हरियाणा
एक घंटा पहले
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हरियाणा में गंदगी का अंबार
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल ने राज्य की स्थिति को गंभीर बना दिया है। आज शनिवार को इस हड़ताल का 31वां दिन है और पिछले 30 दिनों से जारी इस विरोध प्रदर्शन के कारण रिहायशी इलाकों और बाजारों में कचरे के पहाड़ खड़े हो गए हैं। सड़कों के किनारे और खाली पड़े भूखंडों पर जमा कूड़ा अब लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है, जिससे उठने वाली बदबू के बीच आम नागरिकों का जीना दूभर हो गया है। पूरे राज्य में सफाई का तंत्र बुरी तरह विफल दिखाई दे रहा है और सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद समाधान निकलता नहीं दिख रहा है।
काम पर क्यों नहीं लौट रहे कर्मचारी?
सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उनकी हड़ताल केवल कचरा उठाने के कार्य को रोकने तक सीमित नहीं है। वे अपनी कार्य स्थितियों, समय पर वेतन न मिलने और लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी को लेकर सरकार से बेहद नाराज हैं। हड़ताली कर्मचारियों का मुख्य आरोप यह है कि सरकार जनता को गुमराह कर रही है और हड़ताल को लेकर अलग-अलग मंचों पर विरोधाभासी आंकड़े पेश कर रही है। हालांकि राज्य सरकार की ओर से लगातार बातचीत के प्रयास जारी हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी कर्मचारी अपनी मांगों पर पूरी तरह अड़े हुए हैं।
कॉन्ट्रैक्ट वर्करों की स्थिति
हड़ताल के बीच कुछ ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी भी काम पर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है। सेक्टर-54 की सनसिटी टाउनशिप में कार्यरत एक 27 वर्षीय कॉन्ट्रैक्ट सफाई कर्मी अभी भी काम कर रहा है। उसका कहना है कि वह हर दूसरे दिन ड्यूटी पर पहुंचता है। उसने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि कुछ कॉन्ट्रैक्टर सफाई कर्मचारियों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। जो लोग हड़ताल के खालीपन को भरने के लिए काम पर रखे जा रहे हैं, उन्हें भी समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है।
सोसायटियों और स्थानीय स्तर पर प्रभाव
सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए सनसिटी टाउनशिप की RWA चेयरपर्सन कुसुम शर्मा ने अतिरिक्त मजदूरों की नियुक्ति की है, लेकिन फिर भी स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पा रही है। इसके अलावा सेक्टर-56 में स्थिति और भी खराब है। वहां के स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले एक महीने में हालात बदतर हो गए हैं। नगर निगम के सुपरवाइजर राकेश कुमार ने सफाई व्यवस्था के ठप होने के पीछे कॉन्ट्रैक्ट बदलने और वेतन भुगतान में हुई देरी को एक बड़ा कारण बताया है। पार्कों और बाजार के आसपास कचरा उठने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है।
30 दिन बाद प्रदर्शन हुआ और उग्र
शुक्रवार को सफाई और फायर विभाग के सैकड़ों कर्मचारी अपनी हड़ताल के 30 दिन पूरे होने पर एकजुट हुए। नगरपालिका कर्मचारी संघ के बैनर तले इन कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यूनियन ने शनिवार को कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक राव नरबीर सिंह के सिविल लाइंस स्थित आवास तक विरोध मार्च निकालने का फैसला किया है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार अलग-अलग मंत्रियों के माध्यम से कभी 12, कभी 13 तो कभी 14 मांगें मानने का दावा कर रही है, लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई लिखित नोटिफिकेशन या आदेश जारी नहीं किया गया है। इसके अलावा, फायर सर्विस के कुछ कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस और निलंबन के आदेश मिलने से सरकार और कर्मचारियों के बीच तनातनी और बढ़ गई है।
मुख्य मांगें और भविष्य की राह
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- सफाई और सीवर कर्मचारियों की नियमित भर्ती की जाए।
- कॉन्ट्रैक्ट की व्यवस्था खत्म कर उन्हें पक्की नौकरी दी जाए।
- वेतन का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।
- लंबित मांगों पर सरकार ठोस और लिखित फैसला ले।
कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित समझौता नहीं हो जाता, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे। उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर सफाई और सीवर जैसे संवेदनशील विभाग में इतने वर्षों से केवल कॉन्ट्रैक्ट पर ही क्यों रखा जाता है, जबकि अन्य विभागों में नियमित नियुक्तियां होती हैं। अब देखना यह है कि सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।
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