ग्रीन कार्ड पर प्रतिबंध के फैसले से भड़का भारत, अमेरिका को दिया करारा जवाब, जेडी वेंस की 'बंधुआ मजदूर' वाली टिप्पणी पर जताई कड़ी आपत्ति राष्ट्रीय राजनीति 5 घंटे पहले 2
अमेरिका द्वारा आठ प्रमुख टेक कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े श्रम कार्यक्रम से निलंबित करने और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस की विवादित टिप्पणियों पर भारत सरकार ने तीखा विरोध दर्ज कराया है।

अमेरिका द्वारा भारतीय पेशेवरों और प्रमुख आईटी कंपनियों को निशाना बनाने वाले हालिया फैसलों पर भारत सरकार ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया है। वाशिंगटन के इस कदम पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे दोनों देशों के बीच के मजबूत रिश्तों और साझा महत्वाकांक्षाओं के विपरीत बताया है। इसके साथ ही, भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस की भारतीय पेशेवरों को लेकर की गई टिप्पणियों को बेहद अपमानजनक करार दिया है।

आठ बड़ी दिग्गज टेक कंपनियों पर अमेरिकी गाज

अमेरिकी श्रम विभाग ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लेते हुए आठ जानी-मानी टेक्नोलॉजी कंपनियों को अपने स्थायी श्रम प्रमाणन यानी PERM कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। जिन कंपनियों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है, उनमें वैश्विक स्तर की दिग्गज कंपनियां शामिल हैं:

  • टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)
  • इंफोसिस (Infosys)
  • विप्रो (Wipro)
  • एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies)
  • कॉग्निजेंट (Cognizant)
  • कैपजेमिनी (Capgemini)
  • माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft)
  • एडोब (Adobe)

अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने अमेरिकी एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स के प्रमुख और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के साथ मिलकर इस निलंबन की आधिकारिक घोषणा की। कीथ सोंडरलिंग के अनुसार, अब इन आठ कंपनियों से जुड़े किसी भी नए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा और पहले से लंबित पड़े आवेदनों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

H-1B वीजा और PERM निलंबन का गणित

इस बड़े प्रशासनिक फैसले के बाद भारतीय पेशेवरों के बीच उपजी चिंता को दूर करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि PERM कार्यक्रम और H-1B वीजा व्यवस्था दोनों अलग-अलग चीजें हैं। सरकार के अनुसार, PERM कार्यक्रम के निलंबन को H-1B वीजा व्यवस्था पर सीधे लागू होने वाली किसी कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

भारत ने स्पष्ट किया है कि इस निलंबन से वर्तमान में अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के H-1B वीजा की वैधता पर कोई सीधा और तत्काल खतरा नहीं है। इसके साथ ही वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति पर भी अपने आप कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, यह भी सच है कि जो पेशेवर अमेरिका में स्थायी रूप से बसने यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं या उसमें शामिल होने के योग्य हैं, उनके सामने आने वाले समय में बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

जेडी वेंस की आपत्तिजनक टिप्पणी पर भारत का कड़ा प्रहार

भारत ने सिर्फ निलंबन के फैसले पर ही नहीं, बल्कि इस कार्रवाई के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस द्वारा भारतीय पेशेवरों के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पर भी तीव्र आक्रोश व्यक्त किया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि वेंस की टिप्पणी अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उसके तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में उच्च शिक्षित और हुनरमंद भारतीय पेशेवरों के बेजोड़ योगदान को पूरी तरह से नजरअंदाज करती है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि अमेरिका का अपना इतिहास ही प्रवासियों की कई पीढ़ियों के अथक परिश्रम से लिखा गया है। इन प्रवासियों की कड़ी मेहनत, उनके उद्यम और उनके नवाचार ने ही अमेरिका को आज दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति और समृद्ध देश बनाया है। भारत ने वेंस द्वारा औपनिवेशिक काल और दर्दनाक ऐतिहासिक विरासतों की याद दिलाने वाले शब्दों के इस्तेमाल पर गहरी आपत्ति जताई और इसे बेहद आपत्तिजनक व अस्वीकार्य बताया। सरकार ने साफ किया है कि वह इन घटनाक्रमों पर बहुत बारीकी से नजर बनाए हुए है।

प्रतिभाओं की आवाजाही को रोकना दोनों देशों के लिए नुकसानदेह

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि कुशल और हुनरमंद पेशेवरों की मुक्त आवाजाही यानी टैलेंट मोबिलिटी दोनों ही देशों की अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ रही है। इस व्यवस्था से न केवल भारतीय पेशेवरों को वैश्विक मंच पर आगे बढ़ने के बेहतरीन अवसर मिलते हैं, बल्कि अमेरिकी कॉर्पोरेट जगत और वहां की टेक कंपनियों को भी विशिष्ट कौशल, रचनात्मकता, अनुसंधान क्षमता, उच्च उत्पादकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता हासिल होती है।

भारत सरकार ने उम्मीद जताई है कि अमेरिकी प्रशासन और वहां के नीति निर्माता इस द्विपक्षीय मोबिलिटी के महत्व को समझेंगे। मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से आगाह किया कि अमेरिका द्वारा उठाए गए इस तरह के कदम दोनों देशों की उस साझा महत्वाकांक्षा को आगे नहीं बढ़ाते हैं, जिसके तहत दोनों देश अपनी रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नए शिखर पर ले जाना चाहते हैं।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप