पद्मश्री से सम्मानित 88 वर्षीय पूर्व आईपीएस इंदरजीत सिंह सिद्धू कौन हैं, जो अब झाड़ू योद्धा के नाम से मशहूर हैं? राष्ट्रीय राजनीति एक महीने पहले 68
पंजाब पुलिस के पूर्व डीआईजी इंदरजीत सिंह सिद्धू को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री से सम्मानित किया है। सेवानिवृत्ति के बाद समाज को स्वच्छ बनाने के उनके अनूठे प्रयासों के कारण उन्हें झाड़ू योद्धा के रूप में जाना जाता है।

राष्ट्रपति ने दिया सम्मान

मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म पुरस्कार प्रदान किए गए। इस दौरान 88 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी सरदार इंदरजीत सिंह सिद्धू को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री से सम्मानित किया। साधारण कुर्ते और पगड़ी में पहुंचे सिद्धू की सादगी और उनके निस्वार्थ सेवा भाव ने उपस्थित सभी लोगों का दिल जीत लिया।

कौन हैं इंदरजीत सिंह सिद्धू

6 जून 1938 को पंजाब के संगरूर जिले के गागरपुर गांव में जन्मे इंदरजीत सिंह सिद्धू एक अनुशासित व्यक्तित्व रहे हैं। उन्होंने अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की और युवावस्था में एक मुक्केबाज भी रहे। साल 1963 में पंजाब पुलिस में निरीक्षक के पद से अपना सफर शुरू करने वाले सिद्धू को वर्ष 1981 में आईपीएस में पदोन्नति मिली। उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान सांबा सेक्टर में अपनी सेवाएं दीं और पंजाब में आतंकवाद के चरम पर रहने के दौरान अमृतसर के सिटी एसपी के रूप में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे 31 दिसंबर 1996 को डीआईजी (सीआईडी) के पद से सेवानिवृत्त हुए।

झाड़ू योद्धा बनने का सफर

सेवानिवृत्ति के बाद आराम की जिंदगी चुनने के बजाय इंदरजीत सिंह सिद्धू ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को चुना। चंडीगढ़ के सेक्टर-49 में रहने वाले सिद्धू ने करीब 10-12 साल पहले अपने आसपास गंदगी देखकर खुद सफाई का जिम्मा उठाने का फैसला किया। लोग उन्हें सड़कों पर झाड़ू लगाते देख हैरान रह जाते थे, लेकिन वे अपने अभियान में अडिग रहे। उनकी इस पहल से प्रेरित होकर धीरे-धीरे पूरी सोसाइटी उनके साथ जुड़ गई।

हौसले के आगे चुनौतियां भी हारीं

अपने सेवा भाव को लेकर वे इतने समर्पित हैं कि एक बार सड़क दुर्घटना में गंभीर चोट लगने के बाद भी उन्होंने सफाई का काम नहीं छोड़ा। वे आज भी लाठी के सहारे सड़कों पर सफाई करते देखे जा सकते हैं। डिजिटल युग में भी वे मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करते हैं और लाइमलाइट से दूर रहते हैं। पद्मश्री मिलने की सूचना मिलने के बाद भी उन्होंने जश्न मनाने के बजाय अपनी दिनचर्या जारी रखी। उद्योगपति आनंद महिंद्रा भी उनके इस जज्बे की सराहना कर चुके हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप