पुतिन की डिफेंस डिप्लोमेसी: S-400 के बाद भारत को Su-57 लड़ाकू विमान का बड़ा ऑफर, क्या धरी रह जाएगी अमेरिकी F-35 की दावेदारी? भारत 6 घंटे पहले 2
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के बीच दोनों देशों के बीच पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 और अत्याधुनिक इंजन Product 177S के तकनीकी हस्तांतरण को लेकर बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक बातचीत तेज हो गई है।

नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारत-रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय

भारत की राजधानी नई दिल्ली इस समय ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी के लिए पूरी तरह सज-धज कर तैयार है। वैश्विक नेताओं और विदेशी अतिथियों के भव्य स्वागत के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस बड़े आयोजन में उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इस बेहद महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के इतर भारत की कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बातचीत होने की पूरी संभावना है। इसी कड़ी में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंच चुके हैं। राष्ट्रपति पुतिन का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और रूस के बीच हजारों करोड़ रुपये की रक्षा संधियों को लेकर पर्दे के पीछे बड़ी हलचल चल रही है।

इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य और तकनीकी सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी की जा रही है। विशेष रूप से पांचवीं पीढ़ी के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में शुमार किए जाने वाले Su-57 फाइटर जेट सौदे को लेकर दोनों देशों के बीच गहन चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। भारत अपने हवाई बेड़े को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप ढालने के लिए लंबे समय से अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की तलाश में है और रूस इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहता है।

S-400 से आगे बढ़कर Su-57 और Product 177S इंजन पर टिकी नजरें

भारत ने अपने पुराने और भरोसेमंद रक्षा साझेदार रूस से S-400 वायु रक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस सिस्टम) की 5 अतिरिक्त स्क्वाड्रन खरीदने का रणनीतिक निर्णय पहले ही ले लिया है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच इस महत्वपूर्ण प्रणाली की कुल लागत और भुगतान की शर्तों को लेकर बातचीत अंतिम चरणों में है। इस मजबूत सैन्य साझेदारी के बीच अब रूस भारत के सामने अपने सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमान Su-57 को बेचने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। रूस की ओर से नई दिल्ली को इस विमान की आपूर्ति के कई प्रस्ताव पहले भी दिए जा चुके हैं और कूटनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच इसे लेकर अनौपचारिक रूप से बातचीत का दौर जारी है।

अब जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन स्वयं भारत में मौजूद हैं, तो इस सौदे के आधिकारिक रूप से आगे बढ़ने की अटकलें और तेज हो गई हैं। इसके साथ ही, भारत और रूस के बीच Su-57 विमान की संभावित बिक्री की चर्चाओं के बीच रूस ने एक और बड़ा दांव खेला है। रूस ने भारत के समक्ष अपने अत्याधुनिक Product 177S इंजन का प्रस्ताव फिर से रखा है। सूत्रों के अनुसार, रूस इस इंजन को न केवल Su-57 के लिए बल्कि भारतीय वायुसेना के पास पहले से मौजूद सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमानों के विशाल बेड़े में इस्तेमाल होने वाले वर्तमान AL-31F/AL-31FP श्रेणी के इंजनों के एक शक्तिशाली और आधुनिक विकल्प के रूप में भी पेश कर रहा है। सबसे खास बात यह है कि रूस ने इस नए इंजन के भारत में ही स्थानीय स्तर पर निर्माण के लिए पूरी तकनीक हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) की भी पेशकश की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 11 सितंबर को होने वाली बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक से ठीक पहले Su-57 की बिक्री और उससे संबंधित तकनीकी सहयोग के मुद्दों पर दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच औपचारिक बातचीत की पुष्टि हो चुकी है। रूस ने साफ तौर पर संकेत दिया है कि इस बैठक के एजेंडे में लड़ाकू विमान की सीधी बिक्री के साथ-साथ अत्यंत संवेदनशील तकनीक का हस्तांतरण भी शामिल है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि Product 177S इंजन का यह प्रस्ताव इस शिखर वार्ता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है।

Su-57 लड़ाकू विमान की वे पांच अत्याधुनिक खूबियां जो इसे बनाती हैं बेहद खतरनाक

रूसी वायुसेना का गौरव माना जाने वाला पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान Su-57 कई ऐसी तकनीकी विशेषताओं से लैस है जो इसे दुनिया के अन्य लड़ाकू विमानों की तुलना में बेहद घातक और बेजोड़ बनाती हैं। इसकी प्रमुख खूबियां इस प्रकार हैं:

  • असाधारण गतिशीलता (सुपर-मैन्युवरेबिलिटी): Su-57 की सबसे बड़ी ताकत इसकी बेहतरीन और हैरतअंगेज गतिशीलता है। इसमें अत्याधुनिक 3D thrust-vectoring तकनीक का उपयोग किया गया है। इसकी सहायता से यह विमान हवा में अविश्वसनीय रूप से बेहद तीखे मोड़ लेने और अत्यधिक जटिल हवाई कलाबाजियां (हाई एंगल-ऑफ-अटैक) दिखाने में पूरी तरह सक्षम है, जिससे डॉगफाइट के दौरान दुश्मन का बच पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
  • बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक रफ्तार (सुपरक्रूज़): यह विमान आफ्टरबर्नर का उपयोग किए बिना ही लगभग Mach 1.3 से अधिक की सुपरसोनिक गति से लगातार उड़ान भर सकता है। इस असाधारण क्षमता को सुपरक्रूज़ कहा जाता है। इसके कारण न केवल विमान के ईंधन की भारी बचत होती है, बल्कि इसका इन्फ्रारेड सिग्नेचर भी बेहद कम हो जाता है, जिससे दुश्मन के थर्मल सेंसरों के लिए इसे ढूंढ पाना बेहद कठिन हो जाता है।
  • अत्याधुनिक रडार और सेंसर प्रणाली: विमान के भीतर उन्नत एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैंड एरे (AESA) रडार के साथ-साथ बगल में लगे रडार एरे और प्रसिद्ध 101KS इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम को लगाया गया है। इन सभी सेंसरों का अनूठा संयोजन विमान के पायलट को चारों तरफ लगभग 360 डिग्री का एक स्पष्ट सुरक्षा चक्र और परिस्थिति की पूर्ण समझ (सिचुएशनल अवेयरनेस) प्रदान करता है।
  • आंतरिक हथियार कक्ष (इंटरनल वेपन बे): Su-57 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके भीतर विशाल हथियार कक्ष मौजूद हैं। इसके कारण यह विमान लंबी दूरी की घातक R-37M मिसाइलों और अत्यधिक आधुनिक स्टील्थ क्रूज मिसाइलों जैसे भारी हथियारों को अपने शरीर के भीतर छिपाकर ले जा सकता है। हथियारों को बाहर न लटकाकर अंदर रखने से विमान की रडार दृश्यता (स्टील्थ क्षमता) को बनाए रखने में बड़ी मदद मिलती है।
  • ड्रोन स्वॉर्म के लिए 'मदरशिप': भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए Su-57 को मानवयुक्त और मानव-रहित विमानों के तालमेल (मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग) के लिए विकसित किया जा रहा है। इस तकनीक के तहत यह लड़ाकू विमान आसमान में ही एक उड़ते हुए कमांड सेंटर की तरह काम कर सकता है, जो अपने साथ उड़ने वाले लॉयल विंगमैन ड्रोन या ड्रोन स्वॉर्म (ड्रोन के पूरे झुंड) को सीधे नियंत्रित कर सकेगा। यह क्षमता भविष्य के हवाई युद्ध में इस विमान की ताकत को कई गुना बढ़ा देती है।

Product 177S इंजन: भारत के Su-30MKI बेड़े के लिए क्यों है यह बेहद अहम?

रूस के प्रसिद्ध ए. ल्युलका डिजाइन ब्यूरो (A. Lyulka Design Bureau) द्वारा विकसित किया गया Product 177S इंजन वास्तव में वर्तमान AL-41F1 इंजन परिवार की विश्वसनीय तकनीक और अगली पीढ़ी के अत्याधुनिक AL-51F1 (जिसे Izdeliye 30 भी कहा जाता है) इंजन के विकास के दौरान हासिल की गई तकनीकों का एक अत्यंत संतुलित मिश्रण है। इस इंजन को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य कम से कम लागत और समय में एक ऐसी आधुनिक डिजाइन और बेहतर कार्यक्षमता हासिल करना था जो पांचवीं पीढ़ी के विमानों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।

भारतीय दृष्टिकोण से इस रूसी प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों के बेड़े से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास सुखोई Su-30MKI विमानों की एक बहुत बड़ी संख्या मौजूद है जो भारतीय हवाई सुरक्षा की रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। इन विमानों में इस्तेमाल होने वाले AL-31FP इंजनों के समय पर रखरखाव, मरम्मत और भविष्य में उनके प्रतिस्थापन की आवश्यकता भारतीय वायुसेना के सामने हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। रूस अब इसी Product 177S इंजन को सुखोई बेड़े के संभावित अपग्रेड के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। यदि भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करने की दिशा में कदम बढ़ाता है, तो भारत में इसका स्थानीय उत्पादन और रूस द्वारा दी जाने वाली पूर्ण तकनीक हस्तांतरण की शर्तें इस सौदे का भविष्य तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगी।

परीक्षणों से जुड़े सवाल और भारतीय रणनीतिक मूल्यांकन की चुनौतियां

रूस ने इससे पहले भी एयरो इंडिया 2025 (Aero India 2025) के दौरान Su-30MKI के लिए नए इंजन के स्थानीय निर्माण और सहयोग की संभावनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण संकेत दिए थे। हालांकि, अब जब इस मुद्दे पर दोनों देशों के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के बीच सीधी बातचीत शुरू हो गई है, तो इस प्रस्ताव को एक बिल्कुल नया और बेहद गंभीर रणनीतिक आयाम मिल गया है। दूसरी ओर, अमेरिका भी भारत को लुभाने के लिए अपने पांचवीं पीढ़ी के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान F-35 को भारतीय वायुसेना को बेचने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। ऐसी स्थिति में रूस की यह आक्रामक डिफेंस डिप्लोमेसी अमेरिकी योजनाओं के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है और अमेरिकी F-35 को गोदामों में ही सीमित रहने पर मजबूर कर सकती है।

हालांकि, इस पूरे सौदे में Product 177 इंजन की विश्वसनीयता को लेकर अभी भी कुछ तकनीकी सवाल बने हुए हैं। इसका मुख्य कारण इस नए इंजन के बेहद सीमित उड़ान परीक्षण (फ्लाइट ट्रायल) होना है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 22 दिसंबर 2025 को ही Product 177 इंजन ने पहली बार Su-57 के एक परीक्षण लड़ाकू विमान पर अपनी पहली सफल उड़ान भरी थी। यह उड़ान इसके हवाई सत्यापन (एयरबोर्न वैलिडेशन) कार्यक्रम की महज शुरुआत है और इसे अभी पूरी तरह से प्रमाणित तथा परिपक्व इंजन नहीं कहा जा सकता।

ऐसी स्थिति में भारतीय रक्षा विशेषज्ञों और निर्णयकर्ताओं को Product 177S के इस आकर्षक प्रस्ताव का मूल्यांकन केवल Su-57 सौदे के संदर्भ में ही नहीं करना होगा, बल्कि इसके कई अन्य पहलुओं की भी बारीकी से जांच करनी होगी। भारत को इस इंजन की तकनीकी परिपक्वता, परीक्षणों के दौरान प्राप्त वास्तविक आंकड़ों, इसकी समग्र विश्वसनीयता, इसके संपूर्ण जीवनचक्र की लागत (लाइफसाइकल कॉस्ट), भविष्य में कलपुर्जों की निर्बाध आपूर्ति (स्पेयर सपोर्ट) और सबसे महत्वपूर्ण रूप से रूस द्वारा दी जाने वाली वास्तविक तकनीक हस्तांतरण की शर्तों पर गंभीरता से विचार करना होगा। विशेष रूप से भारतीय वायुसेना को यह सुनिश्चित करना होगा कि इसके निर्यात संस्करण Product 177S में रूस के अपने घरेलू उपयोग वाले संस्करण की तुलना में कोई बड़ी तकनीकी कटौती या सीमाएं तो नहीं लगाई गई हैं। इन सभी कसौटियों पर खरा उतरने के बाद ही भारत इस ऐतिहासिक सैन्य समझौते पर आगे बढ़ने का फैसला करेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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