जीवनशैली
2 घंटे पहले
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तनाव और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल
बिहार के बेगूसराय में भरत तिवारी नामक युवक के एनकाउंटर के बाद से ही पुलिस की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बहस तेज हो गई है। आम जनता से लेकर विशेषज्ञों तक अब यह पूछ रहे हैं कि क्या पुलिस सिस्टम में भारी दबाव और तनाव के कारण अधिकारी और जवान गलत फैसले लेने पर मजबूर हो रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पुलिस के व्यवहार से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद सिस्टम में सुधार की मांग उठ रही है।
21वीं सदी में पुलिस पर सबसे अधिक दबाव
दुनिया भर में मनोविज्ञान के क्षेत्र में काम कर चुके और 150 देशों में व्याख्यान दे चुके मनोवैज्ञानिक आर शंकर का मानना है कि 21वीं सदी में पुलिस सबसे अधिक दबाव वाले विभागों में से एक है। उन्होंने बताया कि समाज में किसी भी तरह की समस्या होने पर पहली प्रतिक्रिया पुलिस की ही होती है। पुलिसकर्मी भी आखिरकार इंसान हैं, जिनका अपना परिवार और सामाजिक जीवन होता है। काम के भारी बोझ और लगातार तनाव के कारण कई बार वे ऐसे कदम उठा लेते हैं, जिसका उन्हें बाद में मलाल होता है।
नींद की कमी और मानसिक स्वास्थ्य का असर
मनोवैज्ञानिक आर शंकर ने स्पष्ट किया है कि पुलिसकर्मियों को समय पर छुट्टियां न मिलना और परिवार से दूरी उनके मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकती है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त नींद न लेने का असर सीधे तौर पर मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर पड़ता है। इससे किसी भी व्यक्ति की याददाश्त, सही निर्णय लेने की क्षमता और व्यवहार पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने फ्रस्ट्रेशन और डिप्रेशन के बीच का अंतर समझाते हुए बताया कि जब वास्तविकता और अपेक्षाओं में बड़ा अंतर होता है, तो व्यक्ति फ्रस्ट्रेशन का शिकार हो जाता है, जो आगे चलकर डिप्रेशन का रूप ले सकता है।
समाधान के लिए जरूरी कदम
इंजीनियर आर शंकर ने पुलिस महकमे के लिए कुछ प्रभावी सुझाव दिए हैं:
- पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य की नियमित जांच होनी चाहिए।
- तनावग्रस्त पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनकी समय पर काउंसलिंग कराई जानी चाहिए।
- सिर्फ योग या दौड़ को स्ट्रेस मैनेजमेंट न मानकर, तनाव की जड़ को समझने की जरूरत है।
- पश्चिमी देशों की तर्ज पर भारत में भी पुलिस व्यवस्था में मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण को अनिवार्य करना चाहिए।
- कर्मियों को पर्याप्त आराम, पूरी नींद और परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलना चाहिए।
आर शंकर के अनुसार, यदि पुलिस व्यवस्था में स्ट्रेस मैनेजमेंट की एक वैज्ञानिक और प्रभावी प्रणाली विकसित की जाए, तो न केवल पुलिस का कामकाज बेहतर होगा, बल्कि वे अधिक प्रभावी ढंग से समाज की सेवा कर सकेंगे।
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