भारत-बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव के साये में रॉ चीफ की ढाका यात्रा, पर्दे के पीछे की कूटनीति के क्या हैं मायने? राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 2
भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के प्रमुख पराग जैन ने ढाका में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के रक्षा सलाहकार से मुलाकात की है, जो दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक तल्खी के बीच एक बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

ढाका में भारतीय खुफिया अधिकारियों की अहम मौजूदगी

भारत और बांग्लादेश के बीच इस समय कूटनीतिक रिश्तों में भारी तनाव का दौर चल रहा है, लेकिन इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी R&AW के प्रमुख पराग जैन ने ढाका का दौरा किया है। इस दौरान उन्होंने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के रक्षा मामलों के सलाहकार, सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर जनरल डॉ. एकेएम शम्सुल इस्लाम से मुलाकात की। यह मुलाकात तब हुई है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के मुद्दे को लेकर काफी खींचतान बनी हुई है।

सोमवार के दिन भारत की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के चार वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार के साथ लंबी बातचीत की। इस चार सदस्यीय भारतीय दल का नेतृत्व खुद रॉ के प्रमुख पराग जैन कर रहे थे। इस डेलिगेशन में अश्विन मुकुंद कोटनिस, राहुल नेगी और शैबल रॉय चौधरी जैसे अन्य अधिकारी भी शामिल थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा दल 9 अगस्त को दोपहर 2:56 बजे हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा था। इस दौरे को लेकर मिल रहे संकेतों से स्पष्ट है कि यह यात्रा बांग्लादेश की सैन्य खुफिया एजेंसी, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस यानी DGFI के विशेष आमंत्रण पर आयोजित की गई थी।

प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल था?

भारतीय प्रतिनिधिमंडल की संरचना काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पराग जैन के नेतृत्व में इस दल में तमिलनाडु कैडर के 2003 बैच के वरिष्ठ अधिकारी अश्विन मुकुंद कोटनिस भी थे, जो फिलहाल केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके साथ राहुल नेगी और शैबल रॉय चौधरी की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि यह दौरा पूरी तरह से आधिकारिक और सुरक्षा से जुड़ा हुआ था। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास में कमी देखी जा रही है और सुरक्षा मसलों पर संवाद की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

शेख हसीना के मुद्दे पर बढ़ा कूटनीतिक विवाद

भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूदा कड़वाहट के पीछे सबसे बड़ी वजह शेख हसीना हैं। कुछ समय पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने उस वक्त कड़ी नाराजगी जताई थी, जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत में रहते हुए पहली बार वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था। हालांकि, भारत सरकार ने इस कार्यक्रम से पूरी तरह दूरी बना ली थी और खुद को इससे अलग रखा था, लेकिन बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इस पर बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने शेख हसीना के खिलाफ बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें नरसंहार की दोषी तक करार दिया और उनके शासनकाल को माफिया जैसा तंत्र बताया।

इस मामले ने तूल तब पकड़ा जब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह कभी किसी का क्लाइंट स्टेट नहीं बनेगा और न ही फासीवाद के दौर में वापस लौटेगा। ज्ञात हो कि बांग्लादेश में 2024 के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के मामले में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में दोषी पाते हुए मौत की सजा सुनाई है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।

पर्दे के पीछे सुलह की कोशिशें

इन तमाम विवादों के बीच रॉ प्रमुख की यह मुलाकात इस बात का संकेत है कि दोनों देश पर्दे के पीछे से बातचीत का रास्ता तलाश रहे हैं। इससे पहले रविवार को भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मुलाकात की थी और अगले ही दिन उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से भी चर्चा की। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस कवायद का एक बड़ा मकसद 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में तारिक रहमान की भारत यात्रा के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है।

उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने मीडिया से बातचीत में तारिक रहमान की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह जनभावनाओं को समझने वाले नेता हैं। उन्होंने नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि शीर्ष नेतृत्व की मुलाकात से आपसी समस्याओं का समाधान निकल सकता है। अब सबकी निगाहें रॉ प्रमुख पराग जैन और DGFI के प्रमुख मेजर जनरल मोहम्मद कैसर राशिद चौधरी के बीच संभावित बैठक पर टिकी हैं।

सजीब वाजेद जॉय की चिंता और सीमा पर सुरक्षा चुनौतियां

इस बीच, शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय के हालिया बयानों ने भारत के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भारत के लिए चिंता का सबसे बड़ा विषय यह है कि बांग्लादेश पूर्वी सीमा पर दूसरा पाकिस्तान बनता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि हिज्ब-उत-तहरीर जैसे कट्टरपंथी संगठन वहां खुलेआम मार्च निकाल रहे हैं और अल-कायदा से जुड़े लोग सार्वजनिक रैलियों में खुले मंच से भाषण देने का दुस्साहस कर रहे हैं। इन दावों के बाद खुफिया अधिकारियों की यह ढाका यात्रा और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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