संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान की खोली पोल, ओसामा बिन लादेन का उदाहरण देकर आतंकवाद पर घेरा राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को कड़े शब्दों में घेरा है। भारत ने ओसामा बिन लादेन के एबटाबाद में छिपे होने का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकी दूर-दराज के इलाकों में नहीं बल्कि आबादी के बीच सुरक्षित पनाह पा रहे हैं।

आतंकवाद पर भारत की दो-टूक

संयुक्त राष्ट्र के मंच से भारत ने एक बार फिर आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को वैश्विक बिरादरी के सामने बेनकाब किया है। भारत ने साफ तौर पर कहा है कि आतंकवाद की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए केवल आतंकियों को निशाना बनाना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित ठिकाने और संरक्षण मुहैया कराने वाले नेटवर्क को भी पूरी तरह से ध्वस्त करना अनिवार्य है। भारत ने ओसामा बिन लादेन का उदाहरण देते हुए पाकिस्तान की पोल खोल दी है।

एबटाबाद की सच्चाई को याद दिलाया

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी बात रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि अल-कायदा के बड़े आतंकी किसी सुनसान गुफा या दूर-दराज के जंगलों में नहीं, बल्कि घनी आबादी वाले और सुरक्षित इलाकों में छिपे हुए मिले हैं। भारत ने 2011 में हुए अमेरिकी ऑपरेशन का हवाला दिया, जब ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद में एक रिहायशी परिसर में छिपा हुआ मिला था। भारत के प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि 9/11 हमले के मास्टरमाइंड और अल-कायदा के अन्य बड़े आतंकियों की गिरफ्तारी और खात्मा इस बात का पुख्ता सबूत है कि उन्हें राज्य प्रायोजित संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने कहा कि यह केवल एक इकलौता मामला नहीं था, बल्कि 9/11 के अन्य साजिशकर्ताओं को भी शहरी और रिहायशी क्षेत्रों से ही पकड़ा गया था।

लश्कर और जैश के लिए सुरक्षित माहौल

भारत ने बिना किसी देश का नाम लिए सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह का सुरक्षित वातावरण एक दौर में अल-कायदा के सरगनाओं को मिलता था, आज वही सुविधा लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों को मिल रही है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे आतंकवाद को मिलने वाली इस पनाह के खिलाफ एकजुट होकर कदम उठाएं। भारत का मानना है कि जब तक आतंक को पालने वाले नेटवर्क को संरक्षण मिलता रहेगा, तब तक दुनिया भर के परिवारों को अपनों को खोने का दर्द सहना पड़ेगा।

अफगानिस्तान को लेकर भारत की प्रतिबद्धता

UNSC यानी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अफगानिस्तान पर हुई बैठक में भारत ने अपनी मानवीय नीति को दोहराया है। भारत ने कहा कि अफगानिस्तान में शांति, स्थिरता और विकास भारत की पहली प्राथमिकता बनी हुई है। भारत ने बताया कि उसने अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में 500 से ज्यादा विकास परियोजनाओं के जरिए वहां के नागरिकों की मदद की है।

  • भारत ने स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 17 टन जरूरी दवाइयां और चिकित्सा उपकरण अफगानिस्तान भेजे हैं।
  • साल 2021 से अब तक भारत ने मानवीय आधार पर 50 हजार टन से अधिक गेहूं अफगानिस्तान को उपलब्ध कराया है।
  • इसी अवधि में भारत की ओर से 450 टन से अधिक दवाइयां और जीवन रक्षक वैक्सीन अफगानिस्तान पहुंचाई गई हैं।

भारत ने इस बात पर चिंता जताई कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए नहीं होना चाहिए। भारत ने कहा कि वहां के 4.8 करोड़ लोगों की मानवीय स्थिति को नजरअंदाज करना नामुमकिन है और देश के पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की निरंतर आवश्यकता है। भारत ने यह भी साफ किया कि आतंकवाद को समर्थन देने वाले नेटवर्क और उन्हें मिलने वाली पनाह के खिलाफ वैश्विक समुदाय को एक साझा रणनीति बनानी होगी ताकि अफगानिस्तान में स्थायी शांति सुनिश्चित हो सके।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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