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एक घंटा पहले
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कैंसर के प्रति नजरिया और चिकित्सा जगत में बदलाव
आज के दौर में कैंसर का नाम सुनना किसी भी व्यक्ति के लिए डरावना हो सकता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी के प्रति डर के बजाय जागरूकता की जरूरत है। पिछले 10 से 15 सालों में कैंसर के उपचार की दिशा में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के व्यापक कैंसर देखभाल विभाग के कार्यक्रम प्रमुख और विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत मेहता का कहना है कि अब यह अनिवार्य नहीं है कि हर मरीज को कीमोथेरेपी से ही गुजरना पड़े। आज चिकित्सा विज्ञान इतना विकसित हो चुका है कि कैंसर के प्रकार, उसकी अवस्था और मरीज के शारीरिक स्वास्थ्य के आधार पर इलाज की पद्धति तय की जाती है।
जागरूकता से बढ़ता इलाज पर भरोसा
डॉ. प्रशांत मेहता के अनुसार, लगभग 15 वर्ष पहले तक समाज में कैंसर को लेकर व्याप्त भय बहुत अधिक था। कई बार मरीज बीमारी का पता चलने पर ही मानसिक रूप से हार मान लेते थे और उपचार शुरू होने से पूर्व ही उम्मीद खो देते थे। हालांकि, समय के साथ चीजें बदली हैं। लोगों में अब कैंसर को लेकर बेहतर समझ विकसित हुई है और वे यह जानने लगे हैं कि इस बीमारी का इलाज संभव है। कई मामलों में तो सही समय पर उपचार मिलने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर एक सामान्य जीवन व्यतीत करने में सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त, कैंसर से जुड़ी पुरानी भ्रांतियां और अंधविश्वास भी धीरे-धीरे कम हो रहे हैं, जिससे मरीजों का चिकित्सा प्रणाली पर भरोसा बढ़ा है।
आधुनिक थेरेपी: इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी
बीते एक-डेढ़ दशक में कैंसर के उपचार में दो सबसे प्रमुख तकनीकी बदलाव देखे गए हैं। पहला है इम्यूनोथेरेपी, जिसमें मरीज के अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को ही सक्रिय करके कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है। दूसरा क्रांतिकारी बदलाव टार्गेटेड थेरेपी के रूप में आया है। कैंसर कोशिकाओं के भीतर कुछ ऐसे विशिष्ट आनुवंशिक बदलाव होते हैं जो उनकी वृद्धि और प्रसार का कारण बनते हैं। अब चिकित्सा जगत में ऐसी औषधियां उपलब्ध हैं जो सीधे इन विशिष्ट बदलावों को निशाना बनाती हैं, जिससे स्वस्थ कोशिकाओं को कम से कम नुकसान पहुंचता है और उपचार अधिक सटीक हो जाता है। इन तकनीकों ने उन मरीजों के लिए भी नई उम्मीदें जगाई हैं जो पारंपरिक इलाज के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे।
क्या हर मरीज के लिए कीमोथेरेपी अनिवार्य है?
विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि यह सोचना गलत है कि कैंसर का उपचार केवल कीमोथेरेपी ही है। कैंसर के प्रबंधन में कई प्रकार की सिस्टम थेरेपी का प्रयोग किया जाता है। उपचार की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि कैंसर की प्रकृति क्या है। कुछ रोगियों को सर्जरी से पहले या बाद में दवाओं की आवश्यकता पड़ती है, जबकि एडवांस स्टेज के मरीजों के लिए उपचार की योजना पूरी तरह भिन्न होती है। हर मरीज की बीमारी का प्रोफाइल अलग होता है, इसलिए यह अनिवार्य नहीं है कि सभी को एक ही प्रक्रिया से गुजरना पड़े। डॉ. मेहता सलाह देते हैं कि मरीज को किसी अन्य व्यक्ति के उपचार के साथ अपने इलाज की तुलना करने से बचना चाहिए।
फेफड़ों और ब्लड कैंसर के उपचार में बड़ी सफलता
विगत कुछ वर्षों में लंग कैंसर यानी फेफड़ों के कैंसर के उपचार में बड़े सुधार देखे गए हैं। खासकर स्टेज 4 के लंग कैंसर के मामले में इम्यूनोथेरेपी एक वरदान साबित हुई है, जिसने मरीजों के जीवन प्रत्याशा को काफी बढ़ा दिया है। इसी तरह ब्लड कैंसर, ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे रोगों के इलाज में भी टार्गेटेड दवाओं ने नई क्रांति ला दी है। जिन प्रकार के कैंसर में पहले विकल्प बहुत सीमित हुआ करते थे, उनमें भी अब काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं, जिससे मरीजों के लंबे समय तक जीवित रहने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
हर कैंसर की स्थिति है अलग
कैंसर के बारे में सबसे बड़ा मिथक यह है कि यह एक ही बीमारी है। वास्तव में कैंसर कई अलग-अलग प्रकार की बीमारियों का एक समूह है। प्रत्येक कैंसर का जैविक व्यवहार अलग होता है और उसे ठीक करने के लिए बनाई गई रणनीति भी अलग होती है। अक्सर लोग अपने पड़ोसी या रिश्तेदार के उपचार को देखकर वही प्रक्रिया अपनाने की जिद करते हैं, जो कि उचित नहीं है। मरीज के कैंसर का प्रकार, उसकी स्टेज और उनकी कुल शारीरिक स्थिति का गहन विश्लेषण करने के बाद ही डॉक्टर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचते हैं। अंततः, दूसरे मरीजों के अनुभवों को आधार मानने के बजाय चिकित्सा विशेषज्ञ द्वारा दी गई सलाह और उपचार योजना पर ही भरोसा करना सबसे बुद्धिमानी भरा निर्णय होता है।
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