मध्य प्रदेश
एक महीने पहले
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फतेहगढ़ में स्कूल निरीक्षण के दौरान बढ़ा विवाद
मध्य प्रदेश के गुना जिले के बमोरी क्षेत्र में स्थित फतेहगढ़ से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान एसडीएम और एक स्कूल प्राचार्य के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। सांदीपनि विद्यालय में निरीक्षण करने पहुंचीं एसडीएम शिवानी पांडे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे प्राचार्य को सरेआम खरी-खोटी सुनाती हुई नजर आ रही हैं। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और शिक्षक समुदाय में भारी रोष देखा जा रहा है।
क्या है मामला और एसडीएम का रुख
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सांदीपनि स्कूल परिसर में जलभराव और अतिक्रमण की लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनजर एसडीएम शिवानी पांडे अपनी टीम के साथ मौके का मुआयना करने पहुंची थीं। निरीक्षण के दौरान जब स्कूल के प्राचार्य भगवत प्रसाद ने परिसर में आ रही दिक्कतों और बाहरी लोगों द्वारा बाउंड्री वॉल के पास किए गए अतिक्रमण के बारे में अवगत कराया, तो स्थिति अचानक बदल गई। प्राचार्य का कहना था कि अतिक्रमण की वजह से बारिश का पानी विद्यालय परिसर में जमा हो रहा है, जिससे छात्रों की पढ़ाई और विद्यालय का संचालन प्रभावित हो रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
वायरल हो रहे इस वीडियो में एसडीएम शिवानी पांडे के तेवर बेहद सख्त दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने प्राचार्य को फटकार लगाते हुए कहा कि स्कूल की तमाम समस्याओं के मूल कारण वे स्वयं हैं। एसडीएम ने तल्ख लहजे में टिप्पणी की कि यदि प्राचार्य का यहां से तबादला कर दिया जाए, तो विद्यालय की सारी मुश्किलें खुद-ब-खुद हल हो जाएंगी। इतना ही नहीं, उन्होंने प्राचार्य के व्यवहार और कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए यह भी कह दिया कि उनकी हरकतों को देखकर ऐसा लगता है मानो यह विद्यालय उनके पिता की संपत्ति हो। यह वीडियो अब सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर जमकर शेयर किया जा रहा है।
एसडीएम का अपना पक्ष
जब इस पूरे मामले ने तूल पकड़ा, तो एसडीएम शिवानी पांडे ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राचार्य भगवत प्रसाद ने कलेक्टर को इस मामले में भ्रामक और गलत जानकारी दी थी। एसडीएम के अनुसार, प्राचार्य द्वारा एक विशेष समुदाय, अगरिया समुदाय, पर अतिक्रमण का आरोप लगाया जा रहा था, जबकि वास्तविकता यह है कि अभी तक स्कूल की जमीन का आधिकारिक सीमांकन ही नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि बिना सीमांकन के किसी एक समुदाय को दोषी ठहराना अनुचित है। साथ ही, एसडीएम ने प्राचार्य पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने स्कूल की बाउंड्री को गलत तरीके से आगे बढ़ाकर निर्माण किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके लिए प्रशासन में सभी संस्थाएं और समुदाय समान महत्व रखते हैं।
शिक्षक संगठनों में गहरा आक्रोश
इस पूरी घटना के बाद शिक्षक संगठनों का पारा सातवें आसमान पर है। विभिन्न शिक्षक संघों ने एसडीएम के व्यवहार को शिक्षक की गरिमा और सम्मान के खिलाफ करार दिया है। उनका कहना है कि सरकारी अधिकारी द्वारा एक शिक्षक के साथ इस प्रकार की अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है। शिक्षक संगठनों ने अब वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। इस घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर प्रशासन और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल, पूरे मामले पर जिला प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
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