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एक घंटा पहले
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मिडिल ईस्ट में भारतीय नागरिकों पर संकट
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनातनी भरे माहौल ने पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है। इस संवेदनशील मसले पर गुरुवार को केंद्र सरकार ने संसद को जानकारी दी कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण 10 नाविकों सहित कुल 16 भारतीयों की मौत हो चुकी है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास द्वारा पूछे गए एक लिखित सवाल का जवाब देते हुए ये आंकड़े साझा किए। सरकार से इस क्षेत्र में संघर्ष के चलते मारे गए, घायल हुए या प्रभावित हुए भारतीय नाविकों और नागरिकों की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी।
रास लाफ़ान गैस फैसिलिटी का हादसा
मंत्री ने स्पष्ट किया कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष की शुरुआत के बाद से 10 नाविकों समेत 16 भारतीय नागरिकों की जान गई है और 75 भारतीय घायल हुए हैं। उन्होंने एक और महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि इन हमलों से अलग कतर में स्थित रास लाफ़ान गैस फैसिलिटी में हुई एक अन्य दुर्घटना में 12 भारतीयों की मौत हो गई थी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत सरकार ने संबंधित देशों के प्रशासन के साथ मिलकर शोक संतप्त परिवारों को शव भारत लाने में हर संभव तकनीकी और प्रशासनिक सहायता प्रदान की है। घायल हुए भारतीयों का उपचार स्थानीय चिकित्सा केंद्रों और अस्पतालों में कराया गया है।
मुआवजा और सहायता
सरकार की ओर से बताया गया कि संबंधित भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास स्थानीय अधिकारियों के निरंतर संपर्क में रहे हैं। पीड़ितों के परिवारों से संपर्क साधना, यात्रा संबंधी जानकारी देना और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने में मिशनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। युद्ध प्रभावित मामलों में DGMA कल्याण योजना के तहत 10 लाख रुपये का एक्स-ग्रेशिया मुआवजा देने का प्रावधान है। सभी आवश्यक जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद यह राशि पीड़ित नाविकों के परिवारों को जारी की जाती है।
मृतकों और घायलों का देशवार विवरण
विभिन्न देशों में हुई मौतों और घायलों की संख्या का ब्योरा इस प्रकार है:
मृतकों की सूची:
- सऊदी अरब: 1
- कुवैत: 2
- ओमान: 8
- इराक: 1
- यूएई: 4
घायलों की सूची:
- यूएई: 32
- ओमान: 24
- कतर: 4
- कुवैत: 13
- सऊदी अरब: 1
- इजरायल: 1
ईरान में भारतीय नागरिकों की स्थिति
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि फरवरी 2026 में तनाव बढ़ने के बाद से तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 2,557 भारतीय नागरिकों को ईरान से आर्मेनिया या अज़रबैजान के रास्ते स्वदेश लौटने में मदद की है। वर्तमान अनुमान के अनुसार, ईरान में अभी भी लगभग 7,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जिनमें धार्मिक शिक्षा ले रहे छात्र, मेडिकल छात्र, कर्मचारी, नाविक और मछुआरे शामिल हैं। सरकार ने उन मेडिकल छात्रों की समस्याओं को भी ईरानी अधिकारियों के समक्ष प्रमुखता से उठाया है, जिन्हें संघर्ष के चलते अपनी पढ़ाई छोड़कर भारत वापस आना पड़ा था। इन छात्रों के भविष्य और स्थिति को सुधारने के विकल्पों पर सरकार विचार कर रही है।
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