भारत
4 घंटे पहले
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विचारों
चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी मोर्चा
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के दावों को लेकर देश का विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A अब पूरी तरह से आक्रामक हो गया है। राजधानी दिल्ली में आयोजित विपक्षी दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया कि चुनाव आयोग के कामकाज के विरोध में देशभर में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जाएगा। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित गठबंधन के तमाम शीर्ष नेता मौजूद थे, जिन्होंने संयुक्त रूप से लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए इस आंदोलन को जरूरी बताया है।
आंदोलन की रूपरेखा और प्रमुख कार्यक्रम
विपक्षी गठबंधन ने अपने विरोध प्रदर्शन को लेकर एक स्पष्ट समय-सारणी तैयार की है। इसके तहत आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा इस प्रकार रहेगी:
- 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर के बीच देश के विभिन्न जिलों में इंडिया गठबंधन की ओर से प्रदर्शन किए जाएंगे। इस दौरान जिलाधिकारी कार्यालयों के बाहर 'सेव डेमोक्रेसी' मार्च निकाला जाएगा।
- 6 अक्टूबर को विपक्ष के सभी सांसद दिल्ली में इकट्ठा होंगे और चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च निकालेंगे।
- अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेगा। इस दौरान उन्हें एक ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें मौजूदा सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को नियंत्रित करने के आरोपों का विस्तृत ब्यौरा दिया जाएगा।
- देश के अलग-अलग हिस्सों में पांच बड़ी रैलियां आयोजित की जाएंगी। इन रैलियों की श्रृंखला में 1 नवंबर को दिल्ली में एक विशाल रैली प्रस्तावित है। अन्य चार रैलियों के स्थानों की घोषणा बाद में की जाएगी।
मल्लिकार्जुन खरगे का हमला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। खरगे ने आरोप लगाया कि ये दोनों नेता चुनाव आयोग को अपनी 'कठपुतली' बनाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईवीएम (EVM) की जगह फिर से मतपत्र यानी बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि गठबंधन के सभी दल एकजुट होकर चुनावी धांधली और वोट चोरी जैसे गंभीर मुद्दों पर जनता के बीच जाएंगे।
राहुल गांधी का बड़ा भरोसा
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे सभी भारतीय संविधान के सामूहिक रक्षक हैं। राहुल ने विश्वास जताया कि आने वाले कुछ महीनों के भीतर देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने यह संकल्प लिया है कि लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली शक्तियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई जारी रहेगी। राहुल ने कहा कि लोकतंत्र किसी भी व्यक्ति से बड़ा होता है और युवा वर्ग भी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर मुखर है।
ममता बनर्जी की सख्त मांग
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तक कर डाली। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर 92 लाख वोटों की हेराफेरी की गई है और पूरे देश भर में यह आंकड़ा 13 करोड़ से भी अधिक हो सकता है। उन्होंने चुनावी सॉफ्टवेयर और ईवीएम की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए। हालांकि, चुनाव आयोग ने समय-समय पर अपने निर्णयों को कानूनी और नियमानुसार बताया है। ममता ने स्पष्ट किया कि यदि विपक्ष की मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस गठबंधन के घोषित कार्यक्रमों में पूरी तरह सक्रिय भागीदारी निभाएगी।
गठबंधन की स्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान कुछ प्रमुख दलों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही। इंडिया गठबंधन की इस अहम बैठक में आम आदमी पार्टी शामिल नहीं हुई, वहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी इस बैठक से दूर रहे। इन सबके बावजूद, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जैसे बड़े दलों ने संयुक्त आंदोलन का खाका खींचकर सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है। विपक्षी गठबंधन का पूरा जोर इस बात पर है कि संस्थाओं की स्वायत्तता बरकरार रहे और आगामी चुनावी प्रक्रिया में आम मतदाताओं का भरोसा कायम रहे। अब देखना यह होगा कि 2 अक्टूबर से शुरू होने वाला यह आंदोलन सरकार की नीतियों पर कितना प्रभाव डालता है।
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