क्राइम
4 घंटे पहले
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अमेरिका में बैठे गैंगस्टर के खिलाफ दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई
अमेरिका में बैठकर अपने आपराधिक नेटवर्क को संचालित करने वाले कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ के गुर्गों पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने करारी चोट की है। पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट ने एक गुप्त सूचना के आधार पर राजस्थान के कोटा में घेराबंदी करते हुए गैंग के चार शातिर सदस्यों को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। पकड़े गए बदमाशों में वे शूटर भी शामिल हैं, जो दिल्ली और आसपास के राज्यों में हुई कई बड़ी हत्याओं और फायरिंग की घटनाओं के मुख्य आरोपी हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और भूमिका
स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों की पहचान रमन उर्फ फौजी, करण, शेखर तिवारी और विनोद तिवारी के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, शेखर और विनोद सगे भाई हैं। इस पूरे गैंग में रमन और करण की भूमिका मुख्य शूटर्स की रही है, जबकि शेखर और विनोद उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने और गैंग के अवैध पैसों के लेन-देन को मैनेज करने का काम करते थे। ये दोनों भाई गैंग के पैसों को अलग-अलग बैंक खातों और अन्य माध्यमों से इधर-उधर करने का काम बखूबी निभा रहे थे, जिससे पुलिस की निगरानी से बचा जा सके।
आया नगर हत्याकांड: बरसी थीं 70 से ज्यादा गोलियां
रमन और करण की गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि ये दोनों दिल्ली के आया नगर में हुए डेयरी कारोबारी रतन लोहिया हत्याकांड के मुख्य शूटर थे। यह वीभत्स वारदात 30 नवंबर 2025 को अंजाम दी गई थी। सुबह के समय जब 52 वर्षीय रतन लोहिया अपनी डेयरी की तरफ जा रहे थे, तब हमलावरों ने उन पर अचानक हमला कर दिया। जांच में सामने आया कि हमलावरों ने इस हत्या को अंजाम देने के लिए 70 से अधिक राउंड गोलियां चलाई थीं, जिनमें से करीब 69 गोलियां लोहिया के शरीर में लगी थीं। इस हत्याकांड के बाद से ही ये दोनों शूटर फरार चल रहे थे और पुलिस को इनकी सरगर्मी से तलाश थी।
मोहित डागर हत्याकांड में भी हाथ
स्पेशल सेल की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि रमन और करण 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के मोहन गार्डन-द्वारका मोड़ इलाके में हुए मोहित डागर हत्याकांड में भी सीधे तौर पर शामिल थे। 25 वर्षीय मोहित डागर की हत्या के समय तीन हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए थे और उन्होंने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं। इस वारदात की जिम्मेदारी लेने के साथ ही हिमांशु भाऊ गैंग ने अपनी दहशत फैलाने की कोशिश की थी। पुलिस तफ्तीश में यह पुष्टि हुई थी कि उस हत्या को अंजाम देने वाले असल शूटर रमन और करण ही थे।
रोहतक, बुलंदशहर और पलवल में भी मचाया था आतंक
रमन और करण का आपराधिक इतिहास केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्होंने हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी कई वारदातों को अंजाम दिया है। दिसंबर 2025 में हरियाणा के रोहतक जिले के रिटोली गांव में हुई फायरिंग की घटना में भी दोनों आरोपी नामजद थे। इस हमले का मुख्य निशाना हिमांशु भाऊ का विरोधी सनी रिटोली था। इस दौरान हुई अंधाधुंध गोलीबारी में एक व्यक्ति की जान चली गई थी और चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
इसके बाद मई 2026 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के ककोड़ इलाके में हुई फायरिंग के मामले में भी पुलिस को इनकी तलाश थी। यहाँ उन्होंने गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया के विरोधी जितेंद्र उर्फ जीतू को अपना निशाना बनाने के लिए गोलियां चलाई थीं। इससे पहले दिसंबर 2024 में हरियाणा के पलवल जिले के महेशपुर गांव में एक सरपंच पर भी करण ने ऑटोमैटिक कार्बाइन से घातक हमला किया था। रमन उर्फ फौजी के खिलाफ दिल्ली क्राइम ब्रांच में आर्म्स एक्ट का भी मामला दर्ज है और वह लंबे समय से फरार चल रहा था। साथ ही, मई 2024 में रेवाड़ी के कुतुबपुर मोहल्ले में शेखर राव के घर पर हुई फायरिंग में भी इन दोनों की संलिप्तता सामने आई थी।
मनी म्यूल नेटवर्क का हिस्सा थे शेखर और विनोद
गिरफ्तार किए गए शेखर तिवारी और विनोद तिवारी की भूमिका पर पुलिस विशेष ध्यान दे रही है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन इलाके के जिखान गांव के रहने वाले ये दोनों भाई गैंग के लिए पैसों के नेटवर्क को संभालने का काम करते थे। पुलिस इन्हें 'मनी म्यूल' नेटवर्क के तौर पर देख रही है, जो अवैध धन को सुरक्षित खातों के जरिए इधर-उधर करने के माहिर थे। इनकी गिरफ्तारी से गैंग के वित्तीय स्रोतों और फंडिंग के रास्तों के बारे में महत्वपूर्ण खुलासे होने की उम्मीद है। फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर उनके अन्य सहयोगियों और हिमांशु भाऊ के साथ उनके संपर्कों की गहरी छानबीन कर रही है।
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