हिमालय की दुर्गम चोटियों पर अब ड्रोन से पहुंचेगा राशन, भारतीय सेना की रसद प्रणाली में बड़ा बदलाव भारत 2 महीने पहले 48
भारतीय सेना लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक के दुर्गम इलाकों में सैनिकों तक रसद पहुंचाने के लिए स्वदेशी लॉजिस्टिक्स ड्रोन का उपयोग करने जा रही है, जो कठिन मौसम में भी 18,000 फीट की ऊंचाई तक सामान ले जाने में सक्षम हैं।

हिमालयी सीमा पर बदली रसद की तस्वीर

भारतीय सेना ने हिमालय के कठिन और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात अपने जवानों तक जरूरी सामान और रसद पहुंचाने के लिए एक नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। अब तक इन इलाकों में रसद पहुंचाने के लिए चीता हेलीकॉप्टर्स का उपयोग किया जाता रहा है, जो अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। इसके अलावा, पैदल सैनिकों को अपनी पीठ पर भारी राशन लादकर खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ता है। अब भारतीय सेना इस चुनौती से निपटने के लिए आधुनिक लॉजिस्टिक्स ड्रोन का इस्तेमाल करने जा रही है। मेक इन इंडिया पहल के तहत विकसित किए गए ये ड्रोन अब चीन सीमा के निकट 18,000 फीट की ऊंचाई पर भारी वजन ढोने में सक्षम होंगे।

हेलीकॉप्टर और पैदल सेना की निर्भरता होगी खत्म

लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में मौसम का मिजाज अक्सर खराब रहता है। ऐसे में हेलीकॉप्टर मिशन बहुत महंगे साबित होते हैं और खराब दृश्यता या बर्फीले तूफानों के दौरान उड़ान भरना लगभग असंभव हो जाता है। पैदल आपूर्ति में न केवल अधिक समय लगता है, बल्कि जवानों पर शारीरिक थकान का भी असर पड़ता है। इन समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए सेना अब लॉजिस्टिक्स ड्रोन को प्राथमिकता दे रही है। ये ड्रोन कम खर्च में बेहद तेजी से दुर्गम चौकियों तक भोजन, गोला-बारूद और चिकित्सा सामग्री पहुंचाने में माहिर हैं। सेना की मांग है कि ये ड्रोन कम से कम 18,000 फीट की ऊंचाई पर 20 से 40 किलोग्राम तक का वजन लेकर उड़ान भरने में सक्षम हों।

स्वदेशी एयर हंस और येती की खासियत

भारतीय कंपनियों ने सेना की इन जरूरतों को देखते हुए अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक विकसित की है। बॉनवी एयरो की ओर से पेश किया गया एयर हंस ड्रोन 20 किलोग्राम का पेलोड उठाकर 12 किलोमीटर की रेंज तक जाने में समर्थ है। यह ड्रोन 16,500 फीट की ऊंचाई तक आसानी से पहुंच सकता है। दूसरी ओर, आइडियाफोर्ज कंपनी ने येती नाम का ड्रोन तैयार किया है, जिसे विशेष रूप से अत्यंत प्रतिकूल मौसम के लिए बनाया गया है। यह ड्रोन 50 से 200 किलोग्राम तक का वजन ले जाने की क्षमता रखता है और 6,500 मीटर की ऊंचाई तक संचालित किया जा सकता है। ये स्वदेशी उपकरण हिमालय पर तैनात भारतीय सैनिकों के लिए नई जीवनरेखा (लाइफलाइन) साबित होंगे।

हिम-ड्रोन-ए-थॉन से मिलेगा आत्मनिर्भरता को बल

भारतीय सेना ने घरेलू ड्रोन निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिए हिम-ड्रोन-ए-थॉन जैसी विशेष प्रतियोगिताओं का आयोजन किया है। इन आयोजनों के माध्यम से 4,000 से 5,000 मीटर की वास्तविक ऊंचाई पर विभिन्न ड्रोन का सफल परीक्षण किया जा चुका है। इन परीक्षणों में लॉजिस्टिक्स, सर्विलांस और स्वाम ड्रोन तकनीक का बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है। लेह में आयोजित हिमटेक इवेंट ने लद्दाख को रक्षा क्षेत्र में नवाचार का एक प्रमुख केंद्र बना दिया है। आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के तहत निर्मित ये ड्रोन न केवल सेना की रसद क्षमता को मजबूत करेंगे, बल्कि माइनस डिग्री तापमान में भी आपूर्ति श्रृंखला को बाधित नहीं होने देंगे, जिससे सीमा पर भारतीय सेना का दबदबा और अधिक बढ़ेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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