कैलाश विजयवर्गीय का मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र, ढाई साल से उपेक्षा और असहयोग का लगाया आरोप मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 75
मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इंदौर की अनदेखी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने मास्टर प्लान से लेकर औद्योगिक विकास तक के लंबित कार्यों को लेकर सरकार को चेतावनी दी है।

सरकार और प्रशासन पर कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा हमला

मध्य प्रदेश की सियासत में उस समय हलचल मच गई जब प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक कड़ा पत्र लिखा। इस पत्र के जरिए उन्होंने इंदौर शहर से जुड़े महत्वपूर्ण विकास कार्यों में देरी और अनदेखी का मुद्दा उठाया है। मंत्री का कहना है कि पिछले ढाई साल से उन्हें लगातार असहयोग का सामना करना पड़ रहा है और उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

मास्टर प्लान और मेट्रोपॉलिटन रीजन पर विवाद

मंत्री विजयवर्गीय ने पत्र में सबसे प्रमुख रूप से इंदौर के मास्टर प्लान का उल्लेख किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्लान को मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को दो साल पहले ही भेजा जा चुका है। विजयवर्गीय के अनुसार, इस विषय पर मुख्य सचिव और विभागीय स्तर पर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। उन्होंने शिकायत की है कि पहले भेजे गए पत्रों का भी न तो कोई जवाब दिया गया और न ही इस पर कोई चर्चा की गई।

इसके अलावा, उन्होंने उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के नामकरण पर भी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि यह क्षेत्र पूरी तरह से इंदौर पर आधारित है, इसलिए इसे केवल इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन कहा जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि जारी किए गए नोटिफिकेशन में जानबूझकर इंदौर के महत्व को कम करने की कोशिश की गई है।

आरजीपीवी और पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की अनदेखी

शिक्षा और तकनीकी विकास के मोर्चे पर भी विजयवर्गीय ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरजीपीवी के प्रस्तावित विभाजन का जिक्र करते हुए कहा कि भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में नई इकाइयां खोली जा रही हैं, लेकिन इंदौर को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि इंदौर में 1952 से ही एसजीएसआईटीएस जैसा प्रतिष्ठित संस्थान मौजूद है और यहां 50 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज चल रहे हैं, फिर भी शहर को शैक्षणिक विस्तार से वंचित रखा गया है।

पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यहाँ 650 से अधिक एमएसएमई और 176 से ज्यादा बड़े उद्योग स्थापित हैं। इसके बावजूद, केंद्र स्तर की टेस्टिंग लैब या प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन सेंटर की सुविधा वहां उपलब्ध नहीं है, जबकि नए औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं।

अन्य लंबित मुद्दे और सख्त चेतावनी

कैलाश विजयवर्गीय ने अपने पत्र में कई अन्य गंभीर मुद्दे भी गिनाए हैं:

  • इंदौर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध न कराना।
  • सिंहस्थ से जुड़े महत्वपूर्ण विकास कार्यों में इंदौर को उचित प्राथमिकता न देना।
  • शहर में जल संकट के समय विशेष राहत कार्यों का न मिलना।

पत्र के समापन में उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि इन सभी समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो उन्हें जनहित में मजबूरन सार्वजनिक मंच पर अपनी बात रखनी पड़ेगी।

मामला सामने आने पर क्या बोले मंत्री

जब इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद पत्रकारों ने कैलाश विजयवर्गीय से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताया। उन्होंने कहा कि इस पर संगठन के स्तर पर चर्चा चल रही है, इसलिए फिलहाल वे इस पर अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए यह भी कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि यह पत्र मीडिया तक कैसे पहुंचा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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