दुर्गा पूजा 2026: दरभंगा में बनेगा 1.5 किलोमीटर लंबा नागलोक, नाग के पेट के रास्ते दर्शन करेंगे भक्त धर्म 3 घंटे पहले 7
दरभंगा के मिर्जापुर में इस साल दुर्गा पूजा के दौरान एक विशाल नागलोक पंडाल का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी लंबाई डेढ़ किलोमीटर है। श्रद्धालु नाग के मुख से प्रवेश कर उसके पेट के रास्ते माता रानी के दर्शन तक पहुँचेंगे।

दरभंगा में अनोखा नागलोक पंडाल

साल 2026 की दुर्गा पूजा दरभंगा के लिए काफी खास होने वाली है। जिले के मिर्जापुर इलाके में एक बेहद भव्य और अनोखा पंडाल तैयार किया जा रहा है, जिसे नागलोक की थीम पर आधारित किया गया है। यह पंडाल अपनी लंबाई और बनावट के कारण इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। पूजा समिति के सदस्यों के अनुसार, यह पूरे दरभंगा क्षेत्र में अपनी तरह का पहला प्रयास है जहाँ श्रद्धालुओं को एक दिव्य और रोमांचक अनुभव प्रदान करने की योजना है।

नाग के मुख से प्रवेश और डेढ़ किमी की यात्रा

इस अद्भुत पंडाल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी संरचना है। श्रद्धालु जब इस नागलोक में प्रवेश करेंगे, तो वे सीधे विशालकाय नाग के मुख से अंदर जाएंगे। इसके बाद, भक्त नाग के पेट से गुजरते हुए लगभग डेढ़ किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करेंगे, जिसके अंत में उन्हें माता रानी के दर्शन प्राप्त होंगे। यह पूरा सफर किसी रोमांचक यात्रा से कम नहीं होगा। पंडाल को एक पारंपरिक और दिव्य लुक दिया जा रहा है, जिसमें कला और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

सरोवर और पहाड़ों का अनुभव

नागलोक के इस सफर को और भी दिलचस्प बनाने के लिए इसमें प्राकृतिक दृश्यों का भी समावेश किया गया है। श्रद्धालु जब नागलोक के रास्ते से आगे बढ़ेंगे, तो उन्हें पहाड़ों के बीच बने एक सरोवर को पार करना होगा। इस मार्ग पर एक भव्य मनसा देवी द्वार भी बनाया गया है, जो भक्तों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभूति कराएगा। पूरी व्यवस्था इस तरह से की गई है कि भक्तों को रास्ते में पहाड़, सरोवर और नागलोक से जुड़े तमाम दृश्य देखने को मिलें, जो उनके लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होंगे।

वैदिक परंपरा का अनूठा संगम

मिर्जापुर का यह क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक तांत्रिक और वैदिक पूजा पद्धतियों के लिए काफी पुराना और प्रसिद्ध है। इसी प्राचीन परंपरा को बनाए रखने के लिए पूजा समिति ने इस बार नागलोक की थीम को चुना है। समिति के कोषाध्यक्ष प्रणव कुमार मिश्रा का कहना है कि कोलकाता से आए कुशल कारीगर इस पूरे पंडाल को आकार दे रहे हैं। इस ढांचे को मजबूती देने के लिए अब तक 2500 से अधिक बांसों का उपयोग किया गया है, जबकि पूरी संरचना मुख्य रूप से लोहे के पाइपों पर टिकी हुई है।

70 लाख रुपये की लागत

यह भव्य पंडाल न केवल अपनी लंबाई, बल्कि अपने बजट के लिए भी चर्चा में है। खबरों के अनुसार, इस पूरे पंडाल के निर्माण में लगभग 60 से 70 लाख रुपये की लागत आने का अनुमान है। समिति को उम्मीद है कि इस साल यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ेंगे। वर्तमान में पंडाल का काम अंतिम दौर में है और जल्द ही यह मिथिला क्षेत्र के सबसे भव्य पूजा स्थलों में से एक बनकर तैयार हो जाएगा। भक्तों को अब बस पूजा के शुरू होने का इंतजार है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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