बची हुई दाल से बनाएं ढाबे जैसा क्रिस्पी पराठा, स्वाद में लाजवाब और बनाने में बेहद आसान जीवनशैली एक महीने पहले 49
घर में दाल बच जाने पर उसे फेंकने की जरूरत नहीं है। आप इस बची हुई दाल से झटपट चटपटा और स्वादिष्ट पराठा तैयार कर सकते हैं जो नाश्ते के लिए एक बेहतरीन विकल्प है।

दाल पराठा बनाने की आसान विधि

अक्सर घरों में खाना बनाने के दौरान दाल बच जाती है। कई बार हम इसे फेंक देते हैं, लेकिन आप इसका इस्तेमाल करके सुबह के नाश्ते के लिए बेहतरीन पराठे बना सकते हैं। ये पराठे न केवल कुरकुरे बनते हैं, बल्कि इनका स्वाद ढाबे के पराठों को भी टक्कर देता है। इन्हें बनाना बहुत ही सरल है।

सामग्री और तैयारी

पहला स्टेप: सबसे पहले एक बर्तन में 2 कप गेहूं का आटा लें। इसमें आधा चम्मच अजवाइन, स्वादानुसार नमक, 1 इंच बारीक कटा हुआ अदरक, 1 कटी हुई हरी मिर्च, एक चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर और 1 चम्मच कसूरी मेथी मिलाएं। अब इसमें बची हुई दाल डालकर आटा गूंथ लें। यदि दाल कम हो तो जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी मिलाएं और एक नरम आटा तैयार कर लें। अंत में 1 छोटी चम्मच घी डालकर मिलाएं और आटे को 10 मिनट के लिए ढककर छोड़ दें।

मसालेदार ट्विस्ट

दूसरा स्टेप: पराठों को खास बनाने के लिए एक सूखा मसाला तैयार करें। इसमें 1 चम्मच ताजी कुटी हुई काली मिर्च, 1 चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च, 1 चम्मच चिली फ्लेक्स, 1 चम्मच चाट मसाला, 1 चम्मच भुना जीरा पाउडर, 1 चम्मच ऑल परपज सीजनिंग और आधा चम्मच नमक को अच्छी तरह मिला लें। साथ ही खूब सारा ताजा हरा धनिया बारीक काटकर रख लें।

पराठा बेलने की तकनीक

तीसरा स्टेप: सेट हुए आटे की लोई तोड़कर उसे रोटी की तरह बेल लें। अब इसके ऊपर छन्नी की सहायता से थोड़ा सूखा आटा छिड़कें और तैयार किया हुआ मसाला समान रूप से फैला दें। ऊपर से कटा हुआ हरा धनिया डालें। इसे लच्छा पराठे की तरह या पंखे की तरह फोल्ड करते हुए वापस लोई बना लें। अब इस लोई पर थोड़े सफेद तिल लगाकर इसे हल्के हाथों से बेल लें।

सेंकने की प्रक्रिया

चौथा स्टेप: तवे या पैन को गरम करें और बेले हुए पराठे को उस पर डाल दें। पराठे के दोनों तरफ घी लगाकर इसे अच्छी तरह सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंकें। आप इन पराठों का आनंद दही, अचार, हरी चटनी या गर्म चाय के साथ ले सकते हैं।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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