गोरखपुर: 'किडनैपर-किडनैपर' चिल्लाकर बच्चे ने मचाया शोर, पुलिस की जांच में खुली चौंकाने वाली पोल उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 63
गोरखपुर में एक बच्चे के अपहरण का शोर मचाकर मदद मांगने की घटना सामने आई, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। हालांकि, जब सच्चाई सामने आई तो पता चला कि यह अपहरण नहीं, बल्कि पढ़ाई से बचने के लिए रचा गया एक नाटक था।

पुलिस और राहगीरों में मची अफरातफरी

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मंगलवार की रात एक बच्चे की 'बचाओ, बचाओ, मेरा किडनैप हो गया' जैसी चीखों ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। शोर सुनकर वहां से गुजर रहे लोग सहम गए और इसे किसी गंभीर अपराध या अपहरण की घटना मानकर तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दे दी। जैसे ही यह खबर स्थानीय थानों तक पहुंची, शाहपुर और चिलुआताल पुलिस हरकत में आ गई। तत्काल प्रभाव से कई पुलिस टीमें मौके पर तैनात कर दी गईं और आनन-फानन में गहन जांच अभियान शुरू हुआ। पुलिस ने न केवल घटनास्थल के आसपास के लोगों से पूछताछ की, बल्कि इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी बारीकी से खंगाला ताकि सच का पता लगाया जा सके। घंटों की कड़ी मशक्कत और पड़ताल के बाद जो खुलासा हुआ, उसने पुलिस और स्थानीय निवासियों को हैरान कर दिया।

नानी के घर जाने का अनोखा हथकंडा

पुलिस की जांच में पता चला कि यह पूरा मामला अपहरण का नहीं बल्कि बच्चे के अपने परिजनों के खिलाफ उठाए गए कदम का था। बच्चा पिछले कुछ दिनों से अपनी नानी के घर रह रहा था। मंगलवार की रात करीब 10 बजे, बच्चे की मां और उसके मामा उसे बाइक पर बैठाकर वापस घर ले जा रहे थे। रास्ते में ही बच्चे ने यह समझ लिया कि उसे घर जाना पड़ेगा, जहां शायद उसे पढ़ाई का दबाव झेलना होगा। उसने अपनी नानी के घर ही रहने की जिद पकड़ी थी और जब उसे जबरन ले जाया जा रहा था, तो उसने लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए अपहरण का ड्रामा रच दिया।

पढ़ाई के डर से रचा गया पूरा नाटक

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बच्चे, उसकी मां और उसके मामा से अलग-अलग कमरों में बैठकर पूछताछ की। इस दौरान पूरी घटना की वीडियोग्राफी भी की गई। पूछताछ के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बच्चा अपनी पढ़ाई को लेकर परेशान था और नानी के घर के माहौल को अधिक पसंद कर रहा था। बच्चे ने पुलिस को बताया कि उसका मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लग रहा था और वह नानी के यहां ही रहना चाहता था। उसने लोगों का ध्यान खींचने के लिए चिल्लाया ताकि भीड़ जमा हो जाए और वह वापस नानी के पास लौट सके।

जांच के बाद मामला हुआ शांत

इस पूरी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने एक घंटे के भीतर ही बच्चे और उसके परिजनों तक पहुंच कर सच्चाई का पता लगा लिया था, लेकिन मामले की पुष्टि के लिए रात के करीब 3 बजे तक पूछताछ का सिलसिला चलता रहा। चिलुआताल थाना प्रभारी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज की मदद से जब उस पते पर पहुंची, तो अपहरण का कोई भी तथ्य सामने नहीं आया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से बच्चे द्वारा पढ़ाई से बचने और नानी के घर रहने के लिए किया गया ड्रामा था। अंत में परिजनों ने बच्चे को फिर से नानी के घर छोड़ दिया।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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