मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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भोपाल का ईरानी डेरा और इंटरनेशनल कनेक्शन
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मोबाइल झपटमारी के मामलों ने एक बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। अयोध्या नगर पुलिस की एक बड़ी कार्रवाई में सामने आया है कि शहर की सड़कों से लूटे जाने वाले मोबाइल फोन एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का हिस्सा बन रहे हैं। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे 22 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, लेकिन जांच में जो सच सामने आया है, वह हैरान करने वाला है। भोपाल की अमन कॉलोनी स्थित कुख्यात ईरानी डेरे से संचालित यह गिरोह लूटे गए मोबाइलों को मुंबई के रास्ते सीधे बांग्लादेश भेज रहा था।
किस तरह काम करता था मोबाइल तस्करी का रूट
पुलिस पूछताछ में गिरोह के सदस्यों ने बताया कि लूटे गए फोन को एक व्यवस्थित तरीके से दूसरे राज्यों और देशों में भेजा जाता था। इस पूरी प्रक्रिया के मुख्य चरण इस प्रकार थे:
- भोपाल की विभिन्न इलाकों जैसे सेवनिया, गोविंदपुरा, पिपलानी और अयोध्या नगर से मोबाइल झपटे जाते थे।
- लूटे गए फोन को कूरियर और अपने गुर्गों के जरिए मुंबई भेजा जाता था।
- मुंबई के चोर बाजारों में इन फोन के IMEI नंबर को टेंपर या फ्लैश कर दिया जाता था, ताकि उन्हें ट्रेस करना असंभव हो जाए।
- कीमती और प्रीमियम फोन को पार्ट्स में अलग कर दिया जाता था, जिनके स्क्रीन, कैमरे और मदरबोर्ड ऊंचे दामों पर बेच दिए जाते थे।
- सही हालत में मौजूद फोन को समुद्री और जमीनी रास्तों से अवैध रूप से बांग्लादेश की सीमा के पार तस्करी कर दिया जाता था।
सबदर ईरानी है गिरोह का मास्टरमाइंड
अयोध्या नगर थाना प्रभारी महेश लिल्हारे के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का सरगना सबदर ईरानी है। पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि सबदर लूटे गए मोबाइल को तीन से चार हजार रुपये में खरीदता था। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अनिल शर्मा ने चिंता जाहिर की है कि IMEI नंबर बदलने के कारण इन फोन का उपयोग आपराधिक या अनैतिक गतिविधियों में होने की पूरी आशंका बनी रहती है।
लगातार हो रही है कार्रवाई
यह कोई पहली बार नहीं है जब ईरानी डेरा जांच एजेंसियों के रडार पर आया है। ठीक 6 महीने पहले भी पुलिस ने वहां बड़ी कार्रवाई करते हुए 32 आरोपियों को दबोचा था और 51 मोबाइल फोन बरामद किए थे। हालांकि, जेल जाने के बाद भी यह सिंडिकेट सक्रिय बना हुआ है। अब पुलिस का मुख्य लक्ष्य सबदर ईरानी को पकड़ना है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े मुंबई के बड़े खरीदारों और बांग्लादेश की सीमा पर सक्रिय तस्करों की पूरी कड़ियों को नष्ट किया जा सके।
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