हल्दी-अदरक की खेती पर मोटा अनुदान, किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए सरकार की खास पहल छत्तीसगढ़ एक महीने पहले 23
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में उद्यानिकी विभाग हल्दी और अदरक की खेती पर भारी सब्सिडी दे रहा है, जिससे किसान प्रति एकड़ 60 से 80 हजार रुपये तक की शुद्ध आय कमा सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के किसानों के लिए हल्दी और अदरक की खेती आमदनी बढ़ाने का बेहतरीन जरिया बनकर सामने आ रही है। उद्यानिकी विभाग इन दोनों मसाला फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आकर्षक अनुदान दे रहा है। विभाग का कहना है कि पारंपरिक फसलों के मुकाबले इनमें जोखिम कम और मुनाफा कहीं अधिक है। एक बड़ा फायदा यह भी है कि बंदरों और आवारा मवेशियों से इन फसलों को होने वाले नुकसान की आशंका तुलनात्मक रूप से काफी कम रहती है।

राज्य पोषित योजना के तहत मिल रही सब्सिडी

बालोद जिले के आरएचईओ अनिल कुमार महिलांग ने लोकल 18 को बताया कि छत्तीसगढ़ शासन की राज्य पोषित योजना के अंतर्गत किसानों को हल्दी और अदरक की खेती पर सब्सिडी दी जा रही है। हल्दी की खेती करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 47 हजार रुपये तक का अनुदान मिलता है। इस राशि में बीज, खाद और दवा जैसी जरूरी कृषि सामग्री पर सहायता भी शामिल है।

छायादार जमीन और इंटरक्रॉपिंग के लिए उपयुक्त

उन्होंने बताया कि हल्दी की खेती छायादार इलाकों में आसानी से की जा सकती है। किसान इसे घर की बाड़ी, खेतों की मेड़ या आम के बगीचों में इंटरक्रॉपिंग के तौर पर भी लगा सकते हैं। इससे एक ही जमीन से अतिरिक्त आमदनी कमाने का मौका मिलता है।

अदरक की खेती पर भी ठीक-ठाक अनुदान

वहीं, अदरक की खेती के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर 49,800 रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। अदरक की पैदावार खासतौर पर कछारी भूमि और नदी किनारे की उपजाऊ जमीन में बेहतर होती है। विभाग किसानों को उन्नत किस्मों के बीज लगाने के लिए भी प्रेरित कर रहा है, ताकि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में बढ़ोतरी हो सके।

बढ़ती मांग और बेहतर बाजार भाव

आरएचईओ अनिल कुमार महिलांग के मुताबिक, बालोद जिले के किसान हल्दी और अदरक की खेती से प्रति एकड़ 60 हजार से 80 हजार रुपये तक की शुद्ध आय हासिल कर सकते हैं। बढ़ती मांग और बेहतर बाजार मूल्य के चलते ये दोनों मसाला फसलें किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही हैं।

इच्छुक किसान विभागीय कार्यालय से संपर्क कर योजना की पूरी जानकारी ले सकते हैं और तय प्रक्रिया के तहत अनुदान का लाभ उठा सकते हैं। ऐसे में पारंपरिक खेती के साथ-साथ हल्दी और अदरक का उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने का असरदार माध्यम बन सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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