भारतीय मूल की नावी पिल्लई को मिला साल 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फिर हाथ लगी निराशा विश्व 4 घंटे पहले 3
भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नावी पिल्लई को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है।

विश्व के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक, नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है। वर्ष 2026 का यह सर्वोच्च सम्मान भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवनथम 'नावी' पिल्लई को दिया जाएगा। इस महत्वपूर्ण सम्मान की घोषणा नॉर्वेजियन नोबेल समिति के जोर्गेन वाट्ने फ्राइडनेस द्वारा की गई है। इस घोषणा के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल पुरस्कार पाने का पुराना सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है।

शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए नावी पिल्लई का संघर्ष

नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बड़े फैसले की जानकारी साझा की। नोबेल समिति ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि नावी पिल्लई को यह विशिष्ट पुरस्कार दुनिया भर में शांति स्थापित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने की दिशा में किए गए उनके सराहनीय प्रयासों के लिए दिया जा रहा है।

नावी पिल्लई का मानवाधिकारों के क्षेत्र में बेहद लंबा और प्रभावशाली इतिहास रहा है। उन्होंने साल 2008 से लेकर साल 2014 तक संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। इस महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए उन्होंने वैश्विक स्तर पर शांति और न्याय की वकालत की और कई ऐतिहासिक फैसले लिए, जिससे दुनिया भर में पीड़ित वर्गों को न्याय मिला।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फिर मिली मायूसी

दूसरी तरफ, नोबेल शांति पुरस्कार की इस घोषणा से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर गहरी निराशा हाथ लगी है। डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से खुद को इस वैश्विक सम्मान का प्रबल दावेदार मानते रहे हैं। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से यह दावा भी किया है कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर कई देशों के बीच जारी हिंसक संघर्षों और युद्धों को रुकवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके चलते उन्हें शांति का नोबेल मिलना चाहिए। हालांकि, नोबेल चयन समिति ने उनके इन दावों को तवज्जो न देते हुए इस साल नावी पिल्लई के नाम पर अंतिम मुहर लगाई और ट्रंप को एक बार फिर खाली हाथ रहना पड़ा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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