खास तौर पर हवा में ईंधन भरने वाले विमानों की तैनाती की ओर इशारा करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में इन विमानों का वहां मौजूद होना बिना मेजबान देशों की मिलीभगत के संभव ही नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह मानना तर्क से परे है कि संबंधित देश इन सैन्य तैयारियों से पूरी तरह अनजान हैं। ईरान का स्पष्ट कहना है कि वह इन ठिकानों की हर एक गतिविधि को बारीकी से ट्रैक कर रहा है।

सहयोग को माना जाएगा सैन्य भागीदारी

ईरान की ओर से यह चेतावनी खाड़ी देशों के लिए एक कड़ा संदेश है। अली अब्दुल्लाही ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी देश अमेरिकी सेना को किसी भी प्रकार की सहायता या लॉजिस्टिक सुविधा प्रदान करता है, तो ईरान इसे अमेरिका के साथ एक प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी के रूप में देखेगा। उन्होंने कहा कि आक्रामक अमेरिकी बलों की किसी भी स्तर पर मदद करना सीधे तौर पर ईरान के सुरक्षा हितों के खिलाफ माना जाएगा। गौरतलब है कि अली अब्दुल्लाही हाल ही में ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किए गए हैं। उनकी नियुक्ति ईरान के सर्वोच्च नेता और सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ अयातुल्लाह मोज्तबा हुसैनी खामेनेई द्वारा की गई थी।

सैन्य नेतृत्व में बड़े बदलाव और क्षेत्रीय स्थिति

बीते 10 अगस्त को अयातुल्लाह खामेनेई ने ईरान की सैन्य संरचना में कई बड़े फेरबदल किए थे। उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बसीज रेजिस्टेंस फोर्स के साथ-साथ सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ में 6 वरिष्ठ कमांडरों को नई जिम्मेदारियां सौंपी थीं। इसी क्रम में अली अब्दुल्लाही को चीफ ऑफ स्टाफ और कियूमर्स हैदरी को डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया था। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा गतिरोध पिछले काफी समय से जारी है। एक तरफ अमेरिकी रक्षा विभाग पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी को कम करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी इलाका घोषित करने जैसे फैसलों ने इस क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है, जिससे शांति की उम्मीदें फिलहाल धूमिल नजर आती हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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