जीवनशैली
एक दिन पहले
12
विचारों
सड़क हादसे ने छीन ली थी हाथ की सक्रियता
पटना के रहने वाले एक 21 वर्षीय युवक के लिए एक सड़क हादसा किसी बड़ी आपदा से कम नहीं था। इस दुर्घटना में युवक को कई गंभीर चोटें आईं, जिसमें उसका दाहिना घुटना भी बुरी तरह फ्रैक्चर हो गया था। हालांकि घुटने की चोट तो समय रहते प्लास्टर और आराम के जरिए ठीक हो गई, लेकिन इस हादसे का सबसे बुरा असर उसके दाहिने हाथ पर पड़ा। चोट इतनी गंभीर थी कि उसका हाथ पूरी तरह से बेजान हो गया। जिस हाथ का इस्तेमाल वह अपने दिनभर के 90 फीसदी कामों के लिए करता था, वह अचानक पूरी तरह निष्क्रिय हो गया। हाथ के हिलने-डुलने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो गई थी और युवक पिछले 3 साल से इस दर्दनाक स्थिति से जूझ रहा था।
फोर्ड अस्पताल में मिली नई उम्मीद
करीब 3 साल तक लाचारी का जीवन जीने के बाद युवक को फोर्ड हॉस्पिटल, पटना के रूप में एक उम्मीद की किरण दिखाई दी। अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में ऑर्थोपेडिक सर्जन एवं हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विनीत विवेक ने मरीज की स्थिति का गहनता से परीक्षण किया। जांच में पता चला कि हादसे के वक्त युवक की ब्रैकियल प्लेक्सस नर्व में गंभीर चोट आई थी। यह नसों का वह जाल है जो हमारे हाथ की गतिविधियों को नियंत्रित करता है। चोट के कारण नसों का यह नेटवर्क इस कदर क्षतिग्रस्त हो गया था कि हाथ का मस्तिष्क के साथ सीधा संपर्क ही पूरी तरह कट गया था।
जटिल सर्जरी और रिकवरी का सफर
डॉ. विनीत विवेक ने युवक की स्थिति को समझते हुए तुरंत सर्जरी की सलाह दी। इस उपचार प्रक्रिया में न केवल उसके पुराने घुटने के फ्रैक्चर को ठीक करने के लिए ऑपरेशन किया गया, बल्कि हाथ की जटिल स्थिति का इलाज भी शुरू किया गया। लगभग 3 साल की पीड़ा के बाद हुई इस सर्जरी ने चमत्कारिक परिणाम दिखाए। डॉक्टरों ने सर्जरी के बाद मरीज को नियमित फिजियोथेरेपी सत्रों के लिए निर्देशित किया। इन सत्रों और उचित चिकित्सा के मेल ने मरीज के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार किया।
अब 90 फीसदी तक कार्य करने में सक्षम
वर्तमान स्थिति की बात करें तो युवक का हाथ अब फिर से काम कर रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि अब तक मरीज में 90 प्रतिशत रिकवरी दर्ज की गई है और वह अपने दैनिक जीवन के कामकाज सामान्य रूप से करने लगा है। डॉ. विनीत विवेक के अनुसार, ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी का उपचार काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इसमें हाथ को नियंत्रित करने वाली तंत्रिकाओं का समूह बुरी तरह से प्रभावित होता है, जिससे हाथ में कमजोरी या पूरी तरह से गतिहीनता आ जाती है।
विशेषज्ञों की राय
डॉक्टरों का मानना है कि ऐसे मामलों में समय पर सटीक जांच, कुशल सर्जरी और लगातार फिजियोथेरेपी ही एकमात्र रास्ता है। इस मामले में भी सही समय पर की गई विशेषज्ञ चिकित्सा और फिजियोथेरेपी का ही परिणाम है कि मरीज आज फिर से अपने हाथों का इस्तेमाल करने में सक्षम है। यह सफलता साबित करती है कि जटिल से जटिल नसों की चोटों का भी सही इलाज संभव है, बशर्ते मरीज को सही मार्गदर्शन और समय पर उपचार मिले।
Comments
0 comment