भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का हाई-स्पीड ट्रायल सफल, 120 किलोमीटर की रफ्तार से भरी उड़ान भारत 2 महीने पहले 92
भारत में पर्यावरण अनुकूल परिवहन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने दिल्ली-जींद रूट पर अपना अंतिम हाई-स्पीड परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

दिल्ली-जींद ट्रैक पर हाइड्रोजन ट्रेन ने पकड़ी 120 की रफ्तार

भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में आज देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का अंतिम हाई-स्पीड परीक्षण संपन्न हुआ। यह परीक्षण दिल्ली और जींद के बीच के रेल खंड पर आयोजित किया गया था, जिसमें ट्रेन ने 120 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज गति से दौड़कर अपनी तकनीकी दक्षता साबित की। इस ट्रायल के दौरान ट्रेन की ब्रेकिंग प्रणाली, इंजन की कार्यक्षमता, ट्रैक पर दौड़ते समय उसकी स्थिरता और कंपन स्तर जैसे महत्वपूर्ण मानकों की बारीकी से जांच की गई। इसका मुख्य उद्देश्य परिचालन की तकनीकी क्षमता और सुरक्षा मानकों को परखना था।

ग्रीन टेक्नोलॉजी का अनूठा संगम

इस पूरी परीक्षण प्रक्रिया का संचालन और देखरेख Research Designs and Standards Organisation (RDSO) की तकनीकी टीम द्वारा की गई। यह हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह से हरित तकनीक पर आधारित है, जिसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह वायु और ध्वनि प्रदूषण नहीं फैलाती है। यह ट्रेन आधुनिक फ्यूल सेल तकनीक पर काम करती है। इस प्रक्रिया में किसी प्रकार के हानिकारक उत्सर्जन के बजाय केवल पानी और भाप निकलती है, जो पर्यावरण के लिहाज से पूरी तरह सुरक्षित है।

जींद से सोनीपत के बीच शुरू होगी सेवा

उन क्षेत्रों के लिए जहां रेलवे लाइनों पर ओवरहेड वायरिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां हाइड्रोजन ट्रेनें एक क्रांतिकारी विकल्प बनकर उभरी हैं। भारत की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन का परिचालन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच प्रस्तावित है। यह नीले रंग की ट्रेन अगले महीने से आम लोगों के लिए पटरियों पर दौड़ती दिखाई दे सकती है, बशर्ते सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हो जाएं। इससे पहले लो-स्पीड परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है, जिसके बाद अब इसे कमर्शियल यानी व्यावसायिक सेवाओं के लिए मंजूरी मिलने की राह आसान हो गई है।

हाइड्रोजन ट्रेन की प्रमुख विशेषताएं

  • यह ट्रेन न तो धुआं छोड़ती है और न ही किसी तरह का प्रदूषण उत्पन्न करती है।
  • यह पूरी तरह से अत्याधुनिक फ्यूल सेल तकनीक के सिद्धांत पर चलती है।
  • ट्रेन में इस्तेमाल होने वाली हाइड्रोजन गैस हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली पैदा करती है।
  • इसकी उत्सर्जन प्रक्रिया में केवल पानी और भाप का ही निकास होता है।
  • एक बार ईंधन भरने पर यह ट्रेन कई सौ किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम है।
  • देश की पहली सेवा जींद से सोनीपत के रूट पर संचालित की जाएगी।

जींद-सोनीपत सेक्शन के लिए विशेष मंजूरी

बीते 27 मई को भारतीय रेलवे ने नॉर्दर्न रेलवे के अंतर्गत आने वाले जींद-सोनीपत सेक्शन पर 10-कोच वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन को चलाने की आधिकारिक मंजूरी दे दी थी। रेल मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस ट्रेन में 1200 KW के हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम का उपयोग किया जाएगा और यह 75 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति से संचालित होगी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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