रेलवे का बड़ा कारनामा: दिल्ली और जींद के बीच दौड़ी हाइड्रोजन ट्रेन, डीजल-बिजली की नहीं पड़ेगी जरूरत राष्ट्रीय राजनीति 2 महीने पहले 77
भारतीय रेलवे ने पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का सफल ट्रायल पूरा कर लिया है। यह ट्रेन दिल्ली और जींद के रूट पर दौड़कर अपनी तकनीकी दक्षता को साबित कर चुकी है।

पर्यावरण के अनुकूल रेलवे का नया सफर

भारतीय रेलवे ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है। शुक्रवार को यह विशेष ट्रेन नई दिल्ली से जींद के बीच सफलतापूर्वक चलाई गई। यह ट्रायल न केवल रेलवे की तकनीकी प्रगति को दर्शाता है, बल्कि प्रधानमंत्री के 'जीरो कार्बन' उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है। इससे पहले इस ट्रेन का परीक्षण सोनीपत और जींद के बीच किया जा चुका है, लेकिन दिल्ली तक इसका पहुँचना एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

तकनीकी बारीकियों और सुरक्षा की परख

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य ट्रेन की सुरक्षा और उसकी तकनीकी क्षमता को पूरी तरह से जाँचने का था। विशेषज्ञों की एक विशेष टीम ने इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी की। ट्रायल के दौरान मुख्य रूप से दो बड़े पहलुओं पर ध्यान दिया गया:

  • इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस: ट्रेन आपातकालीन स्थिति में कितनी दूरी पर जाकर पूरी तरह रुकती है।
  • ऑसिलेशन परीक्षण: तेज गति से दौड़ते समय ट्रेन की स्थिरता और उसके झटकों का विश्लेषण करना।

इन मानकों को परखने के पीछे मकसद यह सुनिश्चित करना है कि यात्री सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न हो। ट्रायल के दौरान यह देखा गया कि हाइड्रोजन तकनीक आधारित ट्रेन विभिन्न गति और परिस्थितियों में किस तरह का प्रदर्शन करती है।

हाइड्रोजन तकनीक ही क्यों है खास

आज के दौर में जब दुनिया प्रदूषण से जूझ रही है, तब हाइड्रोजन ट्रेनें एक बेहतरीन विकल्प के तौर पर उभरी हैं। इन ट्रेनों में पारंपरिक डीजल या बिजली का उपयोग नहीं होता है। इसके बजाय, इनमें ईंधन सेल के माध्यम से ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी खासियत यह है कि उत्सर्जन के रूप में केवल पानी (वाष्प) बाहर निकलता है, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है। यही कारण है कि इसे ग्रीन ट्रांसपोर्ट के नाम से जाना जाता है।

2030 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का संकल्प

भारतीय रेलवे साल 2030 तक 'नेट जीरो कार्बन एमिशन' यानी शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। देश भर के रेल रूटों के विद्युतीकरण के साथ-साथ अब वैकल्पिक ईंधन के तौर पर हाइड्रोजन तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि, लागत और संचालन संबंधी कई सवाल भी उठते रहे हैं, लेकिन रेलवे का कहना है कि वे हर एक पहलू को गहराई से परख रहे हैं ताकि नियमित परिचालन से पहले सभी मानक पूरे किए जा सकें।

भविष्य की राह और योजनाएं

रेल मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, इस तकनीक का इस्तेमाल सबसे पहले उन रूटों पर किया जाएगा जो भौगोलिक दृष्टि से पहाड़ी हैं या जहां पर्यावरण की सुरक्षा बेहद संवेदनशील है। दिल्ली से जींद के बीच हुए इस सफल ट्रायल ने यह विश्वास जगाया है कि आने वाले समय में ऐसी ट्रेनों की संख्या को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। यह तकनीक न केवल प्रदूषण को कम करने में मदद करेगी बल्कि आधुनिक परिवहन के नए युग की शुरुआत भी करेगी। रेलवे के लिए यह बड़ी उपलब्धि साबित हुई है जो भविष्य में भारतीय रेल की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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